दुश्मन के ड्रोन के झुंड का मुकाबला करने के लिए भारत में बना पहला स्वदेशी सिस्टम

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ड्रोन को निष्प्रभावी करने के लिए बना सिस्टम लांच किया गया
ड्रोन को निष्प्रभावी करने के लिए बना सिस्टम लांच किया गया

सिम्युलेटर और ड्रोन आदि बनाने वाली भारतीय कम्पनी जेन टेक्नोलॉजी  ने ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह के मौके पर,  सोमवार को भारत का पहला पूरी तरह से इंटीग्रेटेड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पावर्ड एंटी-ड्रोन सिस्टम का अनावरण किया है . निर्माता कम्पनी का दावा है कि पूरी तरह से स्वदेश निर्मित यह पहला ऐसा सिस्टम है जो  झुंड में आने वाले ड्रोन और कम लागत वाले मानव रहित प्लेटफॉर्म से उभरते खतरों का मुकाबला करने के लिए तैयार  किया गया है. जेन टेक्नॉलोजी ने इस सिस्टम को प्रयागराज में  नार्थ टेक सिम्पोजियम 2026 (north tech symposium -2026) में लॉन्च किया है.

यह लांचिंग ऐसे समय में की गई है जब दुनिया भर की सेनाएं फर्स्ट-पर्सन-व्यू (एपीवी – fpv ) ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल और समन्वित झुंड हमलों से जूझ रही हैं, जो पारंपरिक हवाई रक्षा प्रणालियों को पंगु बना सकते हैं.

कंपनी के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म आर्किटेक्चर के भीतर “सॉफ्ट किल” और “हार्ड किल” दोनों विकल्पों को एकीकृत  करता है. यह सिस्टम एक विस्तृत फ़्रीक्वेंसी बैंड में ड्रोन संचार का पता लगा सकता है और उसे बाधित कर सकता है, साथ ही हथियारों के इंटीग्रेशन के माध्यम से काइनेटिक इंटरसेप्शन भी प्रदान कर सकता है.

इस सिस्टम के मूल में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ( ए आई ) फ्यूजन और कमांड सेंटर है, जो कई सेंसर से इनपुट को मिलाकर हवाई खतरों को वास्तविक समय में वर्गीकृत करता है, ट्रैक करता है और उन पर प्रतिक्रिया देता है. कम्पनी की तरफ से दवा किया गया है कि   यह सिस्टम 15 किमी से अधिक की दूरी  पर मौजूद  ड्रोन का पता लगा सकता है और एक साथ 100 से अधिक लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है, जिससे यह झुंड हमलों का मुकाबला करने के लिए उपयुक्त बन जाता है.

इस प्लेटफॉर्म में 20 किमी तक की डिटेक्शन रेंज वाला एक उच्च-संवेदनशीलता वाला स्वदेशी रडार भी है, जिसे कम रडार क्रॉस-सेक्शन वाले छोटे ड्रोन की पहचान शुरुआती चरण में ही करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

ड्रोन को निष्प्रभावी करने के लिए, यह सिस्टम एक स्तरीय दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) जैमिंग, GNSS व्यवधान और स्पूफिंग, और 12.7 मिमी और 7.62 मिमी बंदूकों का उपयोग करने वाले रिमोट-नियंत्रित हथियार स्टेशनों के साथ इंटीग्रेशन शामिल है.  हार्ड-किल ऑपरेशंस के लिए इसे हवाई रक्षा बंदूकों और लोइटरिंग इंटरसेप्टर्स के साथ भी जोड़ा जा सकता है.

जेन टेक्नोलॉजी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक अटलूड़ी ने कहा कि हाल के संघर्षों ने युद्ध की बदलती प्रकृति को रेखांकित किया है. उन्होंने कहा, “ड्रोन युद्धक्षेत्र को फिर से परिभाषित कर रहा है, और असली फायदा उन्हें मिलेगा जो इन खतरों को प्रभावी ढंग से बेअसर कर सकते हैं.” उन्होंने कहा कि इस सिस्टम को सरकार के स्वदेशीकरण अभियान के तहत पूर्ण बौद्धिक संपदा स्वामित्व के साथ विकसित किया गया है.

यह  प्लेटफॉर्म कई परिचालन परिदृश्यों में तैनाती के लिए डिज़ाइन किया गया है.  इसका वाहन-माउंटेड संस्करण गतिशीलता और काफिले की सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि इसका मानव-पोर्टेबल संस्करण उन पैदल सेना इकाइयों के लिए  है जो उग्रवाद-रोधी या अग्रिम क्षेत्रों में काम कर रही हैं.  यह एक निश्चित कॉन्फ़िगरेशन को, चौबीसों घंटे निगरानी के माध्यम से, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है.