नागपुर के इस रिटायर्ड शख्स ने सेना के कल्याण कोष में दान की जीवन भर की जोड़ी कमाई

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श्रीकांत सहस्त्रबुद्धे ने नागपुर में उत्तर महाराष्ट्र और गुजरात सब एरिया के जीओसी , मेजर जनरल नवतेज एस. सोहल को 25.51 लाख रुपये के दान का चेक सौंपा.
श्रीकांत सहस्त्रबुद्धे ने नागपुर में उत्तर महाराष्ट्र और गुजरात सब एरिया के जीओसी , मेजर जनरल नवतेज एस. सोहल को 25.51 लाख रुपये के दान का चेक सौंपा.
सत्तर वर्षीय एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी श्रीकांत सहस्रबुद्धे ने कुछ ऐसा प्रेरणादायक काम  कर दिया जिसका ज़िक्र सेना से जुड़े लोगों और संस्थानों में हो रहा है . उन्होंने एक सपने को पूरा करने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई से जोड़कर रखी धनराशि सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए बने ‘ सेना कल्याण कोष ‘ में दान कर दी. यह राशि 25 लाख 51 हज़ार रूपये थी जो उन्होंने एक चेक के तौर पर सेना के अधिकारी को सौंपी.

श्रीकांत सहस्रबुद्धे पंजाब नेशनल बैंक में कार्यरत थे. उनकी पत्नी भी बैंक कर्मचारी थीं.  दोनों ने संग – संग दुनिया घूमने का सपना संजोया था . इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई से 25.51 लाख रुपये जोड़े थे. लेकिन पत्नी की मृत्यु हो जाने पर उनका सपना भी टूट गया . ऐसे में जमा की राशि का सदुपयोग करने का उन्हें सबसा अच्छा तरीका इसे ‘सेना केंद्रीय कल्याण कोष’ में दान करना  लगा. यह धन उनके भविष्य निधि खाते में था .

पत्नी की मृत्यु रिटायरमेंट से पहले ही हो गई . उनकी संतान  बच्चे अपने जीवन में अच्छी तरह व्यवस्थित हो चुके थी . ऐसे में  नागपुर निवासी श्रीकांत सहस्त्रबुद्धे  के सामने सवाल था था कि इस बड़ी राशि का क्या किया जाए… तभी उनके अंतर्मन से एक आवाज आई कि क्यों न इस रकम  का उपयोग उन वीरों के लिए किया जाए जो देश की सीमाओं पर अपनी जान की बाजी लगाते हैं.

लिहाज़ा श्रीकांत सहस्त्रबुदे  ने नागपुर में उत्तर महाराष्ट्र और गुजरात सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, मेजर जनरल नवतेज एस. सोहल से मुलाकात कर उन्हें 25.51 लाख रुपये का चेक सौंपा. उस  वक्त श्रीकांत की आंखें भर आईं, लेकिन यह आंसू दुख के नहीं बल्कि परम संतोष के थे.

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैं अपने आंसू रोक नहीं पा रहा हूं. मुझे जो खुशी मिल रही है, उसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है. मुझको  मुझे अपनी पत्नी के साथ दुनिया घूमने से जितनी खुशी मिलती, उससे कहीं गुना ज्यादा आनंद इस दान से मिल रहा है.  आज मेरी पत्नी जहां कहीं से भी मुझे देख रही होगी, बेहद खुश होगी. ”

सेना के  अधिकारियों ने श्रीकांत सहस्रबुद्धे के इस अतुलनीय योगदान की तारीफ़ की और इसे नि:स्वार्थ सेवा और नागरिक जिम्मेदारी का एक अनुकरणीय उदाहरण बताया. ऐसा  दान उन शहीद परिवारों, दिव्यांग सैनिकों और युद्ध विधवाओं के जीवन की बेहतरी में खर्च किया जाता है जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया.