
अपना तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने पर मीराबाई चानू कहा, “हर गोल्ड मेडल खास होता है क्योंकि हर एक की अपनी कहानी होती है. यह वाला इसलिए अलग है क्योंकि मुझे कई मुश्किलों से पार पाना पड़ा. वजन को मैनेज करना, चोटों से उबरना और दर्द का सामना करने की वजह से यह सफर बहुत मुश्किल हो गया था.” असल में वजन मैनेज करने के लिए उनको इस मुकाबले से पहले तीन दिन भूखा रहना पड़ा. पानी भी बेहद कम पीया.
मीराबाई चानू को जब गोल्ड मेडल प्रदान किए जाने के बाद सम्मान स्वरूप स्टेडियम में भारत का राष्ट्रगान गूंजा तो वो सबसे भावुक पल थे. चानू की आँखों से अश्रुधारा बह रही थी. यह ख़ुशी और गर्व के आंसूं थे जो उस कष्ट और दर्द को भी बहा ले जा रहे थे जो चानू ने इस मेडल के लिए झेला .
देश ने दी बधाई :
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीराबाई चानू को उनकी इस उपलब्धि पर बधाई दी है. राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने असाधारण हिम्मत, दृढ़ संकल्प और बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया है. उपराष्ट्रपति ने उनके समर्पण, मुश्किलों का सामना करने की क्षमता और लगातार बेहतरीन प्रदर्शन की तारीफ की, जबकि प्रधानमंत्री ने इस जीत को भारतीय वेटलिफ्टिंग में एक और शानदार अध्याय बताया, उन्हें प्रेरणास्रोत कहा और आगे भी सफलता की कामना की.
मीराबाई चानू का जीवन संघर्ष :
मीराबाई चानू मणिपुर के एक साधारण परिवार में छह बच्चों में सबसे छोटी थीं जिसका जन्म 8 अगस्त 1994 को हुआ. उनके पिता, साइखोम कृति मेइतेई, राज्य के लोक निर्माण विभाग ( public works department ) में काम करते थे. भरे पूरे परिवार की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त आमदनी की चहिये थी . इसलिए उनकी माँ साइखोम टोम्बी देवी, गाँव में चाय और स्नैक्स का छोटा स्टाल चलाती थीं .
इम्फाल में ट्रेनिंग सेशन में शामिल होने के लिए मीराबाई चानू हर दिन अपने गांव से लगभग 30 किलोमीटर का सफर तय करना होता था. क्योंकि परिवार रोज़ाना प्राइवेट ट्रांसपोर्ट का खर्च नहीं उठा सकता था, इसलिए चानू अक्सर रेत लादकर लाने ले जाने वाले ट्रकों से लिफ्ट लेती थीं. इस तरह जो ट्रक ड्राइवर नियमित रूप से उसी रास्ते से गुज़रते थे, वे उनके वेटलिफ्टिंग करियर के शुरुआती सालों में उनके सफर का एक अहम हिस्सा बन गए.
मीराबाई चानू की उपलब्धियां :
उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक में महिलाओं के 49 किलोग्राम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता था. 17 अप्रैल 2021 को, उन्होंने 2020 एशियाई वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 49 किलोग्राम कैटेगरी में 119 किलोग्राम (262 पाउंड) वज़न उठाकर ‘क्लीन एंड जर्क’ में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया; यह रिकॉर्ड 5 सितंबर 2023 तक उनके नाम रहा.
मीराबाई चानू ने 2017 वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता. उन्होंने वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में दो सिल्वर मेडल भी जीते हैं. मीराबाई चानू को 2018 में भारत सरकार ने भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ और खेल के क्षेत्र में भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘खेल रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया. 2022 में उनको मणिपुर पुलिस में सेवा दी गई जहां वे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (खेल ) के पद पर हैं .









