पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे की नई किताब ‘ द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड : अनअर्थिंग मिलिटरी मिथ्स एंड मिस्ट्रीज ‘

8
पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ( फाइल फोटो )
पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ( फाइल फोटो )
भारत के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल ( सेवानिवृत्त ) मनोज मुकुंद नरवणे   की नई किताब ‘ द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड : अनअर्थिंग मिलिटरी मिथ्स एंड मिस्ट्रीज ‘ ( the curious and the classified: unearthing military myths and mysteries )  मार्केट में आ गई है . सेना के बारे में  खोजबीन करके लिखे जाने वाले ऐसे कई दिलचस्प  पहलूओं से यह किताब रूबरू कराती है जिसके बारे में बेहद कम ही लोग जानते हैं . जनरल   नरवणे  को इस किताब की विषय वस्तु का  विचार  दो साल पहले एक दोस्त के घर पर पढ़ी  उस किताब ‘ अ वंडरलैंड ऑफ़ वर्ड्स ( A Wonderland of Words ) के एक अध्याय से आया है जो   कांग्रेस के सांसद और पूर्व नौकरशाह शशि थरूर ने  लिखी थी .

उम्मीद तो की जा रही थी कि  जनरल मनोज नरवणे  की इससे पहले लिखी गई  किताब ‘ फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी ‘ छपकर आ जाएगी लेकिन वो किताब अभी तक सरकार की मंज़ूरी की बाट जोह रही है . लम्बे अरसे से प्रकाशन की मंजूरी के  लंबित यह  किताब  बिना मार्केट में आए ही  भारतीय राजनीति में हंगामे का कारण बनी. ‘ द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड : अनअर्थिंग मिलिटरी मिथ्स एंड मिस्ट्रीज ‘ को रूपा प्रकाशन ने छापा है .

किताब में, जनरल नरवणे कई किस्से साझा करते हैं – जैसे कि लोकप्रिय नारा ‘चक दे फट्टे’ की जड़ें असल में 17वीं और 18वीं सदी की सिख सेना में कैसे हैं, या फिर थिरकाने वाले गीत ‘बदलूराम का बदन’ के पीछे की प्रेरणा क्या है. बदलूराम 1944 में कोहिमा की निर्णायक लड़ाई में लड़ते हुए शहीद हो गए थे.