भारत की आधुनिक जंगल युद्ध नीति के सूत्रधार ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार चल बसे

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ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार ( फाइल फोटो )
ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार ( फाइल फोटो )

भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध में अग्रिम मोर्चा संभालने वाले और माओवादी विद्रोह के खिलाफ देश की आधुनिक जंगल युद्ध (जंगल वॉरफेयर) रणनीति के सूत्रधार, ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार (रिटायर्ड) का निधन हो गया. वे 77 साल के थे.  परिवार में उनकी माँ देविका पोनवार और दो बेटे हैं. दोनों बेटे अभी सेना में सेवा दे रहे हैं.

1971 के युद्ध के दौरान सीमा-पार अभियानों का हिस्सा रहे युवा अधिकारी के तौर पर, बसंत कुमार पोनवार ने  मुक्ति वाहिनी लड़ाकों के साथ मिलकर घात लगाकर हमले किए और ढाका की ओर बढ़ने में अहम भूमिका निभाई. पोनवार ने भारतीय सेना और मिजोरम व छत्तीसगढ़ में पुलिस बलों के साथ देश की सुरक्षा में पांच दशक से ज़्यादा का समय बिताया.

3 मार्च 1949 को मध्य प्रदेश के शहर इंदौर में पैदा हुए बसंत कुमार पोनवार ने  दिसंबर 1969 में मराठा लाइट इन्फैंट्री ( maratha light infantry ) की पहली बटालियन में कमीशन हासिल  किया था.

1971 की लड़ाई के दौरान, 95 माउंटेन ब्रिगेड के तहत सेवा करते हुए, उन्होंने कमालपुर और बख्शीगंज में दुश्मन के ठिकानों पर छापे मारे और बाद में ऐतिहासिक टंगैल पैराड्रॉप के दौरान एक अहम संपर्क अधिकारी के तौर पर काम किया.

36 साल के शानदार सैन्य करियर के दौरान, उन्होंने एमएलआई  की पहली बटालियन  ( 1 mli ) की कमान संभाली और मिजोरम के वैरेंगटे में सेना के काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वॉरफेयर स्कूल ( counter insugency and jungle warfare school) के कमांडेंट के तौर पर सेवा दी.  उन्होंने यहां पर  2004 में भारत-अमेरिका के पहले संयुक्त अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’ की देखरेख की.  उन्हें असाधारण सेवा के लिए अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) से सम्मानित किया गया था.

सेना से रिटायर होने के बाद, ब्रिगेडियर पोनवार को छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस महानिरीक्षक ( inspector general ) नियुक्त किया.  अगस्त 2005 में, उन्होंने कांकेर, उत्तर बस्तर में काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वॉरफेयर कॉलेज (counter terrorism and jungle warfare college ) की स्थापना की.  भारत में नक्सलवादियों से निपटने में इस कॉलेज का बहुत बड़ा योगदान है जहां से हजारों सुरक्षाकर्मियों ने जंगली इलाके में नक्सलियों से दो दो हाथ करने के गुर सीखे .

“गुरिल्ला से गुरिल्ला की तरह लड़ो” – इस मशहूर युद्ध-मंत्र से प्रेरित होकर उन्होंने 18 साल तक कॉलेज का संचालन किया और नक्सली हिंसा से निपटने के लिए राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय अर्धसैनिक इकाइयों के 37,000 से ज़्यादा जवानों को ट्रेनिंग दी.

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने ब्रिगेडियर पोनवार (रिटायर्ड) के निधन पर शोक व्यक्त किया और ‘काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर कॉलेज’ (कांकेर) में एक इंस्ट्रक्टर के तौर पर उनकी भूमिका को याद किया.

उन्होंने कहा, “जंगल में युद्ध करने में हमारे सैनिकों को माहिर बनाने और इस तरह सुरक्षा बलों को मज़बूत करने में उनका ऐतिहासिक योगदान हमेशा याद रखा जाएगा. उनका जाना राज्य और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है.”

छत्तीसगढ़ पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल पर पोनवार की भूमिका को याद करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में उनका साहस, नेतृत्व और देश के प्रति उनकी सेवा हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी.

पोस्ट में कहा गया, “छत्तीसगढ़ की सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है.”