आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई का अजीबोगरीब हालात में इस्तीफा

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अन्नामलाई
आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई (फाइल फोटो)

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी अन्नामलाई के. ने बेहद अजीबोगरीब हालात में इस्तीफ़ा दे दिया है. बंगलुरु (दक्षिण) के डीसीपी अन्नामलाई के. का कहना है कि अपने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मधुकर शेट्टी की मौत और कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान हुए अनुभव ने उनकी आँखें खोल दी थीं. 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई के. ने यूं तो सियासत में जाने से सीधा सीधा तो इनकार किया है लेकिन इशारा ऐसा ज़रूर कर डाला है.

अपने मित्रों और शुभचिंतकों को लिखे पत्र में डीसीपी अन्नामलाई के. ने कहा है कि वो इस्तीफा तो पहले देना चाहते थे लेकिन सरकार को लोकसभा चुनाव के बन्दोस्त आदि के काम में असुविधा न हो, इसे देखते हुए उन्होंने अपना निर्णय टाल दिया था. उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि अगर उनके इस्तीफे से कुछ लोगों को नाराज़गी हुई हो तो वे इसके लिए दिल की गहराइयों से माफ़ी मांगते हैं. डीसीपी अन्नामलाई ने पत्र में कहा है कि इन भावुक पलों में मेरी पत्नी, जोकि मेरी बेहतरीन दोस्त है, ने हालात को सहज करने में मेरी बहुत मदद की है.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में ह्रदयरोग से पीड़ित 1999 बैच के आईपीएस अधिकारी मधुकर शेट्टी की मौत हो गई थी. उस वक्त वह मात्र 47 बरस के थे. मधुकर शेट्टी की गिनती कर्नाटक के तेज़ तर्रार पुलिस अधिकारियों में होती थी और बेल्लारी खनन घोटाले का पर्दाफाश करने में उनकी भूमिका ने उन्हें चर्चित बना दिया था.

ऐसा माना जा रहा है कि पुलिस की नौकरी से इस्तीफ़ा देने के बाद अन्नामलाई के. राजनीति की राह पकड़ेंगे लेकिन इस बारे में पूछने पर उनका जवाब गोलमोल ही माना जायेगा. अन्नामलाई के. का कहना है कि वो समाज के लिए काम करेंगे लेकिन उस क्षेत्र में रहकर जहां काम करने में बंदिशें न हों. उनका कहना है, ‘मधुकर शेट्टी सर की मृत्यु ने मुझे अपने जीवन के पुनरीक्षण की राह दिखाई है. तमाम अच्छी चीज़ों का अंत हो गया है और मैंने निर्णय लिया है कि अब खाकी और नहीं’.

डीसीपी अन्नामलाई ने पत्र में कहा है कि वो फिलहाल तमिलनाडु में अपने गाँव जायेंगे. अन्नामलाई ने मंगलवार को मुख्यमंत्री कुमारस्वामी से मुलाकात की तो कुमारस्वामी ने उनसे इस्तीफ़ा वापस लेने पर विचार करने को कहा. अन्नामलाई का कहना है कि वो इस्तीफ़ा वापस नहीं लेंगे लेकिन उन्होंने ये अभी तक तय नहीं किया है कि आगे क्या करेंगे. इसका फैसला लेने के लिए उन्हें सोचने के 3 -4 महीने चाहिए.