भारत की मेजर सुमन गवानी, ब्राज़ील की कमांडर कार्ला यूएन अवार्ड से सम्मानित

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अवार्ड समारोह में भारतीय सेना की मेजर सुमन गवानी.

भारतीय सेना की मेजर सुमन गवानी और ब्राजील नौसेना की अधिकारी कमांडर कार्ला मोंटेरियो को संयुक्त राष्ट्र मिशन की तरफ से ‘यूनाइटेड नेशंस मिलिटरी जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया. कोरोना संक्रमण और लॉक डाउन की वजह से ये अवार्ड समारोह पहली बार इस ऑनलाइन आयोजित किया गया. इस अवसर पर भारत में संयुक्त राष्ट्र की संयोजक रेनाता डिस्सालें ने शान्ति मिशनों में भारत के योगदान की तारीफ करते हुए भारत के प्रति आभार प्रकट किया. वहीं मेजर सुमन गवानी ने इस सम्मान को भारत के तमाम सैनिकों और अमन चैन कायम करने में अपना सर्वोच्च न्योछावर करने वाले सैनिकों को समर्पित किया. संयुक्त राष्ट्र के शान्ति अभियानों में शांति सैनिक भेजने वाला भारत दुनिया का सबसे बड़ा तीसरा देश है.

संयुक्त राष्ट्र की संयोजक रेनाता डिस्सालें (Renata Dessallien) का कहना था कि शान्ति सेना में महिलाओं की भागीदारी का जबरदस्त असर देखा जाता है जब शान्ति सैनिक युद्ध और हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जाकर काम करते हैं. उन्होंने अफ्रीकी देश लाइबेरिया की मिसाल देते हुए बताया कि वहां शान्ति सेना में महिला सैनिकों की हिस्सेदारी का व्यापक असर उन शान्ति सैनिकों के लौट जाने के बाद वहां के सुरक्षा बलों में महिलाओं के हिस्सेदारी में इजाफे के तौर पर साफ साफ़ दिखाई दिया. लाइबेरिया में जहां सुरक्षा बलों में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 6 फीसदी होती थी वहीं अचानक ये 17 प्रतिशत हो गई. संयुक्त राष्ट्र के शान्ति अभियानों में शांति सैनिक भेजने वाला भारत दुनिया का सबसे बड़ा तीसरा देश है.

परेड में मेजर सुमन

शान्ति सैनिकों को ये सम्मान संयुक्त राष्ट्र शान्ति सैनिक दिवस के अवसर पर हर साल 29 मई को दिया जाता है. 1948 से अब तक 3900 महिला और पुरुष शांति सैनिक विभिन्न अभियानों में अपनी जान गंवा चुके है. उन्हें संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुतरेज ने श्रद्धांजलि अर्पित की. इस अवसर पर उन्होंने अपने ट्वीट संदेश में कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक दिवस और हर दिन हम शांति सैनिकों की सेवा, बलिदान और निस्वार्थ सेवाभावना वाले लोगों को सम्मानित करते हैं.

इस अवसर पर अपने संदेश में मेजर सुमन ने कहा कि शान्ति सैनिक के तौर पर उनकी तैनाती जीवन को बदल देने वाला अनुभव रहा. उन्होंने कहा कि लड़ाई वाले इलाकों में शांतिसेना में महिलाओं को ज्यादा संख्या में भेजने का अच्छा असर पड़ता है. इससे वहां पर सैनिकों के प्रति विश्वास की भावना बढ़ती है. ऐसे इलाकों में जहां यौन हिंसा होती है और वहां पर महिला शान्ति सैनिकों को भेजने से हालात को समझना और सम्भालना बेहतर तरीके से होता है.

भारत में संयुक्त राष्ट्र की संयोजक रेनाता डिस्सालें.

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल की रहने वाली मेजर सुमन गवानी ने दक्षिण सूडान में यूएन मिशन पर अपनी तैनाती के अनुभव साझा करते हुए कहा कि इससे एक संदेश मिलता है कि शान्ति मिशनों में दुनिया की आधी आबादी की हिस्सेदारी बराबर की होनी चाहिए. मेजर सुमन ने थल सेना की सिग्नल कोर में 2011 में कमीशन हासिल किया था. उन्हें ये सम्मान यौन हिंसा विरोधी अभियान में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है. मेजर सुमन ने दक्षिणी सूडान में सभी यूएन मिशन के कार्यक्षेत्रों पर महिला यूएन मिलिट्री ऑब्जर्वर्स की तैनाती भी सुनिश्चित की. मेजर सुमन ने यौन हिंसा से जुडे़ मामलों पर काबू पाने के लिए दक्षिण सूडान के सैनिकों को भी प्रशिक्षित किया. खुद एक सैनिक पर्यवेक्षक होने के नाते मेजर सुमन ने यौन हिंसा से जुड़े मामलों पर नज़र रखने वाली संयुक्त राष्ट्र की 230 महिला पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया.

मेजर सुमन गवानी :

भारत की मेजर सुमन गवानी यूएन अवार्ड से सम्मानित.

