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Delhi’s new Police Commissioner Asthana emphasized on team work

Delhi Police
On arrival at the Delhi Police Headquarters, the newly-appointed Police Commissioner Rakesh Asthana was received by senior IPS officer Balaji Srivastava who was given the additional charge of Commissioner of Police.

Rakesh Asthana, Indian Police Service officer of 1984 batch of Gujarat cadre , assumed the charge of Commissioner of Police, Delhi today. Although he has served as police commissioner in Surat and Vadodara cities of Gujarat, serving here is a challenging task for him.This is the first time that he has been given assignment with Capital’s police.

Delhi Police
IPS Rakesh Asthana taking over as Delhi Police Commissioner

Prior to this, Sh. Asthana was Director General of Border Security Force (BSF) and Director General of Narcotics Control Bureau (NCB). He has also held the positions of Special Director in the Central Bureau of Investigation (CBI ). Sh. Asthana also served as Director General, Bureau of Civil Aviation Security. IPS Rakesh Asthana did his graduation and post graduation from St. John’s College of Agra.

After taking over, the Police Commissioner Rakesh Asthana addressed the top police brass in Vimarsh Conference Hall at Police Headquarters while other senior functionaries joined him through video conferencing. Hailing Delhi Police as the premier police force of the country with a formidable reputation in delivering services and handling challenging situations, Sh. Asthana outlined basic policing – prevention and detection of crime and maintenance of law & order- and attention to special tasks as the priority areas for all to work upon.

Delhi Police
Special commissioner Balaji Srivastava and Sundari Nanda with newly appointed commissioner at Delhi Police Headquarters

According to a press release, Police Commissioner Asthana praised the track record of Delhi Police in handling law and order situations and stressed upon continuing the good works in busting cyber crime, terror, narcotics, gun smuggling etc. He also stressed on community policing initiatives like Yuva, senior citizen services etc. Shri Asthana said detection of crime and strong preventive measures not only reduce the crime burden but also ensure a feeling of safety and security in the city, particularly among women and vulnerable groups, for which police should keep making more and more efforts.

Delhi Police
IPS Rakesh Asthana as Delhi Police Commissioner

“Sh. Asthana emphasized team work and responsibility to achieve the goal of making Delhi Police one of the best metropolitan police in the world ” said the release.

Prior to this Sh. Asthana was welcomed by Special Commissioner Balaji Srivastava at police headquarters. Balaji Srivastava, an officer of 1988 batch of AGMUT cadre, was given additional charge of CP, Delhi after the superannuation of S N Srivastava earlier this month.

दिल्ली पुलिस के नये कमिश्नर राकेश अस्थाना कॉन्फ्रेंस में बोले- ‘टीम वर्क’ चाहिए

दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में आने पर नवनियुक्त पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना का स्वागत वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव ने किया जिन्हें पुलिस आयुक्त का अतिरिक्त काम का काम सौंपा गया था.

भारतीय पुलिस सेवा के गुजरात कैडर से दिल्ली पुलिस में लाये गए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना ने राजधानी की पुलिस की कमान सम्भालते ही अधिकारियों से दिल्ली पुलिस को दुनिया की बेहतरीन मेट्रोपोलिटन पुलिस बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए ‘टीम’ की तरह काम करने का संदेश दिया. मंगलवार की शाम आदेश जारी होने के बाद बुधवार को पुलिस कमिश्नर का कार्यभार सम्भालने के बाद राकेश अस्थाना ने जय सिंह रोड स्थित पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ‘विमर्श कान्फ्रेंस हॉल’ में बैठक की. इस बैठक में मुख्यालय के बाहर के दफ्तरों में मौजूद बाकी अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये जोड़ा गया था.

बैठक के दौरान कामकाज की रूपरेखा खींचते हुए श्री अस्थाना ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि अपराधों की रोकथाम और केस सुलझाने के साथ कानून व्यवस्था की स्थिति बहाल रखना और विशेष कार्यों पर ध्यान देने को प्राथमिकता बनाकर काम करना होगा. उन्होंने दिल्ली पुलिस की सेवाएँ देने वाले एक प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण हालात में काम करने वाले पुलिस बल के तौर पर सराहना की.

दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस कमिश्नर का कार्यभार लेते आईपीएस राकेश अस्थाना

एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़ नवनियुक्त पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने क़ानून व्यवस्था सम्भालने के साथ साथ साइबर अपराधों, आतंकवाद, नारकोटिक्स और असलहे की तस्करी जैसे अपराध करने वालों की धरपकड करने के दिल्ली पुलिस के ट्रेक रिकॉर्ड की तारीफ की और इस सिलसिले को जारी रखने को कहा. उन्होंने कहा कि अपराधों की रोकथाम के असरदार उपाय और अपराधियों पर नकेल कसने से न सिर्फ अपराधों का बोझ कम होगा बल्कि इससे लोगों में सुरक्षा की भावना भी बढ़ती है और खासतौर से महिलाओं और ऐसे वर्ग में जिनके अपराध की चपेट में आने की आशंका ज्यादा रहती है. श्री अस्थाना ने समुदाय पुलिस व्यवस्था के तहत शुरू की गई विभिन्न योजनाओं जैसे ‘युवा’ और ‘वरिष्ठ नागरिक’ आदि पर भी ज़ोर दिया.

गुजरात के वडोदरा और सूरत शहरों में कमिश्नर रह चुके राकेश अस्थाना के लिए दिल्ली में कानून व्यवस्था की कमान सम्भालना किसी चुनौती से कम नहीं है. यूँ दिल्ली उनके लिए नई नहीं है. उन्होंने आगरा के सेंट जॉन कॉलेज से स्नातक और स्नातकोत्तर जरूर किया है लेकिन दिल्ली में रहकर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई भी की है. सीबीआई, विमान पत्तन सुरक्षा महानिदेशालय और नारकोटिक्स ब्यूरो के प्रमुख के तौर पर दिल्ली में भी रह चुके हैं. लेकिन दिल्ली में क़ानून व्यवस्था सँभालने में उनका इस तरह के काम का पहला अनुभव है और दूसरे कैडर में नई टीम के साथ काम करना व काम कराना उनके लिए चुनौती का एक और पहलू है क्यूंकि कैडर के बाहर के अधिकारी होने के कारण अपनेपन वाले भाव का अभाव उनके लिए स्वाभाविक तौर पर एक परेशानी खड़ी करेगा.

दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में विमर्श हाल में नवनियुक्त कमिश्नर के साथ स्पेशल कमिश्नर बालाजी श्रीवास्तव और सुन्दरी नंदा

इससे पहले दिल्ली पुलिस मुख्यालय में आने पर उनका स्वागत वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव ने किया जिन्हें पुलिस आयुक्त का अतिरिक्त काम सम्भाले महीना भर भी नहीं हुआ था. बालाजी श्रीवास्तव एजीएमयूटी कैडर के 1988 बैच के आईपीएस हैं और उन्हें एसएन श्रीवास्तव के रिटायर होने पर हाल ही में पुलिस कमिश्नर की कुर्सी सौंपी गई थी. दिल्ली पुलिस के हलकों में माना जा रहा था कि जिस तरह कालान्तर में एसएन श्रीवास्तव को पहले अतिरिक्त कार्यभार के तौर गृह मंत्रालय ने राजधानी के पुलिस आयुक्त की कुर्सी पर बिठाया और बाद में नियमित किया था वैसे ही बालाजी श्रीवास्तव को भी बाद में पूरी तरह से आयुक्त की शक्तियाँ और अधिकार दे दिए जायेंगे.

