कानपुर काण्ड : पुलिस, राजनीति और अपराधियों के खतरनाक गठजोड़ का नतीजा

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विकास दुबे के खासमख़ास बताए जा रहे जय बाजपेयी की अलग अलग मौकों पर कानपुर के डीआईजी/एसएसपी रहे अनंत देव के साथ वायरल तस्वीरें.

उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए बड़ी क्षति के साथ साथ उसके कामकाज के तरीके पर कई सवाल उठाने वाली, खौफनाक और शर्मनाक, कानपुर में पुलिस हत्याकांड की बारीकी से जांच करने की ज़रूरत पूरी पुलिस बिरादरी में की जा रही है. उत्तर प्रदेश में भी अपराधियों, नेताओं और पुलिसकर्मियों के भ्रष्ट आचरण की चीख चीख कर गवाही दे रही जंगलराज जैसी इस घटना की जांच की आंच बड़े अधिकारियों तक भी पहुँचने का अंदाज़ा है. फिलहाल तो इसकी तपिश में अभी स्थानीय चौबेपुर थाने के प्रभारी विनय तिवारी और यहाँ तैनात पुलिसकर्मियों तक पहुंची है. पूरा शक है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के ज़िम्मेदार यही पुलिसकर्मी हैं जिन्होंने उपाधीक्षक देवेन्द्र मिश्रा के नेतृत्व में छापामार कार्रवाई की तरह गई पुलिस टीम की खबर इस पूरे कांड के खलनायक विकास दुबे तक पहुंचाई. इनमें से कुछ को जांच पूरी होने तक सस्पेंड किया गया है.

डीएसपी की कथित चिट्ठी :

डीएसपी देवेन्द्र मिश्रा के दस्तखत वाली ये चिट्ठी कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी- SSP) को सम्बोधित है.

डीएसपी देवेन्द्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या से लाजिमी तौर पर मचे हड़कम्प ने इसलिए भी पुलिस का काम पर प्रश्नचिन्ह लगाये क्यूंकि बरसों के पुलिस इतिहास में ऐसी दुर्दांत वारदात, पूरे सिस्टम की मौजूदगी में, किसी भी रिहायशी आबादी वाले इलाके में नहीं हुई. वहीं विकास दुबे के सिस्टम में बढ़ते प्रभाव और दुस्साहस के फलस्वरूप इस तरह की जघन्य वारदात को अंजाम देने की उसकी नीयत और ताकत की तरफ इशारा करती एक कथित चिट्ठी ने पुलिस के बड़े अफसरों की नींद हराम कर दी है. डीएसपी देवेन्द्र मिश्रा के दस्तखत वाली ये चिट्ठी कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी- SSP) को सम्बोधित है जिसमें साफ साफ़ लिखा है कि चौबेपुर के थानाध्यक्ष विनय तिवारी की विकास दुबे से साठगाँठ है और विनय तिवारी की विकास के साथ नजदीकियां हैं. वहीं पहले तो पुलिस अधिकारियों ने देवेन्द्र मिश्रा की तरफ से लिखी गई ऐसी किसी चिट्ठी के अपने रिकॉर्ड में न होने की बात कही लेकिन बाद में कानपुर ज़ोन के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने मीडिया में वायरल हुई ये चिट्ठी मंगवाई और इस पहलू से जांच कराने का भरोसा दिलाया. इस बीच लखनऊ से आईजी लक्ष्मी सिंह इस पत्र कांड की जांच करने आज कानपुर पहुंची. उन्होंने जांच शुरु भी कर दी है.

गैंगस्टर विकास दुबे और वीरगति को प्राप्त उपाधीक्षक देवेंद्र मिश्रा.

कौन है जय वाजपेयी…..डीआईजी अनंत देव नपे :

इस चिट्ठी की तरह ही विकास दुबे के खासमख़ास शख्स जय बाजपेयी की अलग अलग मौकों पर कानपुर के डीआईजी/एसएसपी रहे आज की तारीख तक डीआईजी एसटीएफ अनंत देव के साथ खिंची तस्वीरें भी खूब वायरल हो रही हैं. कहीं वर्दी में तो कहीं सादा लिबास में दफ्तर से लेकर सार्वजनिक समारोह में सिर्फ दोनों की साथ साथ खिचीं तस्वीरें काफी कुछ इशारा करती हैं. चित्रों में अलग अलग ड्रेस और लोकेशन से साफ देखा जा सकता है कि जय बाजपेयी एक दो नहीं (चार ड्रेस तो फोटो में ही दिख रही हैं) कई दफा अनंत देव से आफिस और अन्य जगह मिला है. अनंत देव को आज शाम डीआईजी एसटीएफ के पद से हटाकर पीएसी मुरादाबाद भेज दिया गया है. उनकी जगह सुधीर कुमार सिंह को एसएसपी एसटीएफ बनाया गया है.

