नए सीबीआई प्रमुख का चयन न हो सका, प्रवीण सूद को मिला दूसरा सेवा विस्तार

7
सीबीआई निदेशक आईपीएस प्रवीण सूद ( फाइल फोटो )
सीबीआई निदेशक आईपीएस प्रवीण सूद ( फाइल फोटो )

भारत की प्रमुख जांच एजेंसी केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ( central bureau of investigation ) के नए प्रमुख का चयन न हो सकने के कारण केंद्र सरकार ने प्रवीण सूद  ( praveen sood ) की  सेवा में एक और साल का विस्तार मंज़ूर कर दिया है. भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी प्रवीण सूद को इस पद पर यह दूसरा विस्तार दिया गया है. वैसे  उनका कार्यकाल 24 मई, 2026 को खत्म होने वाला था. सेवा विस्तार का  फ़ैसला चयन समिति की सिफ़ारिशों के बाद कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने मंज़ूर किया.

भारतीय पुलिस सेवा के 1986 बैच के अधिकारी प्रवीण सूद 2023 से डायरेक्टर के पद पर सीबीआई प्रमुख  के तौर पर काम कर रहे हैं.  उन्हें इससे पहले मई 2025 में अपना मूल दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद एक साल का विस्तार दिया गया था और अब वह एक और साल तक एजेंसी का नेतृत्व करते रहेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय कमिटी ने मंगलवार (12 मई)  को नए सीबीआई  डायरेक्टर की नियुक्ति पर चर्चा करने के लिए बैठक की थी . बैठक के दौरान, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक असहमति नोट दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने सरकार पर एजेंसी पर “संस्थागत कब्ज़ा” करने और इसका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और असहमति की आवाज़ों के ख़िलाफ़ करने का आरोप लगाया.

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के आवास, लोक कल्याण मार्ग पर हुई यह बैठक तकरीबन एक घंटा चली. इस पैनल की अध्यक्षता नरेंद्र  मोदी ने की और इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ-साथ राहुल गांधी भी शामिल थे. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और लोकसभा में विपक्ष के नेता इस समिति के सदस्य होते हैं.

राहुल गांधी ने इस समिति की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए अपनी असहमति और नाराज़गी न  सिर्फ बैठक में जाहिर की बल्कि प्रधानमन्त्री मोदी के नाम लिखे पत्र में भी साफ साफ़ जताई . यह पत्र उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर अपने हैंडल की पोस्ट में भी साझा किया है . राहुल गांधी का कहना था  कि उन्हें उम्मीदवारों की अहम “360 डिग्री” रिपोर्ट देने से मना कर दिया गया और उनसे उम्मीदवारों के रिकॉर्ड की समीक्षा सिर्फ़ बैठक के दौरान करने को कहा गया. उन्होंने आरोप लगाया कि चयन  प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण और पहले से तय थी.

अपने असहमति नोट में, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सिलेक्शन पैनल में विपक्ष के नेता को शामिल करने का मकसद “संस्थागत कब्ज़ा” रोकना था, लेकिन उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में कोई भी सार्थक भूमिका निभाने से वंचित रखा गया.