हालाँकि ये पहली बार नहीं है जब दिल्ली में यूटी कैडर के बाहर से किसी अधिकारी को लाकर पुलिस कमिश्नर बनाया गया हो लेकिन दिल्ली पुलिस के इतिहास ये दो ही बार हुआ है. पहले एसएस जोग को 2000 के दशक के शुरुआत में जब उत्तर प्रदेश कैडर के अजय राज शर्मा को लाया गया. तब भी केंद्र सरकार में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक मोर्चा की सरकार थी. दिल्ली में संसद भवन जैसा खतरनाक हमला भी हमला भी हुआ था जो भारत में अब तक आतंकवादियों का सबसा बड़ा दुस्साहसिक हमला है. इसके बावजूद अजय राज शर्मा दिल्ली पुलिस के सफलतम आयुक्तों में से एक गिने जाते हैं.

दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस के कमिश्नर रहे अजयराज शर्मा
दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस के कमिश्नर रहे एसएस जोग.

वर्तमान हालात में कुछ अधिकारियों के पूर्वाग्रह भी श्री अस्थाना के लिए तब तक सुचारू रूप से काम करने में बाधा रहेंगे जब तक दोनों तरफ से एक दूसरे को कबूल करने के भाव का असर नहीं होता या जब तक नवनियुक्त आयुक्त नई टीम में रम नहीं जाते. हालांकि 1984 बैच के श्री अस्थाना की वरिष्ठता और देश की सत्ता के शीर्ष तक उनकी ज़ाहिर हो चुकी पकड़ उनके लिए मुश्किल काम को आसान बनाने में मददगार साबित होगी. सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ – BSF) के महानिदेशक बनने से पहले श्री अस्थाना नागरिक विमान पत्तन महानिदेशालय में महानिदेशक थे.

उससे पहले वह केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई – CBI ) में विशेष निदेशक थे और जहां निदेशक व अपने वरिष्ठ आलोक वर्मा के साथ उनके झगड़ा जगज़ाहिर हो गया था. उन पर भ्रष्टाचार का इलज़ाम लगा था और दोनों ही अधिकारीयों को सीबीआई से हटा दिया गया था. हालांकि बाद में श्री अस्थाना को इसमें क्लीन चिट मिल गई थी. इन सबके बावजूद रिटायरमेंट से सिर्फ चार दिन पहले अचानक राकेश अस्थाना को देश की राजधानी की पुलिस की कमान सौंपा जाना और कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया जाना उनकी सत्ता में पकड़ जग ज़ाहिर करता है. नई भूमिका में उनकी ये छवि सहायक भी हो सकती है.

दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस के नए कमिश्नर राकेश अस्थाना

उन्होंने भारत के ‘चारा घोटाला’ नाम से चर्चित सैकड़ों करोड़ रुपये वाले घोटाले और धोखाधड़ी व जालसाजी केस का परीक्षण भी किया जिसमें 1997 में पहली बार लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया गया था. राकेश अस्थाना का जन्म तत्कालीन बिहार के शहर रांची (अब झारखंड) में हुआ था.

आईपीएस अधिकारी प्रवीर रंजन चंडीगढ़ के नये डीजीपी होंगे

प्रवीर रंजन
प्रवीर रंजन (फाइल फोटो)

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी प्रवीर रंजन को संघ शासित क्षेत्र चंडीगढ़ का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है. श्री रंजन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजय बेनीवाल का स्थान लेंगे. उनकी नई तैनाती के सम्बन्ध में भारत सरकार के गृह मंत्रालय की तरफ से आज जारी आदेश में कहा गया है कि श्री बेनीवाल की नई नियुक्ति के बारे में अलग से ऑर्डर जारी किया जाएगा.

भारतीय पुलिस सेवा के एजीएमयूटी कैडर के 1993 बैच के अधिकारी प्रवीर रंजन अभी तक दिल्ली पुलिस में स्पेशल कमिश्नर के ओहदे पर हैं. वह कब नया कार्यभार सम्भालेंगे, अभी ये स्पष्ट नहीं है.

प्रवीर रंजन
प्रवीर रंजन चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक बनाए गए हैं.

संजय बेनीवाल ने जून 2018 में ट्राय सिटी चंडीगढ़ के पुलिस प्रमुख का कार्यभार सम्भाला था. वह भी एजीएमयूटी कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और 1989 बैच के हैं.

भारत के केंद्र शासित क्षेत्रों में से एक चंडीगढ़ का अलग से अहम स्थान है. अपराध और ट्रैफिक के मामले में कई स्थानों से बेहतर चंडीगढ़ को सिटी ब्यूटीफुल भी कहा जाता है. भारत के आधुनिकतम शहरों में से एक चंडीगढ़ की एक ख़ासियत इसका दो राज्यों (हरियाणा और पंजाब) की राजधानी होना भी है. तीन तीन सरकारों वाले इस शहर की संवेदनशीलता भी इस मामले में है. वैसे यहाँ का प्रशासक पंजाब का राज्यपाल होता है लेकिन व्यवहारिक तौर पर प्रशासक का सलाहकार ही यहाँ का शासन चलाता है. वह सलाहाकार केंद्र सरकार की तरफ से तैनात यूटी कैडर का वरिष्ठ आईएएस अधिकारी होता है.

Gujarat cadre IPS Rakesh Asthana is now Delhi Police Commissioner

Rakesh Asthana
IPS officer Rakesh Asthana assumes charge as @CPDelhi

Four days before his superannuation, Rakesh Asthana an Indian Police Service PS officer was on Tuesday appointed Commissioner of Delhi Police. Rakesh Asthana is a 1984 batch IPS officer of Gujarat cadre and was serving as Director General of Border Security Force. As per order he has been asked to join as the Delhi Police Commissioner with immediate effect. At present , Balaji Srivastava, a 1988-batch IPS officer of AGMUT cadre , is commanding the Capital’s Police as an additional charge of Commissioner. This is one of the rare cases when an IPS officer outside of the AGMUT cadre has been appointed as Delhi’s Top Cop .

Rakesh Asthana
Rakesh Asthana assumes charge as
CP Delhi

Shri Asthana, was to retire on July 31, 2021. According to the Ministry of Home Affairs order, Sh.. Asthana, who was serving as DG,BSF, will join as the Delhi Police Commissioner with immediate effect. Meanwhile IPS Surjeet Singh Deswal has been asked to take additional charge of DG, BSF till further order. Sh. Deswal is Director General of Indo Tibet Border Police (ITBP). He is a 1984 batch IPS officer from Haryana cadre .

Rakesh Asthana
Ministry of Home Affairs order.

.While clearing Mr. Asthana’s appointment as Delhi Police Commissioner , the Appointments Committee of the Cabinet (ACC), headed by Prime Minister Narendra Modi, approved the inter-cadre deputation from Gujarat to AGMUT cadre. The committee also extended Sh.. Asthana’s service initially for a period of one year , i.e. July 2022, beyond the date of his superannuation or until further order, whichever is earlier.

This is one of the very few instances (probably third) when an IPS officer outside of the AGMUT cadre has been appointed as the Chief of Delhi Police chief. Prior to Asthana, S S Jog and Ajayraj Sharma were two such officers.

Rakesh Asthana
Rakesh Asthana (Right) with Balaji Shrivastava.

