जब -9 डिग्री तापमान में नागरिकों के लिए सैनिकों ने खाली कीं अपनी बैरेक

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भारतीय सेना
सेना के जवानों ने अपनी बैरक सैलानियों के लिए खाली कर दीं.

जिस वक्त पूरा भारत नये साल 2019 के स्वागत के जश्न की तैयारी में जुटा हुआ था उस वक्त भारतीय सेना के जवान जबरदस्त बर्फ़बारी में फंसे ढाई से तीन हज़ार सैलानियों को सुरक्षित बचाने और आराम से रखने की खातिर के खतरनाक मौसम की चुनौती कबूल करके अपनी जान ज़ोखिम में डाल रहे थे. सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचे ये सैलानी भारतीय सेना के इन जवानों को खूब दुआएं दे रहे हैं.

भारतीय सेना
नाथु ला रोड पर जबरदस्त बर्फ़बारी में फंसे सैलानियों को आप सेना के जवानों की बैरक में देख सकते हैं.
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जवानों ने बीमार और अशक्त हो गये सैलानियों को ऐसे गंगटोक पहुँचाया.

सैलानियों से भरे करीब तीन सौ वाहन 28 दिसम्बर को भारत-तिब्बत के बीच रास्ते पर नाथु ला रोड पर जबरदस्त बर्फ़बारी में फंस गये थे. चीन सीमा के पास से लौट रहे इन वाहनों में बड़ी तादाद बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भी थी. कड़कड़ाती ठंड और उस पर 13 हजार फुट की उंचाई, कइयों को तो सांस तक लेने में दिक्कत हो रही थी. ये पूर्वी सिक्किम का इलाका था जहां अचानक बर्फ़बारी हुई.

ऐसे में यहाँ सेना के जवानों ने मुसीबत में फंसे देशवासियों को बचाने के लिए तुरंत मोर्चा सम्भाल लिया. उन्हें निकालकर गंगटोक पहुँचाने का सिलसिला शुरू किया गया. सेना के जवानों ने अपनी बैरक इन सैलानियों के लिए खाली कर दीं. उनके खाने, पीने और रहने के बन्दोबस्त के साथ साथ, मौसम की मार से बीमार हुए लोगों को इलाज भी मुहैया कराया. सेना के अतिरिक्त डॉक्टर बुलाये गये. जीरो से नौ डिग्री कम (-9) तापमान में खुद बाहर रहे. यहाँ तक कि अपने स्लीपिंग बैग भी नागरिकों को सोने के लिए दे दिए. 90 लोगों को एम्बुलेंस में ले जाया गया जिन्हें सांस लेने में दिक्कत या ऐसी ही कोई अन्य समस्या हो रही थी.

भारतीय सेना के जवानों की इस मदद से बहुत से सैलानी भावुक हो उठे और वे अपने जीवन के इस जोखिम भरे तजुर्बे को विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों पर साझा कर रहे हैं. हाल के वर्षों भारतीय सेना के किये गये सबसे बड़े राहत अभियान की कई तस्वीरें भी लोगों ने साझा की हैं.

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