फिलहाल जय बाजपेयी भी पुलिस की हिरासत में है. उससे पूछताछ की जा रही है. जय विकास को महंगी लग्ज़री कारें मुहैया कराता था. हालत ये है कि बिना नंबर प्लेट की ये कारें बेरोकटोक चलती थीं. जय और विकास के बीच पैसे का लेनदेन भी होता था. इसके सबूत पुलिस को मिले हैं. कुछ साल पहले तक बेहद मामूली सी नौकरी करने वाले जय बाजपेयी के पास शानो शौकत का काफी सामान जुटना भी उसके विकास के साथ सम्बन्धों को पुष्ट कर रहा है. आठ पुलिसकर्मियों की हत्या की घटना के बाद जय बाजपेयी ने अपने मोबाइल का वह तमाम डाटा डिलीट कर दिया जो उसके और विकास के गठजोड़ की कहानी बयान करता है.

इनाम ढ़ाई लाख :

इस बीच पुलिस ने उतर प्रदेश और उससे सटी अन्य राज्यों की सीमाओं के साथ साथ नेपाल की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर भी चौकसी बढ़ाई है ताकि बिकरू गाँव के दबंग फरार विकास दुबे की धरपकड़ में कमी न छूटे. विकास दुबे की गिरफ्तारी या सुराग देने पर इनाम की धनराशि बढ़ाकर ढ़ाई लाख रूपये करने के साथ ही पोस्टरों के ज़रिये इसका प्रचार भी किया जा रहा है. राजनीतिक पकड़ वाले विकास दुबे पर पांच दर्जन से ज्यादा केस हैं और वांछित अपराधी होने के बावजूद स्थानीय पुलिसकर्मी उससे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लगातार सम्पर्क में रहते थे. कइयों के फोन रिकॉर्ड से भी पड़ताल में ये पता चला है. इस वजह से और केस की गंभीरता को देखते हुए चौबेपुर थाने में तैनात पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है जो अन्य थानों या इकाइयों से स्थानांतरित किये गये हैं. सभी पुराने पुलिसकर्मियों पर नज़र रखी जा रही है .

थानाध्यक्ष की दगाबाज़ी :

गैंगस्टर विकास दुबे और चौबेपुर के दगाबाज एसओ रहे विनय तिवारी

इससे पहले, ज़ोन के आईजी मोहित अग्रवाल ने रविवार को एनडीटीवी न्यूज़ चैनल को बताया था कि डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्र की अगुवाई में रेड के लिए गई पुलिस की टीम में विनय तिवारी शामिल तो हुए लेकिन विकास के घर तक पहुंचने से पहले ही वह टीम को छोड़कर भाग गए. इसलिए वो शक के दायरे में हैं और उनकी भूमिका की जांच हो रही है’. विनय तिवारी और तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड किये जा चुके हैं. आईजी श्री अग्रवाल ने कहा कि अगर कोई भी पुलिस कर्मचारी विकास के लिए मुखबिरी करने का दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ पुलिसकर्मियों की हत्या की साजिश का भी मुकदमा कायम होगा.

शहीद पुलिसकर्मियों के परिवार :

लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय से एक करोड़ रूपये की धनराशि का चेक लेते वक्त स्वर्गवासी डीएसपी देवेन्द्र मिश्रा की पत्नी आशा सदमे के कारण बेहोश हो गई.

इस बीच ड्यूटी को पूरा करने के दौरान जान गँवा बैठे आठों पुलिसकर्मियों के आश्रितों को आर्थिक सहायता के तहत एक-एक करोड़ रूपये की धनराशि के चेक दिए जा रहे हैं. ऐसा ही एक चेक लेते वक्त स्वर्गवासी डीएसपी देवेन्द्र मिश्रा की पत्नी आशा सदमे के कारण बेहोश हो गई और गिर पड़ीं. ये चेक उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय सौंप रहे थे. कारागार एवं लोक सेवा प्रबंधन राज्यमंत्री जय कुमार उर्फ जैकी चौबेपुर काण्ड में ही जान गंवाने वाले सिपाही राहुल के परिवार वालों और रिश्तेदारों से मिले. उन्होंने मंगलवार को रूरूकलां गाँव निवासी राहुल के पिता ओम कुमार को चेक सौंपते हुए वादा किया कि पुलिसकर्मियों का बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा. परिवार की सहमति से परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी दी जायेगी वहीं राहुल के नाम पर उसके गाँव में एक सड़क का नाम भी रखा जाएगा. राहुल के पैतृक गाँव में उसके नाम पर स्मृति द्वार या पार्क बनाने के लिए जगह की निशानदेही करने के जिलाधिकारी को आदेश दिए गये हैं. मंत्री ने विकास दुबे के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया.

बेटी ने कहा – पुलिस अफसर बनूंगी :

उधर वीरगति को प्राप्त डीएसपी देवेन्द्र मिश्रा की बड़ी बेटी वैष्णवी ने अब पुलिस अफसर बनने की इच्छा ज़ाहिर की है. वैष्णवी यूँ तो विज्ञान की छात्रा है उन्नाव के डिग्री कॉलेज से बीएससी करने के साथ नीट की तैयारी भी कर रही है. लेकिन पिता की मौत ने उसकी सोच और लक्ष्य बदल दिय है. उसका कहना है कि वे अपने पिता की तरह एक बहादुर पुलिस अधिकारी बनना चाहती है ताकि दुर्दांत अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचा सके. वैष्णवी से छोटी देवेश मिश्रा की एक और बेटी है वैशारदी.

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