IPS Rakesh Asthana had earlier served as the Special Director of the Central Bureau of Investigation. where he was engaged in an unsavoury spat with the then CBI Chief and Director Alok Verma. Both the officers were removed from the central probe agency. In 2019, Sh. Asthana was appointed DG , Civil Aviation Security. Shri Asthana was the Chief of Narcotics Control Bureau when actor Rhea Chakraborty was arrested in a drugs case in Mumbai. Shri Asthana investigated the infamous Fodder Scam and filed a chargesheet in !996. It was then Lalu Prasad Yadav first time in the case.

Rakesh Asthana also caught the Director General of DGMS taking bribes in Dhanbad (Bihar). Until then , this was the first case of its kind in India , when the officers of the Director-General rank had come under arrest. IPS Rakesh Asthana investigated the bomb blast case on July 26, 2008 in Ahmedabad. He had settled the case within 22 days. Rakesh Asthana had also examined the case of controversial Sant Asaram Bapu and his son Narayan Sai.

रिटायरमेंट से 4 दिन पहले राकेश अस्थाना दिल्ली के पुलिस कमिश्नर नियुक्त

राकेश अस्थाना
राकेश अस्थाना दिल्ली पुलिस के नए कमिश्नर.

रिटायरमेंट से सिर्फ चार दिन पहले ही सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक और भारतीय पुलिस सेवा के गुजरात कैडर के अधिकारी राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है. केन्द्रीय जांच ब्यूरो में विशेष निदेशक रहे 1984 बैच के अधिकारी राकेश अस्थाना को नई ज़िम्मेदारी देने की झटकेदार सूचना मंगलवार शाम अचानक ही मीडिया को दी गई. हालांकि एस एन श्रीवास्तव के पिछले महीने रिटायरमेंट के वक्त भी उनकी जगह राकेश अस्थाना को दिल्ली का पुलिस आयुक्त बनाये जाने की चर्चा थी लेकिन श्री अस्थाना की सेवानिवृत्ति की तारीख पास होने की वजह से इन सम्भावनाओं को ख़ारिज कर दिया गया था. 9 जुलाई को 60 वर्ष की उम्र पार कर चुके राकेश अस्थाना को 31 जुलाई को रिटायर होना था लेकिन उन्हें दो साल का सेवा विस्तार दे दिया गया है.

राकेश अस्थाना
राकेश अस्थाना (दाएं) का स्वागत करते दिल्ली पुलिस के कमिश्नर का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे बाला जी श्रीवास्तव

देसवाल को कमान :

दूसरी तरफ भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी – ITBP) के महानिदेशक एस एस देसवाल को राकेश अस्थाना की जगह सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक का काम संभालने को कहा गया है. वह आईटीबीपी के प्रमुख के साथ साथ अतिरिक्त रूप से बीएसएफ का कार्य तब तक देखेंगे जब तक बीएसएफ के लिए नियमित नियुक्ति नहीं होती या कोई और आदेश नहीं जारी होता. एस एस देसवाल भारतीय पुलिस सेवा के हरियाणा कैडर के 1984 बैच के अधिकारी हैं.

राकेश अस्थाना
राकेश अस्थाना की नियुक्ति का आदेश

दो साल का कार्यकाल :

केन्द्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से जारी आदेश में राकेश अस्थाना को तुरंत प्रभाव से दिल्ली पुलिस की कमान संभालने को कहा गया है. वह 31 जुलाई 2022 तक या अगला आदेश होने तक दिल्ली पुलिस के कमिश्नर बने रहेंगे. वर्तमान में बालाजी श्रीवास्तव दिल्ली पुलिस के कार्यकारी आयुक्त के तौर पर कमान सम्भाले हुए हैं.

अप्रत्याशित फैसला :

आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को राजधानी दिल्ली का पुलिस आयुक्त बनाया जाना अफसरशाही के लिए भी ये अप्रत्याशित ख़बर है. केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण दिल्ली में एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी को ही पुलिस कमिश्नर बनाया जाता है. हालांकि एस एस जोग और अजय राज शर्मा अपवाद हैं जो दूसरे कैडर के होते हुए भी दिल्ली के पुलिस कमिश्नर बनाये गए. श्री अस्थाना की पुलिस कमिश्नर पद पर नियुक्ति एक विशेष केस के तौर पर जनहित में लिया गया फैसला बताया गया है जो कैबिनेट की नियुक्ति मामलों की समिति की मंजूरी से हुआ.

राकेश अस्थाना
राकेश अस्थाना दिल्ली पुलिस आयुक्त का पदभार संभालते हुए.

विवादों में अस्थाना :

केन्द्रीय जांच ब्यूरो के तत्कालीन प्रमुख और निदेशक आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को लेकर हुआ वो विवाद जगजाहिर है जिसने देश की सबसे अहम मानी जाने वाली जांच एजेंसी सीबीआई की छीछालेदर कर डाली थी. आलोक वर्मा ने अस्थाना पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. आलोक वर्मा के बाद अस्थाना ही सीबीआई में दूसरे नम्बर पर सबसे बड़े अधिकारी थे. अस्थाना को 2018 में सीबीआई से हटा दिया गया था. इसके बाद 2019 में राकेश अस्थाना को विमानपत्तन सुरक्षा के महानिदेशक के पद पर नियुक्त कर दिया गया था. उन पर मीट के कारोबारी एक्सपोर्टर मोइन कुरैशी से जुड़े मामले में रिश्वतखोरी का आरोप लगा था जिससे उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी.

गौरवपूर्ण इतिहास के साथ सीआरपीएफ मना रही है 83 वीं सालगिरह

सीआरपीएफ
सीआरपीएफ के महानिदेशक कुलदीप सिंह ने गुड़गांव स्थित ग्रुप सेंटर में शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की.

भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा केन्द्रीय पुलिस संगठन केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ CRPF) आज अपनी 83 वीं सालगिरह मना रहा है. ब्रिटिश शासन के दौरान 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रेजेन्टेटिव पुलिस (सीआरपी -CRP) के तौर पर गठित सीआरपीएफ अब 246 बटालियन वाली विशाल पुलिस फ़ोर्स है जिसका मकसद देश में कानून ब्यवस्था की स्थिति कायम रखने में स्थानीय प्रशासन की मदद करना और आंतरिक सुरक्षा को कायम रखना है. स्थापना दिवस के अवसर पर आज सीआरपीएफ के प्रमुख और महानिदेशक कुलदीप सिंह ने गुड़गांव स्थित ग्रुप सेंटर में शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन जवानों को याद किया जिन्होंने कर्तव्य की बलिवेदी पर अपने प्राण न्यौछावर करते हुए मकसद को सरंजाम दिया. राष्ट्र सेवा में अब तक सीआरपीएफ के 2235 जवान शहीद हो चुके हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और भारत के सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे समेत कई गण्यमान्य लोगों ने इस अवसर पर सीआरपीएफ के काम की तारीफ करते हुए उसको बधाई दी है. सीआरपीएफ का वर्तमान स्वरूप भारत की अँग्रेज़ हुकूमत से आजादी के बाद 28 दिसम्बर 1949 को संसद में पास किये गए अधिनियम के बाद बनाया गया था. सबसे पुराने इस अर्धसैन्य बल को अँग्रेज़ सरकार ने अपनी नीतियों के हिसाब से अपना शासन चलाने में इस्तेमाल किया था.

