भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2004 बैच के पंजाब कैडर के अधिकारी गुरप्रीत सिंह भुल्लर को फिलहाल नई पोस्टिंग नहीं दी गई है. उनको चण्डीगढ़ स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय मेंपुलिस महानिदेशक गौरव यादव के कार्यालय में रिपोर्ट करने को कहा गया है . भुल्लर के जाने से खाली हुए कमिश्नर के ओहदे का काम फिलहाल हरमनबीर सिंह को सौंपा गया है . हरमनप्रीत वर्तमान में अमृतसर में तैनात पुलिस उप महानिरीक्षक ( deputy inspector general – dig ) है . उनको पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
पंजाब में यह विवाद 4 अगस्त को तब शुरू हुआ, जब पंजाब पुलिस ने पाकिस्तान-समर्थित दो टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर और नौ लोगों) को गिरफ्तार करने का ऐलान किया . गिरफ्तार अभियुक्तों में चार नाबालिग लड़के भी शामिल थे.
अमृतसर की पुलिस का कहना था कि अभियुक्त पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर्स के कहने पर यहां के स्थानीय युवाओं को भर्ती करने, अवैध हथियार जुटाने और सार्वजनिक शांति भंग करने वाली गतिविधियों को अंजाम देने योजना पर काम कर रहे थे.
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान, पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने कहा कि कथित मॉड्यूल में से एक दिल्ली के जंतर-मंतर गया था और वहां की रेकी (निगरानी) की थी. पाकिस्तान में बैठे उनके हैंडलर्स ने उन्हें पेट्रोल बम का इस्तेमाल करके शांति भंग करने का काम सौंपा था. हालांकि, भुल्लर ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तार आरोपी जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन में शामिल नहीं थे. लेकिन उनके वीडियो क्लिप को इस तरह पेश किया गया जिसे देखने सुनने वाले को लगे कि प्रदर्शनकारियों को गड़बड़ी फैलाने के लिए पाकिस्तान से दिशा निर्देश दिए जा रही हैं .
अब 6 अगस्त को पंजाब पुलिस ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर भुल्लर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के एडिट किए गए क्लिप भ्रामक कैप्शन के साथ फैलाए गए थे.
पंजाब पुलिस ने बयान में कहा कि कमिश्नर भुल्लर की बातों को संदर्भ से हटकर पेश किया गया और साथ ही यह भी दोहराया कि गिरफ्तार आरोपी विरोध-प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे. इसके ठीक उलट , जांचकर्ताओं का आरोप है कि मॉड्यूल ने उस जगह की रेकी की थी और पेट्रोल बम का इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी.
पंजाब पुलिस ने यह भी कहा कि भ्रामक सामग्री फैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
कुछ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कही गई बातों को ज्यादा सावधानी से कहा जाता तो इस विवाद से बचा जा सकता था.










