भारतीय पुलिस सेवा के 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी अजय पाल शर्मा एक बार फिर से विवाद में घिर गए हैं . अजयपाल उन 95 अधिकारियों में शामिल हैं जिनको केन्द्रीय चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल राज्य के विधानसभा चुनाव के लिए अपना पर्यवेक्षक ( observer ) बनाकर भेजा. तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी के मुख्यमंत्रित्व वाली राज्य सरकार की तरफ से अजयपाल की इस नियुक्ति को रद्द करने की याचिका को कलकत्ता हाई कोर्ट ने ख़ारिज कर डाला है . इसी बीच अजयपाल शर्मा को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी कल रात दायर की गई. वहीं टीएमसी ( tmc ) के समर्थकों ने अजयपाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए. टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान के घर पहुंचे अजयपाल शर्मा का वीडियो वायरल होने के बाद यह बखेड़ा खड़ा हुआ है .
वायरल वीडियो में अजयपाल शर्मा सादा वर्दी में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल ( सीआरपीएफ ) जवानों के दल के साथ जहांगीर खान के घर पहुंचे दिखाई दे रहे हैं जिसमें वे सबके सामने जहांगीर खान का नाम लेते हुए चेतावनी दे रहे हैं कि अगर किसी ने वोटरों को धमकाने या वोटिंग प्रभावित करने की कोशिश की तो उसकी खैर नहीं. जहांगीर खान टीएमसी प्रत्याशी है और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का करीबी भी है . अभिषेक टीएमसी की युवा इकाई के अध्यक्ष होने के साथ साथ तीन बार के चुने हुए लोकसभा के सदस्य भी हैं. टीएमसी के नेताओं को अजयपाल शर्मा का यह तरीका आपत्तिजनक और धमकाने वाला लगा . उनका सीधा आरोप है कि अजयपाल शर्मा केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में एजेंट की तरह काम कर रहे हैं.
इसी को विषय बनाकर पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से कलकत्ता हाई कोर्ट ( calcutta high court ) में याचिका दायर की गई. इसमें कहा गया कि चुनाव आयोग की तरफ से बतौर पुलिस आब्जर्वर नियुक्त आईपीएस अधिकारी आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं. याचिका पर सुनवाई कर रहे हाई कोर्ट के जस्टिस कृष्णा राव ( justice krishna rao ) ने कोई भी आदेश देने से साफ साफ़ इनकार करते हुए कहा कि वे चुनाव ड्यूटी पर तैनात किए गए किसी भी अधिकारी के खिलाफ 29 अप्रैल ( पश्चिम बंगाल चुनाव में अंतिम मतदान की तिथि) से पहले कोई आदेश नहीं देंगे. अदालत ने उनको केन्द्रीय चुनाव आयोग के समक्ष जाने को कहा .
उधर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ( mahua moitra ) की इस मामले में सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट के बाद मामला तूल पकड़ने लगा. संसद महुआ मोइत्रा ने एक्स हैंडल (पूर्व में ट्विटर) पर डाली पोस्ट में अजयपाल शर्मा पर तंज कसते हुए उनको फेयर एंड लवली बबुआ कहकर संबोधित किया. इसमें उन्होंने दो वीडियो क्लिप भी अटैच किए हैं जिसमें अजयपाल जैसे दिखाई देने वाला शख्स एक कमरे में नाच रही प्रोफेशनल डांसर के बेहद पास खड़ा है. एक वीडियो में वह शख्स भी नाचने जैसी भंगिमा में ताली बजा रहा है. कमरे रंगीन रोशनी है इसलिए शख्स का चेहरा एकदम साफ़ नहीं दिखाई दे रहा . लेकिन सांसद महुआ मोइत्रा ने अजयपाल शर्मा को संबोधित व उनको @DripsAjaypal पर टैग करते हुए कहा है ,” फेयर एंड लवली बबुआ , तुम्हे मजे करते देखकर अच्छा लग रहा है”.
अजयपाल शर्मा को पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना में चुनाव आयोग ने आब्जर्वर के तौर पर नियुक्त किया है. वैसे पुलिस अधिकारी के तौर पर तैनाती की बात की जाए तो अजयपाल शर्मा वर्तमान में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त हैं. उनके नेतृत्व वाली में पुलिस टीम और अपराधियों के बीच मुठभेड़ों की लम्बी फेहरिस्त है. इन घटनाओं में कई अपराधी मारे गए. कुछ को लेकर विवाद भी हुए. उन पर फर्जी मुठभेड़ों का आरोप लगा. स्थानीय मीडिया ने अजयपाल शर्मा को ‘ सिंघम ‘ का नाम भी दे डाला. वहीं समाजवादी पार्टी के नेता और सांसद अखिलेश यादव ने आईपीएस अजयपाल शर्मा को भारतीय जनता पार्टी ( bhartiya janta party ) का टेस्टेड एजेंट कह डाला.
पुराने विवाद :
पंजाब के लुधियाना में पैदा हुए अजय पाल शर्मा पुलिस अधिकारी बनने से पहले दंत चिकित्सक थे. एक महिला के साथ भी उनका विवाद हुआ था जिसने खुद को उनकी पत्नी होने का दावा किया था. हालांकि अजयपाल शर्मा ने उस दावे को झुठला दिया था. रिश्वत लेकर तैनाती के एक मामले में भी अजयपाल शर्मा का नाम आया था.
जनहित याचिका :
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (public interest litigation) दायर की गई है, जिसमें भारत निर्वाचन आयोग के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश कैडर के अजय पाल शर्मा को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह अधिकारी “बहुत ज़्यादा पक्षपाती” है और राजनीतिक उम्मीदवारों को धमका रहा था. ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 20B का हवाला देते हुए, याचिकाकर्ता ने बताया है कि एक पर्यवेक्षक का काम “चुनावों के संचालन पर नज़र रखना” होता है, और उसे एक “तटस्थ संस्थागत सुरक्षा कवच” के तौर पर देखा जाता है, जिसकी मौजूदगी का मकसद चुनावों के संचालन में जनता का भरोसा मज़बूत करना होता है।. याचिकाकर्ता का तर्क है कि अजय पाल शर्मा का आचरण “पर्यवेक्षक के दायित्वों का घोर उल्लंघन है. ”
याचिका कल रात आदित्य दास नाम के एक व्यक्ति की तरफ से दायर की गई थी. इसमें न्यायालय से उचित निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि इस नियुक्ति को रद्द किया जा सके और यह सुनिश्चित हो सके कि चुनाव पर्यवेक्षक अपने कर्तव्यों के निर्वहन में स्वतंत्र और निष्पक्ष बने रहें.