भारत की पहली पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की सोच के मुताबिक़ इस बहुउद्देशीय पुलिस बल का गठन किया गया. इसने रजवाड़ों और रियासतों में बंटे देश को एक करने में अहम भूमिका निभाई. 1955 में सीआरपीएफ अधिनियम बनने के बाद इसके नियम कायदे बनाये और अमल में लाये गये. सीआरपीएफ अधिनियम के बाद 1955 में वीजी कनेतकर को इसका पहला मुखिया यानि महानिदेशक बनाया गया. बागी रियासतों को नियंत्रण में करने में सीआरपीएफ का इस्तेमाल किया गया.

आजादी के फ़ौरन बाद इसकी टुकड़ियों ने पाकिस्तान को छूती राजस्थान, गुजरात और सिंध सीमाओं को सम्भाला था. यही नहीं पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ और इसके बाद हमले रोकने में भी इसे तैनात किया गया था. चीन से सटी सीमा की रखवाली के दौरान 21 अक्टूबर 1959 को इसके गश्ती दल पर चीनी सेना द्वारा हुआ हमला शुरूआती दौर में इसका सबसे बड़ा नुकसान था जिसमें सीआरपीएफ के 10 जवानों ने सबसे बड़ा बलिदान दिया था. ये घटना लदाख सीमा पर तत्तापानी के पास हुई. पूरे भारत में इस दिन को पुलिस स्मृति दिवस के तौर पर मनाया जाता है. यही नहीं 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में सीआरपीएफ ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा जोड़कर काम किया. 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान भी पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर इसने सेना के साथ मोर्चा संभाला था.

करगिल विजय दिवस : 60 दिन चला युद्ध, भारत ने खोये थे 500 से ज्यादा सैनिक

करगिल विजय दिवस
करगिल विजय दिवस

पाकिस्तान की कब्जाई अपनी सैनिक चौकियां वापस हासिल करने और लदाख को भारत के हिस्से से काटने की बड़ी साजिश को नाकाम करने के लिए शहीद हुए भारत के 500 से ज्यादा सैनिकों की कुर्बानी को याद करने का आज एक अहम दिन है. भारत इसे करगिल विजय दिवस के तौर पर हर साल 26 जुलाई को मनाता है. इसी दिन वर्ष 2000 में, साठ दिन तक पाकिस्तान से चला वो संघर्ष खत्म हुआ जिसे अंतत: करगिल युद्ध का नाम दिया गया. शुरू में न तो भारतीय सेना को अंदाजा था और न ही पाकिस्तान ने ही इसमें अपनी सेना के शामिल होने की बात कबूल की थी. जम्मू कश्मीर के अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में लड़े गये इस युद्ध ने भारत – पाकिस्तान के उन सम्बन्धों में दरार और चौड़ी कर दी थी जो 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की करारी शिकस्त से पैदा हुई थी.

करगिल विजय दिवस
करगिल विजय के हीरो

करगिल का संघर्ष भारतीय सेना के लिए एक बड़ा सबक भी था. ये एक तरह से दोनों मुल्कों के सैनिकों के बीच एक स्तर पर भरोसे का कत्ल था जो पाकिस्तान की सेना ने किया था. इसकी साजिश की भनक कई दिन तक भारतीय सेना और गुप्तचर एजेंसियों को नहीं लगी थी. यही वजह है जो इस युद्ध को भारतीय जासूसों की नाकामी का नतीजा माना जाता है.

असल में अत्यधिक ऊंचाई वाले करगिल इलाके में सर्दियों में मौसम इतने खतरे पैदा कर देता है कि किसी भी इंसान के लिए वहां सामान्य गतिविधियां तक करना तो दूर एक जगह से दूसरी जगह तक जाना भी बेहद मुश्किल है. उस पर वीरान खतरनाक पहाड़ियां. ऐसे में दोनों देशों की सेनाओं ने आपसी समझ के तहत ये तय कर रखा था कि ऐसे खतरनाक हालात में सीमाई चौकियों से तैनाती हटाकर उन्हें खाली छोड़ दिया जाएगा. लेकिन 1998 की सर्दियों के बाद खाली छोड़ी गई इन चौकियों पर पाकिस्तान ने बर्फ पिघलने की शुरुआत में कब्जा करना शुरू कर दिया था.

करगिल विजय दिवस
करगिल विजय दिवस

करगिल युद्ध के शुरू में गैर सैनिकों/पाकिस्तानी जिहादियों की आड़ या भूमिका रही लेकिन उनके साथ पाकिस्तानी सैनिक और सेना का उपलब्ध कराया असलाह होता था. जिस तरह का गोला बारूद इस्तेमाल किया जा रहा था और संघर्ष चल रहा था वो स्पष्ट करता था कि पाकिस्तानी हमलावरों और घुसपैठियों के पीछे युद्ध प्रशिक्षित बल है. पाकिस्तान हमेशा कहता रहा कि इसमें उसकी सेना शामिल नहीं है. नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान के इस प्लान को ‘ऑपरेशन बदरी’ नाम दिया गया था जिसके खिलाफ भारत ने ऑपरेशन विजय किया था जिसमें तकरीबन 2 लाख सैनिकों को तैनात किया गया था.

करगिल विजय दिवस
22 साल पहले

पाकिस्तान ने शुरू -शुरू में इसे चुनिन्दा बागियों की करतूत कहकर प्रचारित किया लेकिन अंतत: साबित हो ही गया था कि इसमें पाकिस्तान की सेना शामिल थी. इसी के साथ इसे संघर्ष या झड़प की श्रेणी से बाहर निकाल कर युद्ध घोषित किया गया. हालांकि इसमें दोनों ही मुल्कों को भारी नुकसान हुआ. भारतीय सेना ने अपने कई नौजवान अधिकारी खोये. करगिल युद्ध के शहीदों की याद में करगिल समेत कई जगहों पर शहीद स्मारक बनाये गए जहां हरेक 26 जुलाई को शहीदों की याद में कार्यक्रम होते हैं. मुख्य कार्यक्रम राजधानी दिल्ली में होता है जिसमें तमाम सैन्य अधिकारियों से लेकर प्रधानमंत्री तक शामिल होते हैं.

भारत ने 22 वें करगिल विजय दिवस पर वीर सैनिकों को यूँ याद किया गया

करगिल विजय दिवस
युद्ध स्मारक पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

करगिल विजय दिवस के मौके पर आज भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने दिल्ली स्थित युद्ध स्मारक पर वीर सैनिकों को याद किया और श्रद्धांजलि अर्पित की. उधर भारत के सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 22 वें करगिल विजय दिवस पर, युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को याद करते हुए कहा है कि देश उनका हमेशा ऋणी रहेगा.

करगिल विजय दिवस
युद्ध स्मारक पर तीनों सेनाओं के प्रमुख

सेनाध्यक्ष नरवणे ने अपने ट्वीटर संदेश में कहा, ” देश की अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा देने वाले नायकों को हम स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. राष्ट्र हमारे बहादुरों की शूरवीरता और बलिदान के लिए हमेशा कर्ज़दार रहेगा.”

करगिल विजय दिवस
युद्ध स्मारक पर तीनों सेनाओं के प्रमुख

1999 में जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तान की कब्जाई अपनी सीमान्त फौजी चौकियों को छुड़ाने के लिए भारत की सेना ने ये युद्ध लड़ा था जो 60 दिन चला. शून्य से भी कम तापमान वाले करगिल जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में भारतीय सेना के वीर जवानों ने अदम्य साहस और शूरवीरता का परिचय दिया था.

