
यह घटना नालंदा खुला विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम के दौरान हुई जब राज्यपाल सैयद अता हसनैन ( governor syed ata hasnain ) वहां मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे. प्रोटोकॉल के मुताबिक़ बिहार पुलिस की टुकड़ी ने राज्यपाल सैयद अता हसनैन को गार्ड ऑफ़ अनर ( guard of honor ) दिया. पुलिस टुकड़ी को एक युवा अधिकारी कमांड कर रहे थे लेकिन गार्ड के जवानों को निर्देश देने की उनकी रफ्तार तेज़ी थी. ऐसे में खुद एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी रहे सैयद अता हसनैन से रहा नहीं गया और उन्होंने गार्ड कमांडर को इस बारे में बताया.
राजपाल ने इस बीच वहां मौजूद नालंदा के एसपी भारत सोनी को भी अपने पास बुलाकर सलामी के नुक्ते बताए और कहा कि कमान देते समय कमांडर को शब्दों के बीच ठहराव देना चाहिए. इसमें जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं होती.
बिहार के राज्यपाल ने गार्ड ऑफ़ ऑनर के दौरान कमांडर की तरफ दिए जाने वाले निदेश में रफ्तार और स्पष्टवादिता की जो कमी पकड़ी है वैसी गलती आमतौर पर कई बार विभिन्न वर्दीधारी संगठनों के मामलों में देखी गई है . जो लोग पुलिस या सेना के तौर तरीकों या भाषा से वाकिफ नहीं होते उनको तो कई बार समझ ही नहीं आता कि गार्ड कमांडर इतनी तेजी से चिल्ला कर आखिर कहना क्या चाहता है .









