वन्दे भारत मिशन के विमान को उड़ाने वाले गज़ब के पायलट थे दीपक साठे

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पायलट दीपक वसंत साठे और एयर इंडिया का दुर्घटनाग्रस्त विमान.

केरल के कोझिकोड में शुक्रवार को हुए विमान हादसे के सही सही कारणों का पता तो जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही लगेगा लेकिन जानकार एयर इण्डिया के इस बोइंग को उड़ा रहे पायलटों की सूझबूझ की तारीफ कर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि अगर लैंडिंग के वक्त क्रैश से पहले हवाई जहाज़ का इंजन बंद न किया गया होता तो ‘वन्दे भारत मिशन’ के तहत दुबई से आये इस हवाई जहाज़ में आग लग सकती थी और ऐसे में और भी यात्रियों की जानें जातीं. हवाई जहाज़ की उड़ान की कमान सम्भाल रहे पायलट दीपक वसंत साठे भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त विंग कमांडर थे जो शानदार लड़ाकू पायलट होने के साथ साथ सेना के टेस्ट पायलट भी रहे. फौजी परिवार से ताल्लुक रखने वाले, अनुभवी पायलट दीपक साठे और आखिरी साबित हुई इस उड़ान में उनका साथ दे रहे ‘को-पायलट’ अखिलेश कुमार के पार्थिव शरीर रविवार को परिवार वालों को सौंपे गये.

पायलट दीपक वसंत साठे

विमान उड़ाने के शानदार रिकॉर्ड वाले 59 वर्षीय दीपक वी साठे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के 58 वें कोर्स के दौरान लगभग सभी मेडल से सम्मानित किये गए. दीपक साठे सबसे होनहार कैडेट थे जिन्हें स्वॉर्ड ऑफ़ ऑनर (sword of honour) से सम्मानित किया गया था. मुम्बई के पवई इलाके में पत्नी सुषमा और दो बेटों के साथ रहने वाले दीपक वी साठे ने वायु सेना छोड़ने के बाद भारत की सरकारी विमानन कम्पनी एयर इण्डिया की नौकरी शुरू की थी. आसमानी परवाज़ के जुनूनी विंग कमांडर दीपक वसंत साठे बोइंग 737 उड़ाने का 10 हज़ार घंटे का तजुर्बा रखते थे और कमांडर के तौर पर भी वह साढ़े छह हज़ार घंटे से ज्यादा उड़ान भर चुके थे. लिहाज़ा ऐसे में किसी को यकीन नहीं हो सकता कि हादसा पायलट की किसी गलती से हुआ होगा. उनके परिवार में पत्नी सुषमा और दो बेटे हैं.

पायलट दीपक वसंत साठे और उनकी पत्नी. (फाइल)

अजीब त्रासदी :

इस मराठा फौजी परिवार के लिए दीपक का यूँ दुनिया से हमेशा के लिए परवाज़ भर जाना न सिर्फ परिवार जन की मृत्यु जैसे है बल्कि ये हमेशा के लिए भयानक त्रासदी की तरह याद रहेगी. कम से कम साठे परिवार के मुखिया 87 बरस के रिटायर्ड ब्रिगेडियर वसंत साठे और 83 वर्षीय उनकी पत्नी नीला के लिए. वर्तमान में नागपुर के भारत नगर में रह रहे इस बुजुर्ग दम्पति ने अपने छोटे बेटे दीपक से पहले बड़े बेटे सेकण्ड लेफ्टिनेंट विकास साठे को खोया था जब वह एक सैन्य अभ्यास के बाद लौट रहा था. ये 1981 में उन्हीं दिनों की बात है जब दीपक भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे. खुद ब्रिगेडियर वसंत साठे भारतीय सेना की आर्मी एजुकेशन कोर्प्स (Army Education Corps) में थे.

पायलट दीपक वसंत साठे और उनकी पत्नी. (फाइल)

माँ बाप का दुःख तो हिला देने लायक :

दो बेटे को अपने हाथों से इस दुनिया से रुखसत करने वाले पिता ब्रिगेडियर साठे जबरदस्त सदमे में थे और आँख से आंसू की एक बूँद तक नहीं गिरी. वहीं उनकी पत्नी नीला के लिए छोटे बेटे की मौत की खबर की तारीख तो और भी अजीब साबित हुई. शुक्रवार की शाम हुई इस दुर्घटना की सूचना नीला को जब शनिवार की सुबह मिली तो वह दरअसल उनके 83 जन्मदिन की तारीख थी. कई बरस पहले भी दीपक एक दुर्घटना में गम्भीर रूप से घायल हुए थे. ये हादसा चण्डीगढ़ में हुआ था. उनके सिर में चोट लगी थी और इलाज के लिए उन्हें एयर लिफ्ट करके दिल्ली लाया गया था.

पायलट दीपक वसंत साठे के माता-पिता.

जांबाज़ी और सूझबूझ :

गज़ब के जीवट वाले दीपक उस हादसे से बहादुरी के साथ न सिर्फ उबरे बल्कि मिग 21 और मिराज़ जैसे लड़ाकू भी लगातार उड़ाते रहे. फ्रांस से खरीदे गए मिराज़ लड़ाकू विमान वहां से लाने वालों में दीपक भी थे. तकरीबन 20 साल पहले भी दीपक साठे ने अपने साहस और सूझबूझ का परिचय तब दिया था जब उनके जहाज़ का इंजन फेल हो गया था. दीपक से कहा गया था कि वह खुद को विमान से इजेक्ट कर लें लेकिन दीपक ने अपने हुनर और जांबाज़ी की बदौलत विमान को सुरक्षित लैंड कराया. दीपक साठे हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के लिये बतौर टेस्ट पायलट भी काम कर चुके थे.

दीपक जिस स्क्वाड्रन में थे उसने 1999 में करगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया. वह गोल्डन एरोज़ स्क्वाड्रन से ताल्लुक रखते थे. उनके कुछ रिश्तेदारों का कहना है कि केरल के कोझिकोड हवाई अड्डे में लैंडिंग की समस्या का दीपक साठे ने पहले भी ज़िक्र किया था.

को पायलट अखिलेश कुमार. वह भी वीरगति को प्राप्त हुए. नमन है.

यूँ हुआ हादसा :

दरअसल ये हादसा तब हुआ जब बरसात के दौरान रन वे पर पानी भरा हुआ था. लैंडिंग के वक्त रन वे बदला गया और रन वे पर उतरने के बाद बोइंग रनवे से फिसल गया और बाहर निकल तकरीबन 30 फुट की ढलान से नीचे चला गया. विमान के दो टुकड़े हो गये. आसपास की रिहायशी बस्ती के लोग भी वहां पहुँच गये. हादसे की खबर सबसे पहले वहां तैनात केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों ने दी और विमान में फंसे घायल यात्रियों को तुरंत निकालने के लिए सीआईएसएफ के अधिकारियों, नागरिकों से राहत कार्य में मदद ली. हादसे में 18 लोगों की जान गई और 100 से ज्यादा यात्री घायल हुए.

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