करगिल विजय दिवस
युद्ध स्मारक पर रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट

ऐसे ऐसे स्थानों पर जाकर उन्होंने दुश्मन को सबक सिखाया जहां चलना तो दूर सामान्य तौर पर सांस लेना तक मुश्किल है. वजह ये है कि ये उतनी ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं जहां हवा में ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम होती है. लेकिन इस युद्ध में अपने इलाके पर फिर से अपना नियंत्रण पाने के लिए भारत को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी. भारत ने करगिल के युद्ध में 500 से ज्यादा सैनिकों को गंवाया.

प्रादेशिक सेना में भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू

प्रादेशिक सेना
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारतीय सेना की इकाई प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) में विभिन्न पदों पर भर्ती की प्रक्रिया की अधिसूचना जारी कर दी गई है. पात्र उम्मीदवारों से 20 जुलाई से 19 अगस्त के बीच ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं. परीक्षा के लिए योग्य पाए गए उम्मीदवारों की लिखित परीक्षा देशभर में अलग अलग केंद्रों पर 26 सितंबर 2021 को आयोजित की जायेगी.

सेना में शामिल होने के इच्छुक नौजवानों के लिए ये सुनहरा मौका है. प्रक्रिया के बारे में जानने और आवेदन करने के लिए और ज्यादा ब्यौरा जानने के लिए प्रादेशिक सेना की वेबसाइट jointerritorialarmy.gov.in पर लॉग इन करें. चयनित कर लिए जाने पर उम्मीदवार सिविलियन (नागरिक) के तौर पर भी और सैनिक तौर पर भी देश सेवा कर सकते हैं. आवेदन करने से पहले आवेदकों को शैक्षिक योग्यता, आयु, वेतन, चयन प्रक्रिया, परीक्षा के पैटर्न आदि के बारे में ठीक से जान लेना चाहिए.

प्रादेशिक सेना का गठन भारतीय संविधान सभा की तरफ से 1948 में पास किये गए एक अधिनियम के तहत किया गया. तदोपरांत इसकी स्थापना 1949 में हुई. प्रादेशिक सेना का मकसद संकटकाल में आंतरिक सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेना और ज़रूरत पड़ने पर नियमित सेना को एक बल प्रदान करना है. इस तरह ये नवयुवकों को देश सेवा का मौका भी देती है. सामान्य मजदूर से लेकर किसी विषय के विशेषज्ञ तक भारतीय नागरिक इसका हिस्सा बन सकते हैं बशर्ते वह शारीरिक रूप से सक्षम हों. इसमें भर्ती के लिए आयु सीमा 18 से 35 साल तक है.

पाकिस्तान से युद्ध में इस फ़ौजी ने जब बारूदी गंध वाली खट्टी बर्फ से भूख प्यास मिटानी चाही

मोहम्मद अफज़ल भट
मोहम्मद अफज़ल भट

दिसंबर का महीना. हाड़ मांस गला देने वाली सर्द अँधेरी रात और भारत-पाकिस्तान सीमा पर दोनों तरफ से होती गोलीबारी. क्षण भर के लिए रोशनी का अहसास भर तब होता था जब किसी बंदूक से लगातार फायरिंग होती थी. खून जमा देने वाली सर्दी में भी अच्छे अच्छों के पसीने निकाल देने के लिए काफी था ये मंजर जो 21 बरस के मोहम्मद अफज़ल भट और उसके कई साथी फौजियों ने पहली बार देखा और महसूस किया था. अफज़ल और उसके साथी बटालिक में तैनात जम्मू कश्मीर मिलीशिया (अब जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंटरी) के जवान थे.

बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल ए जी मुनिआवाला ने इस अल्फ़ा कम्पनी को असाल्ट लाइन बनाकर एडवांस करने का आदेश दिया था. हालत ये थी कि किसी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. न पहाड़ी के ऊपर मौजूद पाकिस्तानी सैनिकों को और न ही उनकी तरफ चुपचाप और छिपते हुए आगे बढ़ रहे हिंदुस्तानी सैनिकों को. दोनों मुल्कों की सरहद के तौर पर दिखाई देने वाला कुछ था तो वो बस एक पहाड़ी नाला था. उसकी आड़ में चलते चलते ज़रा सी आवाज़ हुई नहीं कि पहाड़ी पर मौजूद दुश्मन की फायरिंग उसी दिशा में होने लगती थी. जहां दिन में चुनौती थी कि कहीं दुश्मन की नजर न पड़ जाए इसलिए घुटने और कोहनियों के बल रेंग रेंग कर भारतीय सैनिक आगे बढ़ रहे थे लेकिन रात को हालात और भी खतरनाक हो जाते थे. पहाड़ी की आड़ लेकर नाले के किनारे किनारे आगे बढ़ते वक्त तब खतरा और बढ़ जाता था जब अँधेरे में पैर की ठोकर लगने पर पत्थर लुढ़क जाया करता था. ज़रा सी हलचल या पत्थर की आवाज़ सुनते ही अलर्ट दुश्मन की बंदूक की गोलियों और मोर्टार के गोलों की बारिश उसी दिशा में होने लगती थी. जब ज़रूरत महसूस होती तो सामरिक रणनीति के हिसाब से ही दुश्मन को जवाब दिया जाता था क्यूंकि हमला करने के नजरिये से दुश्मन सैनिक बेहतर स्थिति में थे.

मोहम्मद अफज़ल भट
फौज में ड्यूटी के दौरान ऐसे थे मोहम्मद अफज़ल भट

…और जब दाहिनी पसलियों के ठीक नीचे लगी गोली आरपार

कभी धीरे धीरे तो कभी तेज़ लेकिन दुश्मन की नज़र बचाकर आगे बढ़ते रहना इनका मकसद था. ऐसे ही हालात के बीच न जाने कब दुश्मन की बंदूक से निकला बर्स्ट आया जिसने मोहम्मद अफज़ल को निशाना बनाया. दाहिनी तरफ से पहाड़ी से बरसी इन गोलियों से एक उसकी दाहिनी तरफ की पसलियों के ठीक नीचे लगी और पीठ से बाहर जा निकली. क्षण भर तो समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है. कुछ और कदम धीरे धीरे बढ़ाने के बाद अफज़ल रुक गया. अब आगे बढ़ना मुमकिन नहीं था.

सिपाही मोहम्मद अफ़ज़ल का हाथ अपनी कमर की तरफ गया लेकिन डर लग रहा था कि कहीं हाथ लगने से जिगर या अंतड़ियां ही बाहर न आ जायें. बस इसी वजह से अफज़ल भट ने उस तरफ ध्यान न देना तय कर लिया. अफज़ल ने एक चट्टाननुमा बड़े पत्थर की आड़ ले ली. पत्थर का आकार कुछ गुफा की तरह था. लाइट मशीनगन पास में थी और वहां तकरीबन 5000 गोलियों से भरा बक्सा भी था. अफज़ल ने वहीं पर मोर्चा सम्भाल लिया. क्यूंकि सब साथी एडवांस कर रहे थे इसलिए उन्हें आगे बढ़ना ही था.

