
दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर कई सवाल उठाती यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक राजधानी के सबसे पॉश कहलाने वाले इलाकों में से एक वसंत एनक्लेव की है. पूरे घटनाक्रम ने हिंसक होते जा रहे समाज के उस उस कुरूप चेहरे को एक बार फिर उजागर किया है जहां सिर्फ पैसे और उसके दम पर पूरे सिस्टम को अपने पक्ष में कर लेने की ताकत रखता है . बात तब की है जब ब्रिगेडियर अरोड़ा और उनका बेटा तेजस डिनर के बाद अपने घर के पास टहल रहे थे. ब्रिगेडियर अरोड़ा वर्तमान में गुजरात में तैनात हैं . उनका बेटा तेजस आईआईटी ग्रेजुएट है . टहलते वक्त उनकी नज़र अपने घर के पास पार्क एक मर्सिडीज़ एसयूवी ( DL3CCY 0789) पर पड़ी जिसमें ड्राइविंग सीट और उसके बगल वाली सीट पर दो लोग बैठे शराब पी रहे थे. इतनी रात को रिहायशी कालोनी में सड़क पर कानून का उल्लंघन करते हुए हुए सार्वजनिक रूप शराब का नशा करने पर उन्होंने जब ऐतराज़ किया तो दोनों लोग (49 वर्षीय सतेंद्र उर्फ सोनू और 56 वर्षीय संजय शर्मा ) अपनी गलती मानने की बजाय बाप बेटे से उलझ गए . उन्होंने खुद को उसी इलाके में रहने वाला बताया.
इस बीच तेजस अपने घर पहुंचा ताकि वहां से अपना मोबाइल फोन लेकर पुलिस को सूचित करके मदद के लिए बुला सके . इसी बीच तेजस की मां भी तेजस के साथ घर से बाहर आई . थोड़ी देर में पहुंचे पुलिसकर्मी जब उनसे बात कर रहे थे तभी कार में सवार लोगोंन में से एक ने अपने फोन से पुलिसकर्मी की किसी से बात करवा दी. ब्रिगेडियर की पत्नी निताशा का आरोप है कि उसके बात पुलिस का रुख एकदम बदल गया. ब्रिगेडियर और उनके परिवार के साथ बदतमीजी कर रहे मर्सिडीज़ सवारों ने फोन करके अपने कुछ साथी बुलावा लिए जिन्होंने ब्रिगेडियर अरोड़ा और उनके बेटे से मारपीट की . जब निताशा ने मौजूद पुलिसकर्मी से गुंडई – मारपीट कर रहे लोगों को रोकने व कार्रवाई करने के लिए कहा तो पुलिसकर्मी ने यह कहते हुए असमर्थता जता दी कि इतने लोगों के खिलाफ वो कुछ नहीं कर सकता. उसने घटनास्थल पर मदद के लिए और टीम बुलाने की बात बताई जबकि वो टीम आई ही नहीं. मारपीट करके लोग फरार भी हो गए .
यही नहीं इस घटना के बाद घायल पिता पुत्र ब्रिगेडियर अरोड़ा व तेजस जब थाने में पहुंचे तो पुलिस ने न तो एफ आई आर दर्ज की और न ही उनके उपचार का बन्दोबस्त कराया . यहां तक कि इस परिवार को ऐसी हालत में आधी रात को ईलाज के लिए खुद अपनी कार चलाकर सेना के अस्पताल जाना पड़ा . सुबह चार बजे के करीब ब्रिगेडियर और उनका परिवार वापस थाने लौटा . पुलिस ने तब भी हमलावरों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने में रुचि नहीं दिखाई .
मंगलवार पुलिस ने दो अभियुक्तों की गिरफ्तारी का ऐलान किया . पुलिस के एक बयान के मुताबिक़ , सतेंद्र ‘चौधरी एविएशन प्राइवेट लिमिटेड’ के डायरेक्टर हैं. यह कंपनी चार्टर और कार्गो उड़ान सेवाएं देती है और विमानों तथा उनके पुर्जों की खरीद-बिक्री का काम करती है. वहीं, शर्मा मेहरम नगर में ‘पंडित जी ढाबा’ नाम से एक स्थानीय भोजनालय चलाता है . बाकी हमलावरों के बारे में पुलिस ने खुलासा नहीं किया. हां इतना जरूर कहा कि उस मर्सिडीज कार को भी जब्त कर लिया है, जिसमें अभियुक्त घटना के समय मौजूद थे.
इससे पहले दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने घटना पर चिंता व्यक्त की और हमले का शिकार हुए ब्रिगेडियर अरोड़ा से बात भी की. उन्होंने अपने एक ‘X’ (ट्विटर) पोस्ट में कहा था, “…मैंने पुलिस कमिश्नर और डीसीपी से भी बात की और उन्हें निर्देश दिया कि वे एक गहन और त्वरित जांच सुनिश्चित करें, ताकि दोषियों के खिलाफ तत्काल और उचित कार्रवाई की जा सके.”
मामले का संज्ञान लेते हुए, दिल्ली पुलिस ने सोमवार को भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 126(2) (गलत तरीके से रोकना), 351(2) (आपराधिक धमकी), 79 (किसी महिला की लज्जा का अपमान करने या उसकी निजता का उल्लंघन करने के इरादे से कोई शब्द, हावभाव, कृत्य या वस्तु का प्रवेश), 191(2) (दंगा करना) और 190 (गैर-कानूनी जमावड़ा) के तहत एफ आई आर दर्ज की. प्रारंभिक जांच के दौरान, जांच अधिकारी की ओर से एक चूक पाई गई, जिसके बाद उसे जिला लाइनों में भेज दिया गया.
घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें कार के अंदर मौजूद दो पुरुष शराब की बोतलें पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं. यह वीडियो किसी के भी मन में आक्रोश पैदा कर सकते हैं . भारतीय सेना ने इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है और अपनी मिलिट्री पुलिस को अधिकारी की सहायता करने का निर्देश दिया है. सेना के अधिकारियों ने दिल्ली पुलिस से भी संपर्क किया है और मामले में त्वरित जांच की मांग की है।
सेना के एक पूर्व अधिकारी, कर्नल दानवीर सिंह ने एक्स (X) पर अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने ब्रिगेडियर अरोड़ा से बात की है. अपनी पोस्ट में, कर्नल सिंह ने आरोप लगाया कि “मर्सिडीज़ बेंज वाले गुंडे” सरेआम शराब पी रहे थे. जब उन्हें टोका गया, तो “समाज-विरोधी” “कार-ओ-बार करने वाले उस जोड़े” ने अपने सात-आठ साथियों को बुला लिया, जो पास में ही थे, और उन्होंने ब्रिगेडियर और उनके बेटे पर हमला कर दिया. कर्नल सिंह ने बताया कि ब्रिगेडियर, जिन्होंने कश्मीर के अंदरूनी इलाकों और दूसरी जगहों पर कई ऑपरेशन्स में हिस्सा लिया था, और उनके बेटे को इस झड़प में चोटें आईं.
हैरानी की बात है कि समय पर कार्रवाई करने में असमर्थ रही पुलिस अपनी गलती स्वीकारने और शर्मसार होने की बजाय यह दावा करके पीठ थपथपा रही है कि उसने केस दर्ज होने बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया.












