मेहर बाबा प्रतियोगिता 3 के लिए रजिस्ट्रेशन 27 अप्रैल से शुरू

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ड्रोन
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भारतीय वायु सेना ने मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 ( mehar baba competition 3 )  के तीसरे संस्करण के लिए पंजीकरण शुरू कर दिया है जिसका विषय ‘ ड्रोन आधारित निगरानी रडारों के लिए सहयोग’ है .  भारतीय वायुसेना की मेहर बाबा प्रतियोगिता स्वदेशी ड्रोन और स्वायत्त तकनीक को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख पहल है.

प्रतियोगिता का उद्देश्य उन्नत ड्रोन और रडार प्रौद्योगिकियों में नवाचार प्रोत्साहित करना है. मेधावी प्रतिभागियों को भारतीय वायु सेना की तरफ से विकास राशि दी जाएगी और शीर्ष तीन विजेताओं को पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा.  एमबीसी-3 के लिए पंजीकरण 27 अप्रैल 2026 से चालू हो रहा है.

भारत के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ( sanjay seth ) ने एयरो इंडिया 2025 के दौरान इस प्रतियोगिता का ऐलान किया था . एमबीसी-3 का उद्देश्य मानव रहित हवाई प्रणालियों के सहयोगी समूह के लिए एक अवधारणा प्रमाण विकसित करना है, जो हवाई रडार के रूप में कार्य करे और प्रतिस्पर्धी वातावरण में हवाई लक्ष्यों का पता लगाने, उनकी निगरानी और जानकारी देने में सक्षम हो, साथ ही एक केंद्रीकृत निगरानी स्टेशन पर उनकी सटीक स्थिति बताए .

भारतीय वायु सेना ने भारतीय उद्योगों, स्टार्टअप्स, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान प्रतिष्ठानों को इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने और एयरोस्पेस नवाचार का आगामी हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है. इच्छुक प्रतिभागी प्रतियोगिता से संबंधित पूरी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट indianairforce.nic.in पर उपलब्ध ‘विजन डॉक्यूमेंट’ से ले सकते हैं .

रक्षा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक़ इस प्रतियोगिता के इस अग्रणी मॉडल ने सफलतापूर्वक एक सुदृढ़ पारितंत्र विकसित किया है और मानवरहित प्रणालियों के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये के ऑर्डर प्राप्त किए हैं. मेहर बाबा प्रतियोगिता के पहले दो संस्करण क्रमशः ‘मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों के  लिए स्‍वार्म ड्रोन’ और ‘विमान की परिचालन सतहों पर स्वार्म ड्रोन आधारित फॉरेन ऑब्जेक्ट डेब्रिस डिटेक्शन को विकसित करना था. यह तकनीक न केवल हवाई जहाजों को इंजन के नुकसान से बचाती है, बल्कि परिचालन क्षमता भी बढ़ती है. इन प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय वायु सेना को उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षा जगत से काफी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली.

मुकाबले का मकसद :
विज्ञप्ति में कहा गया कि मेहर बाबा प्रतियोगिता ने रक्षा संबंधी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर काम करने हेतु साझा मंच प्रदान कर भारतीय उद्योग, शिक्षा जगत और उपयोगकर्ताओं के बीच अंतर पाटने में अग्रणी भूमिका निभाई है.

मेहर बाबा प्रतियोगिता का मकसद  विशिष्ट विमानन प्रौद्योगिकी के स्वदेशी विकास को प्रोत्साहित करना है. वर्ष 2018 में शुरू  किए जाने के बाद से इसमें उद्योग और शिक्षा जगत की जबरदस्त भागीदारी हुई है. इस प्रतियोगिता ने शिक्षा जगत, स्टार्टअप और उद्योग को वास्तविक विमानन चुनौतियों से निपटने के लिए नए स्वदेशी समाधान विकसित करने को प्रेरित किया है.

कौन थे मेहर बाबा :
एमबीसी मुकाबला  महावीर चक्र से सुशोभित वायु सेना के  एयर कमोडोर मेहर सिंह के सम्मान में आयोजित किया जाता है जिन्हें प्यार से मेहर बाबा के नाम से जाना जाता था. उनका जन्म 1915 में लायलपुर जिले में हुआ था और उन्होंने 1934 में रॉयल एयर फोर्स कॉलेज, क्रैनवेल में दाखिला लिया था. कुशल विमान संचालन के कारण मेहर बाबा का साथी वायुसैनिकों के बीच बड़ा सम्‍मान था. प्रभावी नेतृत्व और व्यक्तिगत वीरता के लिए 29 वर्ष की आयु में, उन्हें विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया. उनकी अनेक उपलब्धियों में 1945 में उनके नेतृत्व में डकोटा विमान में भारतीय सेना की पहली टुकड़ी श्रीनगर ले जाने का मिशन सबसे यादगार है. उन्हें दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पट्टी लेह पर उतरने वाले पहले व्यक्ति होने का गौरव भी प्राप्त है. मेहर बाबा महावीर चक्र से सम्मानित होने वाले भारतीय वायु सेना के पहले कर्मी थे.