मोहम्मद अफज़ल भट
मोहम्मद अफज़ल भट अपनी पत्नी के साथ (फाइल)

साथियों ने मरा जानकर छोड दिया 

गोली लगने के बाद अफज़ल की हालत देख कुछ साथी उसे मृत ही समझ बैठे थे. ऐसे हालात ही नहीं थे कि उस वक्त किसी मृत या घायल साथी के इलाज के बारे में सोचा जा सके. अफज़ल को ठीक से याद ही नहीं कि कितने दिन वो भूखा प्यासा उस पत्थर के नीचे पड़ा रहा. युद्ध के लिए रवाना होने से पहले जो थोड़े से शकरपारे पिट्ठू बैग में रखे थे वो ख़त्म हो चुके थे. पानी भी खत्म था. भूख-प्यास की हालत में कभी कभी बेहोश भी हो जाता रहा होगा. जब नहीं रहा गया तो किसी तरह रेंगकर और साथ ही अपने बंदूक को भी धीरे धीरे आगे खिसकाते हुए गुफानुमा पत्थर से ज़रा बाहर आया और वहां जमी पड़ी बर्फ को ही खाना चाहा लेकिन ये क्या..! बर्फ तो मुंह में रखते ही बाहर उलट दी. गोली बारूद इतना चला था कि उसका स्वाद और गंध बर्फ में समा गए थे. अफजल शायद फिर से बेहोश हो गया. कई साथियों ने तो यकीन कर लिया कि अफजल अल्लाह को प्यारा हो गया. मोहम्मद अफज़ल को ठीक से याद नहीं कि इस हालत में कितने दिन बिताये होंगे. पूछा तो बोले, ” शायद 10-12 दिन”.

कहीं अंतड़ियां या गुर्दा ही बाहर न आ जाए

‘मुझे तो बस यही डर लगता था कि पेट के आसपास जहां से खून निकल रहा है वहां अपने आप कुछ करना चाहूँ तो कहीं ऐसा न हो कि अंतड़ियां या गुर्दा ही बाहर आ जाए. मैंने जब अपने दाहिने पैर से बूट उतारा तो वो मेरे उस खून से भरा पड़ा था जो कमर से रिसता हुआ टांगों से बहते पैरों तक पहुँच गया था”, मौत को सामने से मात देने वाला पूर्व सैनिक अफज़ल 50 साल पुराने युद्ध में आपबीती को ऐसे बता रहा था मानो सामने कोई फिल्म चल रही हो और साथ में उसकी कमेंटरी.

मोहम्मद अफज़ल भट
मोहम्मद अफज़ल भट अपनी पत्नी के साथ

अंतिम रस्में पूरी की गई…

उधर पाकिस्तान के हथियार डाल देने के साथ ही 1971 के इस युद्ध में सीजफायर हो गया लेकिन अनंतनाग के पहलू गाँव के नौजवान मोहम्मद अफज़ल के बारे में किसी को कुछ पता नहीं था. न सेना से खबर आई न किसी फौजी ने आकर बताया. बस गाँव में इतनी सूचना आई कि घायल हुए सैनिकों में से कइयों को राजधानी श्रीनगर के अस्पताल में लाया गया है. अफज़ल को खोजते अस्पताल पहुंचे उसके पिता हबीब भट को वहां पर इलाज के लिए भर्ती कराए गये घायल सैनिकों ने अफज़ल के मारे जाने के बारे में बताया. ज़ाहिर सी बात है कि तीन साल पहले पत्नी की मौत का सदमा और उसके बाद तीन बच्चों में से सबसे बड़े बच्चे अफज़ल को सेना के हवाले कर चुके हबीब भट को खबर ने भीतर से तोड़ दिया होगा. जवान बेटे की लाश तक न मिल पाने की तकलीफ ने इस गम को और बढ़ा दिया. खैर, वापस अपने गाँव पहलू लौटकर अंतिम रस्में पूरी की गई… कुरान खानी वगैरह.

भाई की तरह नर्स ने सेवा की

इधर राजधानी श्रीनगर के करीबी ज़िले अनंतनाग के पहलू गाँव में अफज़ल को शहीद मान कर सलाम किया जा रहा था और उधर लेह के अस्पताल में ज़िन्दगी के लिए संघर्ष कर रहा फौजी अफज़ल सेवा में रत नर्सों को दिन में सैकड़ों बार सलाम करता था. भारी भरकम गोला बारूद के साथ पहाड़ चढ़ते हुए दुश्मन से मुकाबला करते रहने वाला ये जवान उस हालत में था कि मल-मूत्र तक त्यागने के लिए किसी के सहारे की ज़रुरत पड़ती थी. खाने-पीने से लेकर नहलाने धुलाने और अफज़ल के कपडे बदलने तक का काम अस्पताल में नर्स खुशमिजाजी से करती थीं. मोहम्मद अफज़ल अस्पताल में बिताये उस वक्त को याद करते ही बेहद भावुक हो उठते हैं. कहते हैं, ” प्यार से उतनी सेवा कोई अपना ही सगा कर सकता हो. वो मेरी सेवा ऐसे करती थीं जैसे मैं उनका भाई हूँ. डॉक्टरों ने मुझे बताया कि मेरी जिंदगी मुश्किल से बची है. अगर गोली सूत भर भी इधर उधर होती तो मेरी रीढ़ में लगती. ऐसे में मेरा इतने दिन वहां पड़े रहकर बचना तो नामुमकिन था”.

मोहम्मद अफज़ल भट
मोहम्मद अफज़ल भट का परिवार.

ईमान की जीती जागती मिसाल

इतना ही नहीं जब थोड़ा सा सम्भला और मैंने अपने घर की बात बताई तो नर्स ने मुझे 4000 रुपये देने चाहे और कहा कि ये रखो और जब चाहो लौटा देना. ये बताते हुए 65 बरस के मोहम्मद अफज़ल के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई. बोले, ‘मैंने सोचा कि अगर पैसा ले भी लूं तो लौटाऊँगा कैसे? तब पैसा पहुंचाने का कोई साधन भी नहीं था. मुझे तब ये मेरी बहन तो बेईमान समझेगी’. मैंने उसे कहा, “मेरे सीओ के पास मेरा पैसा हिफाज़त से है, तुम चिंता न करो.” डॉक्टरों और नर्सों की मेहनत रंग लाई और मोहम्मद अफज़ल सेहतमंद हो गये. उन्हें कुछ और फौजियों के साथ लेह से विमान में श्रीनगर लाया गया. अफज़ल कहते हैं, ‘वो पहली बार बार था मैं हवाई जहाज़ में बैठा’. गाँव पहुँचने पर अफज़ल को देख सब हैरान थे. किसी को उनके ज़िंदा होने पर आसानी से यकीन ही नहीं हो रहा था. लेकिन इस फौजी अफजल की ज़िन्दगी ने तो अभी और उतार चढ़ाव देखने थे जो मां की मौत के बाद घर बार छोड़कर 18 साल की उम्र में भाग गया था. पढ़ाई लिखाई तो दूर स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी थी. अफज़ल कहते हैं, ” साब जी, फौज में भर्ती होने के बाद तीन महीने तक तो अंगूठा लगाकर तनख्वाह ली है मैंने’.

(अब नाती पोते वाले हो गये मोहम्मद अफजल भट की जिंदगी के संघर्ष और भी हैं. उनके फौजी जीवन के करियर की शुरुआत कैसे हुई और इस दौरान कैसी कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा..! इस सबके साथ इस जांबाज की वर्तमान चिंताओं का भी खुलासा करने वाला आलेख रक्षक न्यूज़ पर अगली कड़ी के तौर पर प्रकाशित किया जाएगा)

दिलचस्प किरदार का मालिक 1971 का युद्धवीर मोहम्मद यूसुफ खान

Extortion case against Top Cop Param Bir Singh in Mumbai

IPS officer Parambir Singh
IPS officer Parambir Singh

An FIR has been registered against the top cop Param Bir Singh, a former Police Commissioner of Mumbai , on the basis of a complaint filed by a businessman in Marine Drive police station. The complainant has alleged that IPS Param Bir Singh demanded rupee 15 Crore from him through a Deputy Commissioner rank officer.and few other police officers are also involved in it. A Mumbai court has sent two other accused to seven days police custody remand in the same case.

