प्रतिनिधि सभा में यह प्रस्ताव 215-208 वोटों से पास हुआ और अब सीनेट में जाएगा. सीनेट में इसे राष्ट्रपति के वीटो का सामना करना पड़ सकता है.
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स की विदेश मामलों की समिति ( foreign affairs committee) ने एक्स ‘ X’ पर पोस्ट किया, “यह अमेरिकी लोगों की ओर से डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक ज़ोरदार और स्पष्ट संदेश है: अब ईरान में उनके बेहद अलोकप्रिय और अवैध ‘अपनी पसंद के युद्ध’ (war of choice) को खत्म करने का समय आ गया है.”
यह पहली बार था जब रिपब्लिकन-नियंत्रित सभा ने ऐसा कोई प्रस्ताव मंज़ूर किया, जिसका मकसद ट्रंप पर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने का दबाव डालना था और ऐसा युद्ध शुरू होने के तीन महीने बाद हुआ.
डेमोक्रेट्स इस वोट को युद्ध और शांति से जुड़े फ़ैसलों में कांग्रेस की सांवैधानिक भूमिका को फिर से स्थापित करने के उनके प्रयासों में एक संभावित मोड़ के तौर पर देख रहे हैं.
मई के आखिर में सीनेट में भी इसी तरह का एक प्रस्ताव एक अहम प्रक्रियात्मक चरण से गुज़रा था. ऊपरी सदन (upper house) द्वारा इसे मंज़ूरी इसी हफ़्ते मिल सकती है — इस सदन में भी रिपब्लिकन पार्टी का ही मामूली बहुमत है. हालाँकि, रिपब्लिकन नेता इसके अंतिम रूप से पास होने को रोकने की कोशिश कर सकते हैं.
ट्रम्प प्रशासन का ज़ोर देकर कहना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध पहले ही खत्म हो चुका है, जबकि दोनों पक्षों की सेनाओं के बीच अभी भी गोलीबारी जारी है और शांति वार्ता में किसी भी तरह की वास्तविक प्रगति के बहुत कम संकेत मिल रहे हैं.
युद्ध संबंधी शक्तियां :
डेमोक्रेट्स डोनाल्ड ट्रम्प ( donald trump ) पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं . उनका कहना है कि ट्रंप ने फरवरी के आखिर में इज़रायल के साथ मिलकर ईरान पर हमले किए, जबकि इसके लिए कांग्रेस से कोई मंज़ूरी नहीं ली गई थी.
‘युद्ध संबंधी अधिकार अधिनियम’ (war powers act) के तहत, किसी भी राष्ट्रपति के पास अमेरिकी सेना को किसी भी तरह के संघर्ष में उतारने के बाद कांग्रेस से मंज़ूरी लेने के लिए 60 दिनों का समय होता है. यह समय सीमा कई हफ़्ते पहले ही खत्म हो चुकी है, और डेमोक्रेट्स का कहना है कि ट्रम्प अब कानून तोड़ रहे हैं. जबकि व्हाइट हाउस इस व्याख्या को नहीं मानता. उसका तर्क है कि अप्रैल में हुए संघर्ष-विराम (ceasefire) के कारण यह समय सीमा वहीं रुक गई थी. वैसे ट्रंप ने बार-बार हमले फिर से शुरू करने की धमकी दी है, और इस हफ़्ते तनाव और भी ज़्यादा बढ़ गया है.
मंगलवार रात, अमेरिका ने बताया कि उसने ईरान के कुछ ड्रोन मार गिराए हैं और ईरान के एक ‘ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन’ पर हमला किया है. वहीं, ईरान की सेना ने भी खाड़ी क्षेत्र में अपने कई पड़ोसी देशों की ओर ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं.
ट्रम्प का समर्थन करने वाले रिपब्लिकन नेताओं की दलील है कि यह प्रस्ताव अमेरिका को कमज़ोर करेगा, जबकि ईरान अभी भी एक संवेदनशील स्थिति में बना हुआ है. हालांकि , उनकी हताशा अब और भी ज़्यादा साफ़ तौर पर दिखाई देने लगी है, क्योंकि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले उन पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.













