पीजी बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने वाले अर्पित की आंखें दान कर मां बाप क्यों बोले ‘बेकार है दिल्ली’

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अर्पित जाज ( फाइल फोटो ) और उसके वियोग में तड़पता परिवार
अर्पित जाज ( फाइल फोटो ) और उसके वियोग में तड़पता परिवार

कुछ गलत नहीं कहा अर्पित जाज की मां पुष्पा और पिता भूपेन्द्र ने. मध्य प्रदेश के देवास में रहने वाले इस दम्पति ने अपना इकलौता बेटा खोया है. बहन से राखी बंधवा कर अर्पित देवास से  6 सितंबर की सुबह दिल्ली लौटा था. दोपहर में फोन कॉल नहीं उठाई तो परिवार ने सोचा ट्रेन के सफर में नींद पूरी नहीं हुई होगी इसलिए सो रहा होगा. लेकिन सच्चाई यह थी कि तब तक अर्पित हमेशा के लिए सो चुका था. सत्य निकेतन के पेइंग गेस्ट होस्टल की ध्वस्त हुई इमारत के मलबे से वो जिंदा नहीं निकाला जा सका था.

डॉक्टरों ने शव सौंपते समय जब पूछा कि क्या अर्पित के नेत्रदान ( कॉर्निया )  करना चाहेंगे तो यह परिवार तैयार हो गया. उनकी सोच थी कि अर्पित का ‘ बड़ा आदमी ‘ बनने का सपना तो पूरा न हो सका लेकिन उसकी आँखों से मिलने वाली रोशनी  किसी और का सपने पूरे कर देगी. 19 साल का अर्पित दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैम्पस के आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था.

अर्पित और 6 अन्य की मौत पहले से ही खराब हालत वाली पांच मंजिला इमारत के गिरने से हुई. तमाम नियम कायदों को ताक पर रखकर , पुराने भवन पर , बनाई गई अतिरिक्त मंजिलों वाली इस बिल्डिंग के खस्ता हाल किसी से छिपे नहीं थे लेकिन लालची मालिक ऊपर ऊपर से इसकी रंगाई पुताई करवाकर इसमें छात्रों को रख कर कमाई करता रहा. अर्पित इसके लिए 16 हजार प्रति माह देता था जिसमें खाने का खर्च भी शामिल था.

बेटे को खोने का दर्द ताउम्र इस परिवार को सालता रहेगा लेकिन इस हालत में भी उनकी तकलीफ को ज्यादा बढ़ाया उस सरकारी सिस्टम ने जो लगभग संवेदन शून्य हो चुका है . अर्पित के  माता पिता ने  जिस  सिलसिलेवार तरीके से ब्यौरा दिया वह सच में देश की राजधानी के आपदा प्रबंधन ( disaster management) की तैयारी की पोल पट्टी खोल देने के लिए काफी है . बिल्डिंग गिरने के हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य के मामले देर से जागे सरकारी तंत्र की करतूत तो किसी से छिपी नहीं  लेकिन जो कुछ अर्पित के मामले में उसके परिवार ने भोगा इससे भी भयावह है .

ध्वस्त बिल्डिंग ( collapsed building) के मलबे से 12 लोग निकाले गए थे जिनमें सात की मृत्यु हुई. अर्पित के माता पिता का कहना है कि उनको बेटे के दोस्त ने उन्हें उस पीजी होस्टल की बिल्डिंग गिरने की उनको खबर दी थी जिसमें अर्पित रहता था लेकिन अर्पित के बारे में तब तक कुछ पता नहीं था. मलबा हटाने का काम चल रहा था , इधर परिवार वाले अस्पताल पहुंचे जहां घायलों और शवों को लाया गया था. पुलिस और डॉक्टरों ने उनको वे शव दिखाए जो छात्र हो सकते थे या युवा लग रहे थे. उनमें अर्पित का शव नहीं था. वहां एक शव और भी  था जिसके बारे में  परिवार को बताया गया कि किसी 35 वर्षीय लावारिस व्यक्ति का शव है . परिवार उस शव को भी देखकर अपनी संतुष्टि करना चाहता था लेकिन पुलिस कर्मी  और डॉक्टर उनसे कह रहे थे कि बिल्डिंग में कुछ मजदूर काम कर रहे थे और संभवत वह शव किसी मजदूर का होगा.

परिवार के जिद करने पर जब अस्पताल वालों ने शव दिखाया. मृतक का चेहरा पहचाना नहीं जा पा रहा था.  शरीर को गौर से देखने पर उसके सीने पर तिल जैसे पैदायशी निशान से माता पिता ने पहचान लिया कि यह उनका ही बेटा है .  लेकिन साथ ही में उन्होंने महत्वपूर्ण बात बताते हुए सवाल भी खड़े किए. पहला तो यही कि क्या दिल्ली पुलिस के कर्मी और यहां के डॉक्टर इतने अनुभवहीन  होते हैं  कि 18 -19 साल लड़के के शव को 35 साल के व्यक्ति का शव समझ लें. दूसरा . शव एकदम नग्नावस्था में था. यदि उसके कपड़े होते तो उनसे आसानी से पहचान हो सकती था. यही नहीं , परिवार का तो यह भी कहना है कि अर्पित गले में चांदी की चेन और हाथ में ब्रेसलेट पहनता था. उनसे भी पहचाना जा सकता था लेकिन यह दोनों चीजें गायब थीं .

लेकिन इस  प्रकरण का एक  सबसे अफ़सोस नाक पहलू यह भी है  कि अगर परिवार ने डॉक्टरों और पुलिस की बात मान ली होती और उस कथित लावारिस शव को देखने की जिद न की होती तो अर्पित के शव को लावारिस साबित कर देश की राजधानी के सरकारी तंत्र ने उसका अंतिम  संस्कार भी कर देना था. यदि ऐसा होता तो यह परिवार जीवन भर अर्पित के इंतज़ार वाले दर्द के साथ जीता. ऐसे में परिवार का न तो यह कहना गलत है इमारत गिरने हुई में  मौत कोई हादसा नहीं ‘ उन लोगों की हत्या थी और न ही यह  गलत कि दिल्ली बेकार है . उनका कहना है  कि  वे कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार या मिलने जुलने वालों के परिवार से कोई बच्चा दिल्ली  जाए.

अर्पित एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार का प्रतिभावान पुत्र था. मां पुष्प ब्यूटीशियन का काम करती है और पिता ड्राइविंग करते हैं . उनकी एक बेटी भी है जो कॉलेज की पढ़ाई कर रही है.