Meanwhile, the Maharashtra state government has given green signal to the Anti-Corruption Bureau (ACB) to conduct an open inquiry into the allegations of corruption against IPS Param Bir Singh made by inspector Arun Dange, an another police officer of Maharashtra. Inspector Dange was suspended last year and also reinstated into service this year only.

The complaint has been lodged against former police commissioner Param Bir Singh and others for allegedly demanding Rs 15 crore from a builder to withdraw cases against him. Two of the businessmen’s partners, Sunil Jain and Sanjay Punamia, have been arrested in the case.

IPC sections :

IPS Param Bir Singh has been charged under different sections of Indian Penal Code i. e. sections 387, 387, 389 for extortion, section 403 for dishonest misappropriation of converts to his own use, 409 for criminal breach of trust by a public servant, 420 for cheating, 423 for fraudulent execution of deed of transfer, section 464 for creating of false document in the name of a fictitious person, 465 and 467 for forgery, 120 B for being party to criminal conspiracy etc.

IPS Param Bir Singh :

An officer of the 1988 batch of Indian Police Service, Parm Bir Singh was removed as Mumbai police commissioner and transferred to the post of the Director General , Maharashtra Home Guard in March this year. This happened after the arrest of dismissed police officer Sachin Waze in the case of an ‘explosives laden vehicle ‘ found near the residence of Mukesh Ambani , one of the richest industrialists.

Now general public is informing about terrorists: Lt Gen D P Pandey

Lt Gen D P Pandey
Lt Gen D P Pandey

Indian Army’s 15 corps’s Commander Lieutenant General D P Pandey said that policy to end terrorism and bring normalcy in Jammu and Kashmir is crystal clear. The results are visible. In an exclusive chat with Rakshak News, Lt General Pandey spoke on terrorism and security forces issues. Lt Gen Pandey who specializes in security matters, assumed the office as Core Commander of 15 Corps four months ago. Maximum number of terror related incidents are reported under the jurisdiction of 15 Core command.

Lt Col Pandey said that the target of his commandant is to eliminate white color terrorists and army and security forces are closely working on it. White color terrorists are those who provide financial support to terrorists, make plan for them for execution. He claimed that those who supported terrorists and seperatists have been exposed.

Fifty seven year old Lt General Pandey who has an experience in handling infiltration and terrorist activity, said that there has been a sea change in the ground situation in Jammu and Kashmir. Incidents of stone pelting have come down. The moral of security forces has gone up. The local administration has seen a positive change. According to him, local people have started give tips on terrorists and their activities which was not the case earlier.

Lt Gen D P Pandey
Lt Gen D P Pandey with Sanjay Vohra (Editor, rakshaknews.in)

Lt General maintained that the availability of latest equipments and other supplies have helped security forces to fight terrorists with ease. This has led to decrease in the number of casualities on the part of security forces.

15 Corps: Background

15 Corps is also known as Chinar Corps Indian Army. Presently located in Srinagar, the 15 corps is mainly responsible for military operations in the Kashmir Valley. It has participated in all military conflicts with Pakistan and China till date.

Raised in 1916 as part of the British Indian Army during the First World War for operations in Egypt and France, 15 corps was disbanded after two years in 1918. In 1942, it was raised again to combat operations in Burma during World War II. After world war II, it served in Java and Sumatra. It was again disbanded in Karachi in 1947. It was re-raised after India became independent as part of the Indian Army, in 1948 as HQ Jammu and Kashmir Force.

It has undergone changes till its final redesignation as HQ 15 Corps in 1955 in Udhampur. In June 1972, HQ Northern Command was raised to take over operational control of Jammu & Kashmir. HQ 15 Corps moved to Srinagar to take charge of the Kashmir Valley and Ladakh. After Operation Vijay, HQ 15 Corps was made solely responsible for military operations in the Kashmir Valley.

Lieutenant Amtoj Singh Sidhu dies in road accident in Bhilwara

Lt Col Amtoj Singh Sidhu dies in road accident

Indian army has lost Lieutenant  Amtoj Singh Sidhu in a road accident in Rajasthan’s Bhilwara district on Monday. Lieutenant Amtoj Singh who belonged to 64 cavalry, was posted in Pathankot.

Lt Amtoj Singh, a resident of Chandigarh, was travelling to Ahmedabad for training when the accident occurred. The road accident happened in Rajasthan’s Bhilwara’s Mangalgarh sub division’s Bijoliya police station area.

Lt Amtoj’s jeep suddenly lost control and fell into a gorge near Mandol Dam, causing the death of Sidhu.

NCC, Gallantry Awards portal to honour war heroes on 75th independence anniversary

India's war heroes

National Cadet Corps (NCC) and Gallantry Awards Portal have jointly initiated a unique scheme to celebrate 75th year of independence and pay tribute to the gallants of the Armed Forces and others who made the supreme sacrifice in the service of the nation. Under the initiative, statues of the brave hearts will be adopted for cleaning and upkeep. Cadets will spread awareness among the people about the contribution and leadership traits of the War Heroes and other national personalities through interactive lectures, poetry recital, nukkad natak/dance etc.

So far NCC has adopted 46 statues of Gallantry award winners including 10 Param Vir Chakra, 6 Ashoka Chakra, 11 Mahavir Chakra, four Kirti Chakra, 12 Vir Chakra and three Shaurya Chakra.

Gallantry Awards Portal has been doing live webcast these events every week. People watch these events on the portal https://www.gallantryawards.gov.in/ and pay their tributes virtually. The first such event was webcast live on July 7, 2021 on trial basis. The next event is scheduled to take place on Thursday at 11 AM at Statue Junction, Tirupunithara at Kochi, Kerala, where the statue of Lt Col Ramakrishnan Vishwanathan, Vir Chakra, will be paid tribute by NCC.

Background of Vir Chakra LT Col Ramakrishnan Vishwanathan

Lt Col Ramakrishnan Vishwanathan was the Second-in-Command of 18 GRENADIERS who had conducted operations on and around Tololing mountain in Drass sector, Kargil during Operation Vijay. He was posthumously awarded the Vir Chakra for his actions during the Kargil war.

As part of the initiative, the local unit of NCC organises cleaning and information dissemination events on a weekly basis in the precincts of an adopted statue. NCC cadets of one or more educational institutions are tasked with the responsibility to carry out the activities. The event helps create awareness among the people about the deeds of the brave hearts of the country. It also aims to motivate people to participate in the Swachh Bharat campaign propagated by Prime Minister Narendra Modi to realise the ideals of Father of the Nation Mahatma Gandhi.

The initiative spreads the message of importance of ‘Swachhta’ in day-to-day lives and inspiring the local population to take care of local monuments and heritage. It further contributes towards harnessing the energy of the youth towards social causes and instilling a sense of patriotism in them. This initiative of NCC has got encouragement from all quarters.

Information of future events is available on Gallantry Awards portal. Also, people can send suggestions on this portal about statues requiring adoption by a local NCC unit.

