कचरा बीनने वाले पूर्व डीआईजी इंदरजीत सिद्धू को पद्मश्री देना शानदार लेकिन सिस्टम के मुंह पर तमाचा

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पंजाब पुलिस के सेवानिवृत डीआईजी इंदरजीत सिंह सिद्धू
पंजाब पुलिस के सेवानिवृत डीआईजी इंदरजीत सिंह सिद्धू
चंडीगढ़ के रहने वाले भारतीय पुलिस सेवा के पंजाब कैडर के  सेवानिवृत्त अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू (inderjit singh sidhu) को समाज सेवा के लिए प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना गया है. लेकिन उनको जिस काम के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है वह काम न तो पुलिस की बहादुरी से जुडा है और न  ही न्याय तंत्र के किसी पहलू से , न ही यह कोई अनूठा या बहुत बड़ा  काम है . हां , जज्बात , प्रेरणा  और सामाजिक सरोकार के प्रति सोच व ज़िम्मेदारी को देखें तो वाकई यह बड़ा काम है . खासतौर पर तब जब 90 साल की उम्र तक  पहुंचने पर भी इसे कोई शख्स जारी रखे हुए है .

दूसरी तरफ यह घटनाक्रम  उस सिस्टम के चेहरे पर तमाचा भी है जो चंडीगढ़  शहर को सिटी ब्यूटीफुल (city beautiful) कहने का दम  भरता है.  आज़ाद भारत में बसाया का सबसे पहला नियोजित आधुनिक एक ऐसा शहर जो एक केन्द्रशासित क्षेत्र होने के साथ साथ दो प्रमुख राज्यों पंजाब व हरियाणा की राजधानी भी है. वो शहर जिसमें नगर निगम का भारी भरकम बजट है लेकिन वहां की पार्कों और सड़कों पर फैले कचरे को संभालने का काम एक बुजुर्ग को करना पड़ रहा है .

जी हां , जिस समाज सेवा के लिए पंजाब पुलिस के रिटायर्ड उप महानिरीक्षक (deputy inspector general) इंदर जीत सिंह सिद्धू को चुना गया है वह सेवा का कर्म आधुनिक समाज के बिखेरे कचरे को बीनकर सही स्थान पर पहुंचाने  का है . यह काम उनको इसलिए करना पड़ा क्यूंकि चंड़ीगढ़ का शासन और स्थानीय निकाय सही तरीके से नहीं कर रहा. खैर , सिद्धू को मिले पद्मश्री ने एक बार फिर भारतीय शहरों में बढ़ते कचरे की तरफ जहां  ध्यान खींचा है वहीं उस समाज को भी झकझोड़ने का काम किया है जिसके स्वभाव में गंदगी बिखेरना और उसका अपराधबोध भी न होना आदत बन  चुका है.

पूर्व आईपीएस इंदरजीत सिंह सिद्धू  गणतंत्र दिवस 2026  के मौके पर घोषित 113 पद्म श्री पुरस्कार पाने वालों में से एक हैं और देश भर से ‘अनसंग हीरोज’ ( unsung heroes) कैटेगरी में चुने गए 45 लोगों में से एक हैं.

इंदर जीत सिंह सिद्धू पंजाब पुलिस सेवा में 1964 में आए थे . इसके बाद आईपीएस के तौर पर उनका चयन हुआ और उनको पंजाब कैडर मिला.32 साल  पुलिस महकमे में सेवा के बाद श्री सिद्धू  1996 में पंजाब पुलिस से डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ( डीआईजी ) के ओहदे  से रिटायर हुए थे.  मूल रूप से वे पंजाब के संगरूर जिले के निवासी हैं लेकिन अब बरसों से चंड़ीगढ़ में रह रहे हैं . यहां सेक्टर 49 की आईएएस आईपीएस सोसायटी में उनका निवास है . पिछले कई सालों से, यह पूर्व पुलिस अधिकारी हर सुबह तड़के अपने घर से निकलकर अपने सेक्टर में पड़ोस की सड़कों और सार्वजनिक जगहों की सफाई करते हैं, अक्सर अकेले ही कचरा इकट्ठा करते हैं और उसे सही तरीके से ठिकाने लगाने के लिए ठेले या साइकिल रिक्शा  में ले जाते हैं – बिना किसी सरकारी फंडिंग, पब्लिसिटी या इनाम की उम्मीद के.

पिछले साल उनके निस्वार्थ प्रयासों ने तब सबका ध्यान खींचा जब सड़कों पर झाड़ू लगाते और कचरे से भरी गाड़ी खींचते हुए उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. उनको इस काम के लिए  चंडीगढ़ की गिरती हुई सफाई रैंकिंग को लेकर चिंता ने प्रेरित किया . यह साबित करते हुए कि सार्थक बदलाव व्यक्तिगत जिम्मेदारी से शुरू हो सकता है, इंदरजीत सिद्धू ने अधिकारियों से शिकायत करने के बजाय,  काम करने का फैसला किया.

2025 में जब उद्योगपति आनंद महिंद्रा ( anand mahindra) ने उनका सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया, तो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, उन्होंने सिद्धू को एक “शांत योद्धा” कहा जिसका “मकसद कभी खत्म नहीं होता”.  अब, पद्म श्री पुरस्कार विजेताओं में से 45 गुमनाम नायकों में से एक के रूप में, सिद्धू की यात्रा स्वच्छ भारत की सच्ची भावना का एक शक्तिशाली प्रतीक है.

चंड़ीगढ़ के निवासियों का कहना है कि सिद्धू ने सफाई अभियान तब शुरू किया जब उन्होंने बार-बार नगर निगम अधिकारियों के सामने कचरा जमा होने का मुद्दा उठाया, लेकिन कोई स्थायी नतीजा नहीं निकला. आगे शिकायत करने के बजाय, उन्होंने कार्रवाई करने का फैसला किया, और जो एक अकेले प्रयास के रूप में शुरू हुआ था, वह उनके परिवार, पड़ोसियों और कई अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया. हालांकि कुछ लोगों ने शुरू में उनके काम को अजीब समझा, लेकिन उनकी लगन ने धीरे-धीरे लोगों की सोच बदल दी, और अब कई स्थानीय लोग उनके मिशन में शामिल हो रहे हैं और उनका समर्थन कर रहे हैं.

इतनी तारीफ और सम्मान मिलने के बावजूद, सिद्धू ने लगातार अपनी भूमिका को कम करके बताया है. कहते हैं कि वह बस अपने आसपास को साफ रखने में विश्वास करते हैं और ऐसा करने में उन्हें व्यक्तिगत संतुष्टि मिलती है.