ऑपरेशन समुद्र सेतु : आईएनएस जलाश्व दूसरे फेरे में 588 भारतीयों को मालदीव से लाया

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माले से लौटे बच्चे को संभालता मेडिकल स्टाफ.

भारतीय नौसेना के ऑपरेशन समुद्र सेतु के लिए तैनात किया गया जहाज़ आईएनएस जलाश्व मालदीव की राजधानी माले से अपने दूसरे फेरे में उन 588 भारतीयों को लेकर स्वदेश लौटा जो कोविड 19 संक्रमण संकट के कारण लागू किये गये लॉक डाउन में फंसे हुए थे. इनमें 6 गर्भवती समेत 70 महिलायें और 21 बच्चे हैं. आईएनएस जल अश्व ने इन सबको रविवार को कोच्चि पोर्ट ट्रस्ट के समुद्रिका क्रूज टर्मिनल पर उतारा.

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक़ आईएनएस जलाश्व ने 11:30 बजे कोच्चि पोर्ट ट्रस्ट पर लंगर डाला था. यहाँ भारतीय नौसेना, जिला प्रशासन एवं पोर्ट ट्रस्ट के कार्मिकों ने उसका स्वागत किया. बंदरगाह पर कोविड स्क्रीनिंग एवं अप्रवासन प्रक्रियाओं को युक्तिसंगत बनाने के लिए काफी इंतज़ाम किए गए थे. बन्दरगाह से बाहर आते वक्त यात्रियों को नागरिक प्रशासन के सुपुर्द कर दिया गया जिसने नागरिकों को आगे और क्वारांटाइन किए जाने के लिए संबंधित जिलों या राज्यों के लिए गाड़ियों का इंतजाम किया था.

मालदीव की राजधानी माले से 588 भारतीयों को लेकर स्वदेश लौटा आईएनएस जलाश्व.

हालांकि माले में इन यात्रियों को 15 मई को जहाज़ पर चढ़ा दिया गया था लेकिन तय किये गए वक्त पर इसकी वहां से रवानगी न हो सकी. इसकी वजह थी भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ मौसम का खराब होना. आईएनएस जलाश्व अगले दिन यानि 16 मई को माले से वापसी की अपनी यात्रा शुरू कर पाया था. इससे पहले वाली यात्रा में यही जहाज़ 699 यात्रियों को माले से लाया था.

उल्लेखनीय है कि मालदीव में बड़ी तादाद ऐसे भारतीयों की है जो वहां पर्यटन के कारोबार में हैं. इनमें से काफी लोग परिवारों को भी साथ ले गए हैं. लॉक डाउन के कारण पर्यटन उद्योग के बंद हो जाने से इनका काम धंधा चौपट हो गया था. कई जो इसी काम में नौकरी कर रहे थे, उनकी नौकरी छूट गई थी. इन लोगों को लाने के लिए भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन समुद्र सेतु के तहत अपने समुद्री जहाज़ आईएनएस जलाश्व के साथ ही मगर को भी तैनात किया.

माले से स्वदेश लौटे लोगों की जांच की गई.

ऐसा है आईएनएस जलाश्व :

आईएनएस जलाश्व (दरियाई घोड़ा) भारतीय नौसेना का, अमेरिका से खरीदा गया एकमात्र परिवहन जहाज़ है और ये नौसेना की पूर्वी कमांड मुख्यालय विशाखापत्तनम में तैनात है. इसे 2005 में खरीदा गया था लेकिन भारतीय नौसेना में इसे 22 जून 2007 को कमीशन किया गया था. दरअसल 2004 में आई सुनामी की तबाही के बाद ऐसा समुद्री जहाज़ खरीदने का विचार आया था क्यूंकि तब भारतीय नौसेना ऐसे बहुउपयोगी जहाज़ की कमी के कारण बचाव कार्य को उतनी मजबूती से नहीं कर पाई थी जितना वो करना चाहती थी. एक हज़ार सैनिकों को ले जाने की क्षमता वाले आईएनएस जलाश्व में दो दर्जन से ज्यादा अधिकारी और 380 नाविक तैनात होते हैं. 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार वाले इस जहाज़ पर हेलिकॉप्टर की लैंडिंग और उड़ान का भी बन्दोबस्त है.

आईएनएस जलाश्व हादसा :

आईएनएस जलाश्व ही भारतीय नौसेना का वही समुद्री जहाज़ है जिसमें 12 साल पहले (1 फरवरी 2008) में हाइड्रोजन गैस रिसाव से हादसा हुआ था और आग लगी थी. इसमें 5 नौसैनिकों की मृत्यु हुई थी और तीन अन्य झुलस गये थे. लेफ्टिनेंट कमांडर श्वेत गुप्ता और लेफ्टिनेंट रुचिर प्रसाद इस हादसे में नौसेनिकों को बचाने की कोशिश में घायल हुए थे. जांबाज़ नौसैनिक अधिकारी श्वेत गुप्ता ने इलाज के दौरान कुछ ही दिन बाद प्राण त्याग दिए थे.

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