Lt Gen Madhuri Rajeev Kanitkar is new VC of MUHS

Madhuri Rajeev Kanitkar
Lt Gen Dr. Madhuri Rajeev Kanitkar

Deputy Chief in Integrated Defence Staff , Lieutenant General Madhuri Rajeev Kanitkar has been appointed Vice Chancellor of Maharashtra University of Health Sciences (MUHS), Nashik. Maharashtra Governor and Chancellor of Universities in State Bhagat Singh Koshiyari made this appointed yesterday.

Sixty years old Lt. Gen Madhuri Kanitkar is a highly experienced doctor and a teacher. Born on October 1960 Lt Gen Madhuri Kanitkar obtained her MBBS degree from Armed Forces Medical College, Pune and she was a topper student in University. She did MD in Pediatrics and also obtained DNB pediatrics.

Madhuri Rajeev Kanitkar
Lt Gen Dr. Madhuri Rajeev Kanitkar

Interestingly she became Dean of the same medical college during her career in Indian Army. Lt Gen Madhuri Kanitkar was Dean of AFMS from January 2017 to May 2019. She has 22 years of experience in teaching and research.

According to a press release, Dr Kanitkar who is serving as Lt. Gen. in Indian Army has been appointed Vice Chancellor of MHUS for the term of 5 years or till she attains the age of 65 years, whichever is early.

First night checking by Delhi’s new police commissioner

Delhi Police
Delhi Police Commissioner Balaji Srivastava conducted checking during Saturday night.

Newly appointed Delhi Police Commissioner Balaji Srivastava conducted checking during Saturday night. He inspected presence of police personnel on ground and in police premises. IPS Balaji Srivastava interacted with staff during surprise visit and asked about the difficulties being faced by them. He also enquired about the facilities provided to them.

Delhi Police
Delhi Police Commissioner Balaji Srivastava conducted checking during Saturday night.

Accompanied with the staff officer DCP Varsha Sharma, Police Commissioner Srivastava talked to police personnel deployed at road pickets and on patrolling duties. CP also visited Police Stations R K Puram , South Campus as well as Daryaganj.

Delhi Police
CP visited Daryaganj Police Station.

 

According to a press release , Shri Srivastava also interacted with few complainants present in Police Stations. Interestingly , he briefed them about the recently launched Integrated Complaint Monitoring System (ICMS) and how to use Delhi Police website for registering e-complaints without visiting police station.

Delhi Police
CP in Police station

Balaji Srivastava was very much concerned about facilities provided and welfare measures being taken for the night patrolling staff.. New CP also instructed the District’s DCP’s to personally take care of this aspect.

Delhi Police
Delhi Police Commissioner Balaji Srivastava conducted checking during Saturday night.

CP Balaji Srivastava also saw the security arrangements at historical Red Fort (Lal Quila) as well as Gazipur Border where protesting farmers are sitting on indefinite DHARNA. It was a pleasure surprise for Inspector Pushp Lata as she got appreciation for her work during farmers protest march, Tractor Rally on 26 January. Inspector Pushp Lata showed exemplary bravery in controlling mob at Akshar Dham Temple during tractor rally.

Delhi Police
Srivastava also interacted with few complainants present in Police Stations.

New DGPs: Mukul Goyal UP , Syalendra Babu TN, Anil Kant Kerala

Mukul Goyal

New Director Generals of Police of three states have been appointed in the last 24 hours. Among the states who have new DGPs are Uttar Pradesh, Tamil Nadu and Kerala. While Balaji Srivastava took over as acting Delhi Police Commissioner, IPS officer Mukul Goyal has been appointed as UP DGP. The 1987 batch IPS Goyal succeeds DGP Hitesh Chandra Awasthi who retired on June 30. Goyal was serving as the ADG in BSF at the Chandigarh.

मुकुल गोयल

Anil Kant has been appointed as DGP Kerala while C Syalendra Babu has been appointed as DGP of Tamil Nadu. Syalendra Babu succeeded IPS J K Tripathi who too retired. Babu is 1987 batch IPS officer.

स्यलेंद्र बाबू
C Syalendra Babu appointed as TN DGP

Speculations were rife in Uttar Pradesh as to who will become the new DGP. Among the officers whose names were being discussed as DGP, the name of 1987 batch IPS Mukul Goyal was at the top. Besides him, names of Nasir Kamal and Sujanveer Singh were among the senior officers, but their chances of becoming DGP were negligible.
Goyal had met state Chief Minister Yogi Adityanath on June 29 and subsequently order for his appointment was issued. UP’s Chief Secretary Avnish Awasthi stated in his order that Goyal would take over as DGP of the state.

Goyal who hails from UP’s Shamli, is slated to retire in February 2024. However, he will be the DGP of Uttar Pradesh for two and a half years. The Samajwadi Party government had appointed Goyal as ADG ( law and order) in place of Arun Kumar who oversaw security arrangements in Muzaffarnagar after communal riots erupted.

 

Balaji Srivastava takes over as acting Delhi Police chief today, SN Shrivastava fails to get extension

Senior IPS Officer Balaji Srivastava will take over as Acting Police Commissioner of Delhi and succeed present police chief S N Srivastava who is set to retire today. The order has been issued with the approval of Delhi Lieutenant-Governor (L-G) Anil Baijal.
Balaji Srivastava is currently posted as Special Commissioner of Police, Vigilance in the Delhi Police. He is an officer with credible record. The order to appoint an acting Police Commissioner has made it clear that the Home Ministry has decided against giving an extension to present police chief S N Srivastava. The ministry will need some more time to decide who will be the next Police Commissioner. According to available information, few names appear to have been shortlisted but no final decision has been taken so far

Srivastava succeeds Shrivastava:

दिल्ली पुलिस
order for appointment

The order signed by Deputy Secretary (Home) Pawan Kumar on June 29, stated that consequent upon attaining the age of superannuation, SN Shrivastava, IPS (AGMUT; 1985) posted as the Commissioner of Police, Delhi shall stand retired from Government service with effect from June 30. It further stated that Balaji Srivastava, IPS 1988 batch will be holding the additional charge as Commissioner of Police, Delhi in addition to his regular charge until the appointment of regular incumbent or until further orders, whichever is earlier.

Contrary to expectations :

Interestingly, SN Shrivastava was appointed as full fledged Commissioner of Delhi Police last month . However, it was being expected that he would get an extension for some more time. The latest order has scuttled his chance of continuiung as Commissioner for more time. The order has also made it amply clear that the top officers in the Home Ministry were none too satisfied with the performance of present police chief , although he worked as full fledged Police Commissioner for one month only. He was holding the post of Delhi Police Commissioner as an additional charge since February 2020. A 1985-batch AGMUT cadre officer Shrivastava succeeded outgoing commissioner Amulya Patnaik when there was violent situation in northeast Delhi. Prior to this, Shrivastava was serving as Special DG (training), Central Reserve Police Force (CRPF). Shrivastava had a long association with the Delhi Police. He was the Delhi Police’s elite anti-terror unit chief till 2015 and later transferred to the Recruitment Cell and Delhi Armed Police 3rd Battalion. In a way he was repatriated to the Delhi Police in February 2020 from the Central Reserve Police Force (CRPF).

Interestingly, one finds a similarity in the manner of appointment of S N Srivastava and Balaji Srivastava for the top job.

Balaji’s background
He has a long experience of serving in different police departments all over the country. He has worked as Director General of Police (DGP), Puducherry, DGP, Mizoram, Special CP, Intelligence, Economic Offence Wing and Special Cell in Delhi Police. He also worked as Additional DG, Andaman and Nicobar Islands. He had also served in the Cabinet Secretariat for nine years and handled sensitive assignments.

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