ड्यूटी से लौटते हुए इस एएसआई ने कमाल किया, मिला असाधारण कार्य पुरस्कार

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बहादुर सहायक सब इंस्पेक्टर (ASI ) रविन्द्र

दिल्ली के जोहरीपुर इलाके में रहने वाले दिल्ली पुलिस के सहायक सब इंस्पेक्टर (ASI) रविन्द्र चाहते तो जोखिम भरे इस पचड़े में पड़ने से बचकर चुपचाप निकल सकते थे क्यूंकि उनकी आज की ड्यूटी खत्म हो गई थी और वह घर लौट रहे थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. उन्होंने एक शख्स को गोली मारकर फरार हो रहे खतरनाक लुटेरों को रंगे हाथ पकड़ने की घटना में ये साहस तब दिखाया जब वह वर्दी में भी नहीं थे. उन्होंने हिम्मत और बहादुरी ही नहीं, सूझबूझ का भी परिचय दिया.

दिल्ली पुलिस में 30 साल पहले बतौर सिपाही भर्ती हुए एएसआई रविन्द्र ने हिम्मत और बहादुरी ही नहीं, सूझबूझ का भी परिचय दिया और इस कमाल के असाधारण काम की वजह से ही पुलिस प्रमुख ने असाधारण कार्य पुरस्कार दिया है.

ये घटना रात तकरीबन 8.30 बजे की है. उत्तर पूर्व दिल्ली के यमुना विहार में मयूर रेस्टोरेंट के सामने से गुजर रहे 35 वर्षीय सौरभ गुप्ता से दो लुटेरों ने मोबाइल फोन लूटने की जब कोशिश की तो सौरभ लुटेरों से भिड़ गये. लुटेरों ने पिस्तौल से गोली चला दी जो सौरभ के पेट में लगी. लेकिन हिम्मत और ताकत का परिचय देते हुए सौरभ ने एक लुटेरे को दबोचे रखा. तीन लोगों के बीच झगड़ा जैसा कुछ होते देख एएसआई ने अपनी मोटरसाइकिल रोक ली. सौरभ ने उन्हें बताया कि दोनों बदमाश उसका फोन छीन रहे हैं. एएसआई रविन्द्र ने ये जानने के बाद सड़क किनारे मोटर साइकिल खड़ी की लेकिन तब तक दो गोली चल चुकी थीं और पिस्तौल से लैस एक लुटेरा भाग रहा था. अभी वह लुटेरा 50 – 60 मीटर ही भागा होगा कि रविन्द्र ने फुर्ती और हिम्मत दिखाई. पीछा करके उन्होंने लुटेरे को दबोच लिया जिसका नाम इमरान उर्फ़ मॉडल है जो मुस्तफाबाद का रहने वाला है. रविन्द्र ने इमरान के कब्ज़े से पिस्तौल ले ली जिसमें तीन गोलियां लोडेड थीं जबकि वारदात वाली जगह से चली गोलियों के दो खोल भी मिले.

सौरभ गुप्ता भी साहसी :

जिस वक्त रविन्द्र उस लुटेरे को काबू कर रहे थे तब तक कुछ लोग घायल सौरभ गुप्ता की मदद के लिए आगे बढ़े और उन्होंने पकड़े हुए लुटेरे की धुनाई शुरू कर दी. पूछताछ में पता चला कि उसका नाम भी इमरान है और वह भी पास के ही नेहरू विहार का रहने वाला है. लुटेरों का शिकार हुए सौरभ शेयर मार्केट में कंसलटेंट का काम करते हैं. मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया. लोग सौरभ की हिम्मत की भी तारीफ कर रहे है.

एएसआई रविन्द्र की सूझबूझ :

एएसआई रविन्द्र 1991 में दिल्ली पुलिस में सिपाही के तौर पर भर्ती हुए थे और इन दिनों मध्य ज़िला पुलिस उपायुक्त कार्यालय में शिकायत निवारण शाखा में तैनात हैं. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पकड़े गये लुटेरों की पहचान और उनके बारे में मिली जानकारी को भीड़ से छिपाकर भी एएसआई रविन्द्र ने सूझबूझ का परिचय दिया क्यूंकि जहां ये वारदात हुई उसके आसपास का इलाका ही हाल ही साम्प्रदायिक नफरत, खून खराबे और आगज़नी का शिकार हुआ था. नये नागरिकता कानून के पक्ष-विरोध के नाम पर पिछले महीने इन इलाकों में की गई हिंसा की तपिश अभी बरकरार है. ऐसे में लुटेरों की शिनाख्त सार्वजनिक होने पर ये मामला भी नये सिरे से नफरत और हिंसा की शुरुआत कर सकता था.

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