4 जून 1930 को जन्मे विश्व नाथ शर्मा भारत के राष्ट्रपति से कमीशन पाने ऐसे पहले अधिकारी थे जो सेना प्रमुख के ओहदे पर पहुंचे . उन्होंने 1950 में सेना में कमीशन हासिल किया था . जनरल शर्मा ने 1988 से 1990 तक भारतीय सेना की कमान संभाली. यह वो दौर था जब भारत बेहद संवेदनशील और विपरीत हालात से गुजर रहा था.
जनरल वी एन शर्मा के पिता अमरनाथ शर्मा भी एक सैन्य अधिकारी थे और मेजर जनरल के ओहदे से रिटायर हुए . हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से ताल्लुक रखने वाले जनरल वी एन शर्मा आज़ाद भारत का पहला मरणोपरांत परमवीर चक्र पाने वाले मेजर सोमनाथ शर्मा के भाई थे. उनके एक अन्य भाई लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंद्र नाथ शर्मा भारतीय सेना में इंजीनियर-इन-चीफ़ थे और बहन मेजर डॉ. कमला तिवारी (शादी से पहले शर्मा) भी भारतीय सेना की मेडिकल कोर में थीं. तीनों भाइयों ने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी.
वी एन शर्मा देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी ( indian military academy ) यानि आईएमए में पांचवें रेगुलर कोर्स में शामिल हुए और 4 जून 1950 को उन्हें 16वीं लाइट कैवेलरी में कमीशन मिला. उन्होंने 1965 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लाहौर सेक्टर में लड़ाई लड़ी. उन्होंने 66वीं आर्मर्ड रेजिमेंट और बाद में उग्रवाद प्रभावित इलाक़े में एक माउंटेन ब्रिगेड की कमान संभाली. बेहतरीन सेवा के लिए अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित जनरल शर्मा ने 1 जून 1987 को ईस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ का पद संभाला और 25 जुलाई 1987 को उन्हें राष्ट्रपति का मानद आर्मी एडीसी नियुक्त किया गया. उन्होंने 1 मई 1988 को चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ का पद संभाला था.










