त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनखड़ की मौत एक पहेली बन गई है जिसे सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने विशेष जांच दल ( special investigating team ) का गठन किया और यह टीम दिल्ली पहुंच चुकी है . इस बीच वकीलों ने त्रिपुरा के राज्यपाल से मुलाक़ात करके इस केस की न्यायिक जांच करवाने की मांग कर डाली है . ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (all india lawyers union -AILU) की त्रिपुरा राज्य समिति ने इस बाबत दिए गए ज्ञापन में राज्यपाल से कहा है कि पुलिस महानिदेशक अनुराग धनकर की असमय और असामान्य मौत की जांच के लिए त्रिपुरा हाई कोर्ट के मौजूदा जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग बनाया जाए.
एसआईटी की जांच :
त्रिपुरा सरकार ने डीजीपी अनुराग धनखड़ की मौत की जांच के लिए जिस एसआईटी का गठन किया है उसका नेतृत्व वेस्ट त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक नमित पाठक ( sp namit pathak ) कर रहे हैं . यह टीम नई दिल्ली पहुंच गई है. उम्मीद है कि यह टीम सीनियर आईपीएस अधिकारी की मौत से जुड़े हालात की जांच के तहत सबूत इकट्ठा करेगी, डिजिटल रिकॉर्ड की जांच करेगी और बयान दर्ज करेगी.
एसआईटी में अमताली थाने के प्रभारी निरीक्षक राणा चटर्जी, वेस्ट अगरतला महिला पुलिस थाने की प्रभारी महिला इंस्पेक्टर शिउली दास और रामनगर टाउन पुलिस चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक सुभेंदु दास शामिल हैं. इस टीम को राष्ट्रीय जांच से जुड़े कई सुरागों पर आगे बढ़ने के लिए डीजीपी अनुराग धनखड़ की पत्नी से पूछताछ भी करनी है जो उत्तर प्रदेश के बड़ौत में है .
न्यायिक जांच की मांग:
इस बीच वकीलों के संगठन एआईएलयू ( ailu ) ने अपने ज्ञापन में कहा है कि राज्य के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी की अचानक और असामान्य मौत ने लोगों में काफी चिंता पैदा की है और कई अनसुलझे सवाल खड़े किए हैं, जिससे यह मामला जनहित के लिहाज से बहुत अहम हो गया है. संगठन की दलील है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए, सिर्फ़ सामान्य जांच प्रक्रिया पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा और सच्चाई का पता लगाने के लिए एक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय न्यायिक जांच ज़रूरी है.
संगठन का मानना है कि त्रिपुरा हाई कोर्ट के मौजूदा जज की अगुवाई में की जाने वाली जांच तथ्यों का पता लगाने, लोगों के शक दूर करने और न्याय प्रणाली में भरोसा मज़बूत करने का सबसे सही और व्यापक रूप से कबूल होगा . ज्ञापन में राज्यपाल से मामले की गंभीरता पर विचार करने और न्यायिक जांच आयोग के गठन के लिए ज़रूरी संवैधानिक कदम उठाने या उनकी सिफारिश करने की अपील की गई. इसमें मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, फोरेंसिक सैंपल और अन्य भौतिक सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत कदम उठाने की भी मांग की गई, ताकि निष्पक्ष और व्यापक जांच हो सके.