डीएसपी नागेश कुमार मिश्रा कोरोना से जंग हारे, इलाज की व्यवस्था पर उठे सवाल

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डीएसपी नागेश कुमार मिश्रा.

उत्तर प्रदेश हरदोई में तैनात पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) नागेश कुमार मिश्रा की मृत्यु को लेकर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आये लोगों के इलाज की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं. कहा जा रहा है कि वक्त पर उनकी जांच रिपोर्ट आने पर इलाज किया जाता तो शायद ये कोरोना योद्धा इतनी जल्दी इस दुनिया का रण नहीं छोड़ता. डीएसपी नागेश कुमार मिश्रा कोराना से जंग हार रविवार को चल बसे.

दो साल पहले ही तरक्की पाकर हरदोई के डीएसपी तैनात हुए नागेश कुमार मिश्रा इलाहाबाद (प्रयागराज) के रहने वाले थे. 25 जुलाई को ही उनका 58 वां जन्मदिवस मनाया जाना था. दरअसल हरदोई में ड्यूटी के दौरान ही जब नागेश मिश्रा को कोरोना के हल्के लक्षण दिखाई दिए तो उन्होंने अपनी कोविड 19 जांच करवाई थी. बताया जा रहा है कि लिए गये उनके जांच नमूनों की पांच दिन तक रिपोर्ट ही नहीं आई. इसके बाद उन्होंने डीजीपी मुख्यालय में अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) के यहां स्टाफ अफसर त्रिगुण बिशेन से सम्पर्क किया जो पहले हरदोई में तैनात रहे हैं.

हालात जानने पर त्रिगुण बिशेन ने वहां के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर नागेश मिश्रा के नमूनों की रिपोर्ट तलाश कराई, लेकिन नमूने ही नहीं मिले. इस बीच दिन ब दिन डीएसपी नागेश मिश्रा की तबियत बिगड़ती ही जा रही थी. वजह ये थी कि बिना कोरोना वायरस जांच रिपोर्ट के आये कोई भी डॉक्टर असरदार तरीके से उनका इलाज करने को तैयार ही नहीं था. आखिरकार डीजीपी मुख्यालय के अधिकारी के दखल देने के बाद पांच दिन बाद कोरोना जांच के लिए उनका फिर से सैंपल लिया गया. जैसा कि संदेह था जांच में उनकी रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव आई लेकिन तब तक उनकी तबियत और ज्यादा बिगड़ चुकी थी.

हालत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ में पीजीआई में भर्ती कराया गया लेकिन शायद तब तक कोराना का संक्रमण उनके शरीर में काफी ज्यादा फैल चुका था. लखनऊ में उन्होंने रविवार की सुबह दम तोड़ दिया. 25 जुलाई 1962 को पैदा हुए डीएसपी नागेश मिश्रा 1 जनवरी को तरक्की देकर डीएसपी बनाये गये थे और उन्हें वर्तमान पदभार 14 अप्रैल 2018 को सौंपा गया था.

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