ये है भारतीय सेना के पाकिस्तान में दागे गये रवीना टंडन मिसाइल बम का राज़

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रवीना टंडन बम दागने के लिए फिट करने ले जाता वायुसैनिक

भारत और पाकिस्तान के बीच 21 साल पहले हुए करगिल युद्ध की पृष्ठभूमि 1999 मई महीने में ही बनी थी और हर साल इन दिनों में उस युद्ध से जुड़ी वीरता, शहादत और दर्द भरी अलग अलग तरह की कहानियाँ कही, सुनी और पसंद की जाती हैं. लेकिन यहाँ, उस समर में दो मुल्कों की सीमा पर जनमा एक किस्सा बयाँ किया जा रहा है जो, हर हालत में, भारतीय सैनिकों की जिंदादिली का दिलचस्प नमूना है. ये है उस ज़माने में हिन्दी सिनेमाई दुनिया की सुपर स्टार रही रवीना टंडन के नाम पर भारतीय वायु सेना के दागे गये एक मिसाइल बम का नामकरण.

रवीना टंडन बम दागने के लिए फिट करने ले जाता वायुसैनिक

दुनिया भर में आमतौर पर सेना के परिसरों, दफ्तरों, द्वारों, रवायतों और अस्त्रों शस्त्रों का नामकरण ऐतिहासिक महत्व, उनसे जुड़ी घटनाओं और शख्सियतों के नाम पर किया जाता है लेकिन पाकिस्तान पर दागते समय भारतीय सेना का इस मिसाइल बम का नाम रवीना टंडन रखे जाने के पीछे बेहद मज़ेदार कहानी है लेकिन ये गुस्से का भी इज़हार करना कहा जा सकता है. इसका ताल्लुक उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे मियाँ मुहम्मद नवाज़ शरीफ से है जिनकी उम्र तब 50 साल से थोड़ी कम थी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर ये उनका पहला कार्यकाल था.

भारत के पंजाब से अलग होकर बने पाकिस्तानी पंजाब के लाहौर शहर से ताल्लुक रखने वाले नवाज़ शरीफ़ उस समय बॉलीवुड की सुपर स्टार रहीं रवीना टंडन और माधुरी दीक्षित के फैन थे. 90 के दशक में दोनों हीरोइनें भारत ही नहीं विदेशों में अपनी खूबसूरती और एक्टिंग का जादू बिखेर रही थीं. बुलंदियों पर पहुँची रवीना और माधुरी की फ़िल्में नवाज़ शरीफ भी बहुत पसंद करते थे. कहा जाता है कि करगिल युद्ध से पहले भारत के दौरे पर आने पर एक बार उन्होंने इस बात का इज़हार किया था.

भारत के जवाब के तौर दागे रवीना टंडन बम के कारण पाकिस्तान में नवाज़ शरीफ़ की आज भी खिल्ली उड़ाई जाती है

इसलिए रखा बम का नाम :

करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने भारत का मज़ाक उड़ाते हुए सेना को ललकारा था और कहा था कि अगर मर्द हो तो अपने मरे हुए जवान खुद आकर ले जाओ नहीं तो हम इन्हें दे देंगे, बस शर्त है कि तुम हमें रवीना टंडन और माधुरी दे देना. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के इन हीरोइनों के फैन होने और इस धमकी को जोड़कर जवाब देने का ख्याल ऐसे कुछ सैनिकों को आया जो सीमा पर जंग लड़ रहे थे. उन सैनिकों ने नवाज़ शरीफ़ को ‘उपहार’ स्वरूप देने के लिए इस बम का नामकरण किया. ये भारतीय वायुसेना की एक मिसाइल थी जिसे पाकिस्तान पर दागने से पहले रवीना का नाम दिया गया.

क्या था ये बम :

भारतीय सैनिकों ने ये जो उपहार तैयार किया वो एक मिसाइल वॉर हेड है, जिस पर सफेद पेंट से अंग्रेजी में लिखा है – रवीना टंडन की तरफ से नवाज़ शरीफ के लिए (FROM RAVEENA TONDON TO NAWAJ SHARIF). हालांकि ये सैनिकों ने अपनी तरफ से किया था और इस बारे में सरकार को पहले से कुछ पता नहीं था. गुस्से में भेजे गये इस उपहार में बीचों बीच दिल बनाया गया था जिसमें आर पार हुआ एक तीर भी था. करगिल युद्ध के काफी साल बाद भी ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है जिसे दागने के लिए फिट करने ले जाता वायुसैनिक दिखाई दे रहा है.

करगिल युद्ध के बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़

कौन है नवाज़ शरीफ़ :

पाकिस्तान में तीन बार प्रधानमंत्री बने मियाँ मुहम्मद नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के पंजाब में मुख्यमंत्री भी रहे. 25 दिसम्बर 1949 को लाहौर के एक उच्च मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा हुए नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान में बतौर प्रधानमंत्री रहकर सबसे ज्यादा समय तक (नौ साल) राज करने वाले सियासतदां हैं लेकिन उतनी ही बदनामी और ज़लालत का भी सामना उनको करना पड़ा. स्टील के कारोबारी नवाज़ शरीफ के परिवार की गिनती पाकिस्तान के सबसे रईस घरानों में होती है. भ्रष्टाचार और पनामा पेपर्स विवाद में नाम आने के बाद उन्हें 2017 में प्रधानमंत्री की कुर्सी से हटना पड़ा. यही नहीं 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके चुनाव लड़ने पर भी पाबंदी लगा दी. साथ ही नवाज़ शरीफ को दस साल कैद की सज़ा भी सुनाई गई.

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