मेजर सुमन टिहरी गढ़वाल के पोखर गांव की रहने वाली हैं और उनकी स्कूली शिक्षा उत्तरकाशी में हुई. राजधानी देहरादून के सरकारी पीजी कॉलेज से उन्होंने बीएड की डिग्री ली. साथ ही मिलिरी मध्य प्रदेश के महू स्थित कॉलेज ऑफ टेलिकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग से उन्होंने टेलीकम्युनिकेशन की डिग्री भी ली. मेजर सुमन ने 2011 में चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकेडमी (OTA) से पढ़ाई और ट्रेनिंग के बाद थल सेना की सिग्नल कोर में कमीशन प्राप्त किया. उनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के शान्ति अभियान के सदस्य के तौर पर तैनाती के दौरान यूएन के नीले हेलमेट के साथ वर्दी पर अपने देश का ध्वज गौरवान्वित करता है.

भारतीय सेना 1950 से ही यूएन के शांति मिशनों में हिस्सा लेती रही है. इसके जवान और यूनिट्स यूएन के 49 मिशनों में अपनी हिस्सेदारी दे चुके हैं. तकरीबन दो लाख से ज्यादा भारतीय सैनिक दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

ब्राजील नौसेना की कमांडर कार्ला अराउजो :

ब्राजील नौसेना की कमांडर कार्ला अराउजो.

ब्राजील नौसेना की कमांडर कार्ला अराउजो संयुक्त राष्ट्र के दूसरे मिशन के लिए मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में तैनात थीं. वह वहां पर ‘जेंडर एंड प्रोटेक्शन’ पर ट्रेनिंग देती हैं. कमांडर कार्ला अराउजो के मेहनत भरे काम से स्थानीय समुदायों के बीच लिंगभेद और यौन हिंसा को रोकने के लिए हर महीने होने वाली ‘जेंडर रिस्पोंसिव गश्त’ की संख्या 574 से बढ़कर 3000 तक पहुँच गई. कमांडर कार्ला अराउजो को जब सम्मानित होने की खबर मिली तो उनका जवाब था कि मेरे और मेरे मिशन के लिए यह देखना बड़ा संतोषजनक है कि हमने जो काम शुरू किए थे, उनके नतीजे अब आने लगे हैं. वे अब फल देने लगे हैं.

ब्राजील नौसेना की कमांडर कार्ला अराउजो संयुक्त राष्ट्र के दूसरे मिशन के लिए मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में महिलाओं के बीच.

ब्राज़ील नेवी की कमांडर कार्ला का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को महिला सैनिकों पर भरोसा बढ़ाना चाहिए और उन्हें शुरू से ही बराबरी के अवसर मुहैया कराने चाहिए. वहीं महिला सैनिकों को उन्होंने अपनी शक्ति और क्षमता पर विश्वास करते हुए अपने सपनों को साकार करने के लिए डटे रहने की बात कही. उन्होंने कहा कि महिला सैनिक एक दूसरे को कुदरती तौर पर समझती हैं और समाज को ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली महिला सैनिकों की ज़रूरत है. इसे स्थानीय लोगों का दृष्टिकोण बदलने के एक अवसर के तौर पर लिया जाना चाहिए.

अवॉर्ड का इतिहास :

संयुक्त राष्ट्र की इस साल की थीम.

यूएन मिलिटरी जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड की शुरुआत 2016 में हुई थी. जो सैनिक अपने काम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा प्रस्ताव-13 25 (यूएन सिक्योरिटी रेजोल्यूशन-1325 ) के सिद्धांतों को मजबूती देते हैं और आगे बढ़ाते हैं, उन्हें यह सम्मान दिया जाता है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने 31 अक्टूबर 2000 को यूएन सिक्योरिटी रेजोल्यूशन-1325 को अपनाया था जिसके मुताबिक, यूएन के सभी शांति प्रयासों, संघर्षों को रोकने और संघर्ष के बाद के पुनर्निर्माण और तनावों की रोकथाम जैसे कार्यक्रमों में महिलाओं की बराबर भागीदारी सुनिश्चित करना है. क्यूंकि यूएन सिक्योरिटी रेजोल्यूशन-1325 प्रस्ताव मिशनों में महिलाओं की बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की बात कहता है इसलिए इस प्रस्ताव के बीस साल पूरे पर यूएन की इस साल की थीम भी यही है-शांति मिशनों में महिलाएं ही शांति की कुंजी.

इंटरनेशनल डे ऑफ यूएन पीसकीपर्स :

आज से 72 साल पहले यानि 29 मई 1948 को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का पहला शांति मिशन शुरू हुआ था. अरब-इजराइल युद्ध में सीजफायर के बाद हालात पर निगरानी करने के लिए यूएन सुपरविजन ऑर्गनाइजेशन बनाया गया था. इसी की याद में इंटरनेशनल डे ऑफ यूएन पीसकीपर्स 29 मई को मनाया जाता है. इस दिन यानी 29 मई को हर साल यूएन के शांति मिशनों में काम कर रहे लोगों की मेहनत, हिम्मत और लगन को सम्मान दिया जाता है. विभिन्न शान्ति अभियानों में जान गंवा चुके लोगों को भी याद किया जाता है.

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