… जब दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को गोली लगी !

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दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर वेद मारवाह. (फाइल फोटो).

अगस्त 1983 में जब मैंने डेप्युटेशन पर दिल्ली पुलिस का पद ग्रहण किया तो मेरे बॉस एडिशनल पुलिस कमिश्नर एचसी जाटव थे. उनसे मेरे बहुत अच्छे सम्बन्ध स्थापित हो गए थे. मेरा उनसे बिना नागा मिलना होता था. अपराह्न चार बजे चाय के कप पर हम बात किया करते थे. 1984 के दंगों के बाद दिल्ली पुलिस में एक बड़ा हेरफेर किया गया. महाराष्ट्र कैडर के एसएस जोग को पुलिस कमिश्नर बनाया गया. और नम्बर दो पर दिल्ली कैडर के वेद मारवाह को एडिशनल कमिश्नर सीआईडी पर लाया गया.

श्री मारवाह को एक बहुत अच्छा और प्रोफ़ेशनल अफ़सर माना जाता था. कुछ वर्ष पहले ही उनकी निर्भीक कार्यशैली और निडरता से पुरानी दिल्ली के साम्प्रदायिक दंगों पर क़ाबू पाया गया था. ड्यूटी के दौरान उन्हें एक गोली भी लगी थी. पर उन्होंने बिना परवाह किए दंगाइयों पर क़ाबू पा लिया था. इस हादसे में उन्होंने जिस निर्भीकता का परिचय दिया उस पर उन्हें राष्ट्रपति के शौर्य पुरस्कार से नवाज़ा गया था.

श्री मारवाह भारत की सबसे उच्च श्रेणी की मारक क्षमता वाली सुरक्षा  कमांडो फ़ोर्स यानी नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड (NSG) के महानिदेशक भी रहे हैं. रिटायरमेंट के बाद ये जम्मू कश्मीर और बिहार के राज्यपालों के सलाहकार रहे. इसके बाद ये खुद भी मिजोरम, मणिपुर और झारखण्ड के गवर्नर रहे.

  • ….संस्मरण के लेखक रवि पंवार दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड पीआरओ व प्रवक्ता हैं. वह भारतीय सूचना सेवा के पूर्व अधिकारी भी हैं. 
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दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर वेद मारवाह से यादें ताज़ा करते दिल्ली पुलिस के पूर्व प्रवक्ता रवि पवार । बीच में वरिष्ठ पत्रकार पंकज वोहरा.