भारत और चीन की सैनिक टुकड़ियां एक साथ मास्को दिवस परेड में शामिल होंगी

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भारतीय सशस्त्र सेनाओं का दल मास्को के लिए रवाना हुआ.

लदाख में सीमा पर एक दूसरे की जान लेने के लिए खूनी झड़प करने के सिर्फ 10 दिन के भीतर ही भारत और चीन की सेनाओं की टुकड़ियां रूस की राजधानी मास्को में होने वाली परेड में हिस्सा लेंगी. दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी की नाज़ी सेना को परास्त करने की 75 वीं सालगिरह पर होने वाले समारोह के दौरान ये ‘ मास्को विजय दिवस परेड’ ऐतिहासिक रेड स्क्वेयर पर 24 जून को होनी है. भारत से परेड में हिस्सा लेने के लिए कर्नल रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय सेना के तीनों अंगों के 75 सैनिकों की एकीकृत टुकड़ी रवाना हुई है. हर साल होने वाली, इस परेड में शामिल होने के लिए 20 देशों की सेनाओं को आमंत्रित किया गया है. इनमें अमेरिका, इंग्लॅण्ड और फ़्रांस भी शामिल है.

मास्को डे परेड (फाइल)

परेड में भारतीय टुकड़ी का नेतृत्व, विश्व युद्ध में अपनी शूरवीरता का परचम फहराने वाली सिख लाइट इनफेन्ट्री का मेजर रैंक का अधिकारी कर रहा है. सिख लाइट इनफेन्ट्री के सैन्य इतिहास को साझा करते हुए भारतीय थल सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया कि इस रेजीमेंट की द्वितीय विश्व युद्ध में दिखाई वीरता की गवाह इसे मिले 4 बैटल ऑनर्स और 2 मिलिटरी क्रॉस जैसे कई सम्मान हैं.

मास्को डे परेड (फाइल)

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सशस्त्र सेना मित्र राष्ट्रों की सेना में शामिल सबसे बड़ी सैन्य बल में से एक थी जिसने उत्तरी और पूर्वी अफ्रीका, पश्चिमी रेगिस्तान और यूरोप में भीषण संघर्ष वाले क्षेत्रों में धुरी राष्ट्रों के खिलाफ चलाए गए अभियान में हिस्सा लिया था.

भारतीय सैनिकों की भूमिका :

इन अभियानों में 87 हजार से अधिक भारतीय सैनिकों की जान गई और 34354 घायल हुए. भारतीय सैनिकों ने सभी मोर्चों पर युद्ध में हिस्सा तो लिया ही साथ ही ईरान से होकर गुजरने वाले लीज मार्ग पर लॉजिस्टिक समर्थन भी सुनिश्चित किया ताकि इसके ज़रिये सोवियत संघ, ईरान और इराक तक हथियार, गोला-बारूद, उपकरण और भोजन सामग्री भी पहुंचाई जा सकी. इस युद्ध में भारतीय सैनिकों की वीरता को चार हज़ार से अधिक अलंकरणों से सम्मानित किया गया जिसमें 18 विक्टोरिया और जॉर्ज क्रॉस सम्मान भी शामिल थे.

रेड स्टार अलंकरण :

सोवियत संघ की तरफ से 1944 में रेड स्टार से अलंकृत सूबेदार नारायण राव निक्कम और हवलदार गजेंद्र सिंह चंद

इतना ही नहीं तत्कालीन सोवियत संघ ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता की तारीफ़ की और सोवियत संघ की सर्वोच्च संस्था प्रेसीडियम ने 23 मई 1944 को पारित एक सरकारी आदेश के जरिए रॉयल इंडियन आर्मी सर्विस कोर के भारतीय सैनिक सूबेदार नारायण राव निक्कम और हवलदार गजेंद्र सिंह चंद को रेड स्टार के प्रतिष्ठित अलंकरण से सम्मानित किया. इस सरकारी आदेश पर मिखाइल कलिनिन और अलेक्जेंंडर गर्किन ने दस्तखत किए थे. सूबेदार नारायण राव निक्कम कर्नाटक के बंगलुरु ज़िले की कनकनहल्ली तहसील के नेराला हाथी गाँव के रहने वाले और हवलदार गजेंद्र सिंह उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा ज़िले की शोर तहसील के बरालू गाँव के रहने वाले थे. ये दोनों रॉयल इंडियन आर्म्स सप्लाई कोर की सामान्य कार्य करने वाली ट्रांसपोर्ट कम्पनी में तैनात थे.

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