बिहार सरकार नीट पेपर लीक घोटाले से संबंधित विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वालों करने के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस मामले वापस ले लेगी. राज्य सरकार के गृह विभाग की तरफ से इस बारे में जारी आदेश की जानकारी दी गई है . वैसे खुद बिहार की पुलिस भी प्रदर्शनकारियों पर एके 47 असाल्ट राइफल और 9 एमएम गन इस्तेमाल किए जाने के आरोप व विवाद में फंसी है. ऐसे एक मामले में पुलिसकर्मी के खिलाफ भी कार्रवाई की शुरुआत की गई है .
उल्लेखनीय है कि 26 जुलाई को केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की जानकारी देने के साथ ही केंद्र सरकार की तरफ से दिल्ली में कॉक्रोच जनता पार्टी ( cockroach janta party ) के नेतृत्व की मौजूदगी में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया गया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे. इसी तरह का आश्वासन एक दिन पहले केन्द्र सरकार के दो मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने मेदंता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को तुड़वाते वक्त दिया था.
अब बिहार सरकार ने सोमवार ( 27 जुलाई 2026 ) को घोषणा की है कि वह राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (national eligibility cum entrance test – NEET) पेपर लीक घोटाले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस मामले वापस ले लेगी. वैसे सरकार की यह घोषणा कॉक्रोच जनता पार्टी द्वारा पुलिस मामलों को लेकर एक नया विरोध प्रदर्शन शुरू करने की धमकी के बाद आई है. हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के अलावा दिशा छात्र संगठन और आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ( all india students association) यानि आइसा के कार्यकर्ता व पदाधिकारी भी थे. कुछ को तो प्रदर्शन से पहले ही निरोधात्मक पुलिस कार्रवाई के तौर पर हिरासत में ले लिए जाने की खबरें आई थीं.
सोमवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, बिहार सरकार के गृह विभाग ने कहा: “पूरे राज्य में 26 जुलाई को शाम 6 बजे से पहले विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सरकार द्वारा कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई – दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक – नहीं की जाएगी।” इसमें आगे कहा गया कि “निर्धारित तिथि से पहले दर्ज मामलों के संबंध में गिरफ्तार/हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा.”
मीडिया तक पहुंचाए गए इस प्रेस बयान पर जारीकर्ता के रूप में विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह ( kshatranil singh ) के हस्ताक्षर हैं जोकि भारतीय पुलिस सेवा के 2005 बैच ( बिहार कैडर ) के अधिकारी हैं. पुलिस के ओहदे के हिसाब से श्री सिंह पुलिस महानिरीक्षक ( inspector general of police ) यानि आईजी हैं .

वैसे सरकार का यह आश्वासन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बिहार पुलिस की कार्रवाई की कड़ी आलोचना के बाद आया है. पुलिस ने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के समर्थन में 25 जुलाई को हुए प्रदर्शनों के सिलसिले में राज्य भर में लगभग 700 लोगों को हिरासत में लिया गया था. इनमें से 350 से अधिक लोगों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि अन्य को उम्र की पुष्टि के बाद रिहा कर दिया गया. सबसे ज्यादा लोग राजधानी पटना में हिरासत में लिए गए थे. पटना के अलावा जबरदस्त विरोध प्रदर्शन सीवान और छपरा जिले में भी हुए थे .










