रैंप से रणभूमि तक : आखिर क्यों ग्लेमर की दुनिया छोड़ सैनिक बनी ब्यूटी क्वीन कशिश मेथवानी ?

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ग्लेमर छोड़कर सैनिक बनीं कशिश मेथवानी
ग्लेमर छोड़कर सैनिक बनीं कशिश मेथवानी
हर कोई जीवन में बहुत कुछ करने के सपने देखता हैं लेकिन कुछ ही लोग उन्हें साकार  कर पाते हैं . कशिश मेथवानी उन्हीं गिने चुने लोगों में से एक हैं जो जैसा सपना देखती हैं वैसा ही कर पाती हैं. उस पर  ग्लेमर की  सपनीली दुनिया  और भविष्य की लग्जरी छोड़कर किसी ख़ास मकसद से एक सख्त और जोखिम से भरपूर जीवन चुनना और बड़ी बात है.  कशिश मेथवानी ने ऐसा भी  कर डाला. रैम्प पर चलने वाली कशिश रण में उतर आई . ब्यूटी क्वीन का सफर करने के बाद कशिश मेथवानी (kashish methwani) अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त शिक्षण संस्थान हार्वर्ड यूनिवर्सिटी  से पीएचडी करने तक का मौका उन्होंने छोड़ा और सेना की वर्दी धारण कर देश सेवा का रास्ता चुना .

तीन साल पहले (2023 ) में  मिस इंटरनेशनल इंडिया (miss international india) का खिताब हासिल करने वाली कशिश मेथवानी आज भारतीय थल सेना के एयर डिफेन्स रेजिमेंट ( air defence regiment ) में लेफ्टिनेंट हैं.

चकाचौंध  की दुनिया को छोड़कर यह कठिन  का रास्ता चुनने का  फैसला आसान नहीं था, लेकिन उनके अंदर देश के लिए कुछ करने की चाह ज्यादा मजबूत थी. उनकी कहानी हर उस शख्स  को प्रेरित करती है जो अपने दिल की आवाज सुनने , समझने और उस उस पर अमल करने की हिम्मत  रखता है. यह असली कहानी खासतौर पर युवाओं के लिए प्रेरणा है .

परिवार :
सिन्धी परिवार से ताल्लुक रखने वाली कशिश मेथवानी की पैदाइश  9 जनवरी 2002 को मुंबई के पास उल्हासनगर की है . उनके पिता पहले वैज्ञानिक थे और बाद में  भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (director general of quality assurance ) विभाग से जुड़े. उनकी मां आर्मी पब्लिक स्कूल में टीचर हैं. परिवार के लोग बताते हैं कशिश को बचपन से अलग-अलग चीजें सीखने और करने का शौक था.

एनसीसी एक टर्निंग प्वाइंट:  
कॉलेज के दिनों में उनका रुख राष्ट्रीय कैडेट कोर (national cadet corps) यानि एनसीसी की तरफ हुआ जहां से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया. एनसीसी कैडेट के तौर पर उन्होंने गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लिया. यह अनुभव उनके लिए खास इसलिए भी बना क्योंकि  उन्हें ऑल इंडिया बेस्ट कैडेट का पुरस्कार मिला. इसके बाद कशिश ने महसूस किया कि असली सकून और मकसद  उन्हें सेना में ही मिल सकता है. कशिश कहती हैं कि  मॉडलिंग उनका शौक था, लेकिन करियर नहीं. एनसीसी में रह कर उन्हें यह समझ आया  कि वह सेना के लिए बनी हैं. फिर भी  उनकी जिंदगी में ग्लैमर कम नहीं था.

सेना की वर्दी में सकून :
मिस इंटरनेशनल इंडिया बनने के बाद  कशिश को मॉडलिंग और एक्टिंग के कई बड़े ऑफर मिले. उस हिसाब से सामने एक शानदार करियर था जिसमें पैसा और शोहरत दोनों थे  लेकिन उन्होंने सब कुछ छोड़ने का फैसला लिया. कशिश ने सेना को चुना.

कशिश मेथवानी  पढ़ाई में भी बेहद होशियार रही हैं. उन्होंने पुणे स्थित सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी  से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया. उनका रिसर्च काम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु में हुआ. उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (harvard university ) से पीएचडी करने का मौका भी मिला था लेकिन उन्होंने यह मौका भी छोड़ दिया. वजह ..? उनका मकसद ही कुछ और था.

कशिश मेथवानी ने संयुक्त रक्षा सेवा ( combined defence service ) परीक्षा पास ही नहीं की बल्कि में ऑल इंडिया रैंक 2 भी हासिल की. यह अपने आप में बड़ी एक  उपलब्धि है. इसके बाद उन्होंने चेन्नई में  ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (officers training academy) में 11 महीने की कठिन प्रशिक्षण लिया और  6 सितंबर को वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर  शामिल हुईं. कशिश को  आर्मी एयर डिफेंस रेजिमेंट में कमीशन मिला.

बहुमुखी प्रतिभा :
कशिश ने ऑपरेशन सिंदूर (operation sindoor) में भी भूमिका निभाई. यह उनके करियर की बड़ी जिम्मेदारी थी. कशिश सिर्फ एक सैनिक अधिकारी  ही नहीं हैं. वह एक बहु प्रतिभाशाली और संवेदनशील इंसान भी  हैं.  वह भरतनाट्यम डांसर हैं और  तबला वादक भी हैं . क्विज़ और डिबेट में भी आगे रही हैं तो खेलों में भी उनकी अच्छी पकड़ है. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पिस्टल शूटिंग और बास्केटबॉल मुकाबले भी खेले. 2020 में जब कोरोना वायरस से पैदा हुई महामारी ने भारत समेत दुनियाभर के देशों अपनी चपेट में लिया तो कशिश  कोविड19 लॉकडाउन (covid 19 lockdown) के बीच बीमार  लोगों की मदद के लिए आगे आई. उन्होंने क्रिटिकल कॉज ( critical cause ) नाम से एक एनजीओ बनाया और लोगों को प्लाज्मा, रक्त और अंगदान के लिए जागरूक किया जा सके.