एलएसी के पास चीन के संरचनाएं बनाने पर सैनिक भिड़े, बोले पीएम मोदी

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भारत-चीन के सैनिकों में झड़प के मसले पर विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस में भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी

भारत ने स्पष्ट किया है कि 15 जून को लदाख बॉर्डर पर गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच खूनी झड़प होने की वजह चीन की तरफ से विवादास्पद क्षेत्र में किया जाने वाला निर्माण कार्य था. भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ, वहां के हालात साझा करने के लिए बुलाई गई प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की 19 जून की बैठक के सन्दर्भ में जारी किये गए बयान में ये बात कही गई है.

भारत के प्रधनामंत्री कार्यालय की तरफ से आज जारी इस बयान में कहा गया है सर्वदलीय बैठक में बताया गया था कि “15 जून को गलवान में हिंसा इसलिए हुई क्योंकि चीनी पक्ष एलएसी के नजदीक संरचनाएं खड़ी करना चाह रहा था और इस तरह के कार्य न करने की बात नहीं मान रहा था.” इस बयान के मुताबिक़ बैठक में बताया गया था कि इस बार, चीनी सेना एलएसी (Line of Actual Control) पर बहुत ज्यादा ताकत के साथ आ गई और उस पर भारतीय प्रतिक्रिया भी उसके मुताबिक़ रही.

लदाख की तरफ जाते भारतीय सैनिकों का श्रीनगर के पास अस्थायी पड़ाव

गलवान घाटी और भारत-चीन के ताज़ा घटनाक्रम को लेकर हुई इस बैठक में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणियों को कुछ हलकों में तोड़ मरोड़कर पेश करने का इलज़ाम आज जारी बयान में लगाया गया. इसमें किसी का नाम नहीं लिया गया लेकिन कहा गया है कि कुछ हलकों में ऐसी कोशिशें की जा रही हैं. बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी कि ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा के हमारी तरफ चीन की कोई उपस्थिति नहीं है’ हमारे सशस्त्र बलों की बहादुरी के परिणामस्वरूप बनी स्थिति से संबंधित थी.

प्रधानमन्त्री के दफ्तर के इस बयान में जोर देते हुए और सटीक तरीके से कहा गया है, “16 बिहार रेजिमेंट के सैनिकों के बलिदान ने संरचनाएं खड़ी करने की चीनी पक्ष की कोशिश को नाकाम कर दिया और उस दिन इस जगह पर एलएसी के उल्लंघन के प्रयास को भी निष्फल कर दिया”. बयान के मुताबिक़, सर्वदलीय बैठक की चर्चा में प्रधानमंत्री की टिप्पणियों का फोकस 15 जून की गलवान की घटनाओं पर था जिसके कारण 20 भारतीय सैन्य कर्मियों की जान चली गई थी.

उल्लेखनीय है कि सोमवार (15 जून 2020) की रात को भारत-चीन वास्तविक नियन्त्रण रेखा वाले गलवान घाटी क्षेत्र में दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमने सामने की लड़ाई में भारत के 20 सैनिकों की जान गई थी. हालांकि सूचना तो ये भी आईं कि इस खूनी संघर्ष में चीनी सैनिक भी मारे गये और ज़ख्मी हुए लेकिन चीन ने अभी तक खुलकर इस बारे में कुछ नहीं कहा. दूसरी तरफ भारत की न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी जानकारी में इस झड़प में चीन के 43 सैनिकों के हताहत होने की बात कही थी. भारत की तरफ से शुरू में बताया गया था कि इस झड़प में बिहार रेजिमेंट के कर्नल संतोष बाबू और दो अन्य सैनिकों की जान गई है. इसके बाद भारतीय सेना ने अपने 17 और जवानों के इस घटना में शहीद होने की खबर साझा की.

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