सेना के कॉलेज में लड़कियों के यौन शोषण की खौफनाक घटनाओं का बीबीसी पर खुलासा

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हैरोगेट स्थित आर्मी फाउंडेशन कॉलेज
हैरोगेट स्थित आर्मी फाउंडेशन कॉलेज

ब्रिटिश सेना के लिए जूनियर सैनिकों को तैयार करने वाले आर्मी फ़ाउंडेशन कॉलेज ( army foundation college) प्रशिक्षण कोर्स के लिए आने वाली लड़कियों के साथ हिंसक यौन उत्पीडन और छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर ब्रिटिश ब्राडकास्टिंग कारपोरेशन  ( british broadcasting corporation) के सनसनीखेज खुलासे के बाद इन घटनाओं की स्वतंत्र जांच करवाने की मांग उठ रही है .  वहीं पुलिस ने पीड़ितों से अपील की है कि वे उनसे सम्पर्क करें. कितना भी पुराना मामला हो , पुलिस उस पर कार्रवाई करेगी.

ब्रिटेन में  हैरोगेट स्थित या लगभग 80 साल पुराना सैन्य संस्थान है जहां 16 से साढ़े 17 साल तक की उम्र के लड़कों और लड़कियों को सैनिक बनने की ट्रेनिंग दी जाती है . यहां 49 हफ्ते और 23 हफ्ते वाले दो तरह के कोर्स होते हैं और ब्रिटेन में   19 साल की उम्र  से नीचे के रंगरूट तैयार करने का सबसे बड़ा सैन्य केंद्र  है .

यहा से कोर्स करने वाली चार युवतियों ने बीबीसी  को बताया कि टीनएजर्स के लिए बने आर्मी ट्रेनिंग कॉलेज में उनके साथ यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की गई – एक युवती ने तो यह भी कहा कि कई साथी जूनियर सैनिक  ने घंटों तक चले उसके साथ बलात्कार करते रहे .  यह  सभी युवतियां पिछले पांच सालों में  आर्मी फाउंडेशन कॉलेज (एएफसी – afc ) में थीं और उनका कहना है कि ये घटनाएं तब हुईं जब वे 17 साल की थीं.

इन युवतियों का कहना है कि कॉलेज में महिलाओं के प्रति नफ़रत और यौन हिंसा का खतरनाक माहौल है.  ये सभी पहली बार इस बारे में खुलकर बात कर रही हैं. एक युवती ने तो अपने साथ हुई यौन हिंसा का बेहद खौफनाक खुलासा करते हुए कहा कि उसकी हालत एक गोश्त के टुकड़े जैसी बना दी गई थी .

वहीं ब्रिटिश सेना के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा कि ये रिपोर्टें “बेहद परेशान करने वाली और गंभीर” हैं.

बीबीसी ने रिपोर्ट में कहा है कि  उनको यह भी पता चला है कि ‘फ्रीडम ऑफ़ इन्फॉर्मेशन’ ( freedom of information) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, नॉर्थ यॉर्कशायर पुलिस को जून तक के एक साल में कॉलेज से जुड़े यौन अपराधों की 16 रिपोर्टें मिली थीं. इन आपराधिक मामलों में  शरीर के निजी अंगों को दिखाने (एक्सपोज़र), छिपकर देखने (वॉयरिज़्म) और यौन उत्पीड़न के आरोप शामिल हैं. इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई कि क्या इनके कारण कोई कानूनी कार्रवाई या मुकदमा चलाया गया.

वहीं ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय (ministry of defence ) के आंकड़ों के मुताबिक़ , जनवरी 2018 और जून 2025 के बीच कॉलेज में अनुचित यौन व्यवहार की कुल 176 शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें से 32 आरोप स्थाई  कर्मचारियों के खिलाफ और 144 जूनियर सैनिकों के खिलाफ थीं. सेना के प्रवक्ता ने कहा, “हमारी सशस्त्र सेनाओं में अस्वीकार्य और आपराधिक व्यवहार के लिए बिल्कुल भी जगह नहीं है.”

क्या है आर्मी फाउंडेशन कॉलेज :
एएफसी की स्थापना 1947  में हुई थी .  यह 19 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सबसे बड़ा मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर है और सेना में भर्ती होने वाले सभी 16 साल के रिक्रूट्स (नए रंगरूट) यहीं आते हैं.  हैरोगेट स्थित इस सेंटर में कुल 889 सैनिकों में से अभी 70 महिला जूनियर सैनिक हैं. यह कॉलेज बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण देने और भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने में अहम भूमिका निभाता है. यह  कम उम्र के युवाओं के लिए सैन्य प्रशिक्षण, व्यक्तिगत विकास और शिक्षा का मिश्रण प्रदान करता है, जिससे उन्हें सशस्त्र बलों और सेना के बाद के जीवन में सफल होने के लिए ज़रूरी कौशल मिलते हैं.

स्वतंत्र जांच की मांग :
महिला रिक्रूट्स के खिलाफ रेप और यौन शोषण के आरोपों के बाद टीनएजर्स के लिए बने आर्मी ट्रेनिंग कॉलेज की स्वतंत्र जांच की मांग बढ़ रही है. कई राजनेताओं , सांसदों और सेना से संबंधित रहे लोगों ने ऐसी मांग की है .

पुलिस का बयान : 
हैरोगेट में आर्मी फ़ाउंडेशन कॉलेज से जुड़ी इस बीबीसी  रिपोर्ट पर नॉर्थ यॉर्कशायर पुलिस ( north yorkshire police)  ने बयान जारी किया है . नॉर्थ यॉर्कशायर पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा:

“हैरोगेट में आर्मी फ़ाउंडेशन कॉलेज में यौन दुर्व्यवहार की खबरें बहुत परेशान करने वाली हैं. नॉर्थ यॉर्कशायर पुलिस पीड़ितों और उनके परिवारों को संवेदनशीलता के साथ मदद देना जारी रखेगी और दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए हर संभव कोशिश करेगी. हालांकि, यौन अपराधों के पीड़ितों की ज़िंदगी भर पहचान गुप्त रखने की कानूनी ज़रूरत के कारण हम खास जाँच-पड़ताल के बारे में विस्तार से नहीं बता सकते, लेकिन यह ज़ोर देकर कहना ज़रूरी है कि नॉर्थ यॉर्कशायर पुलिस यौन दुर्व्यवहार को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी.”

पुलिस ने कहा , “हम पीड़ितों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे पुलिस के पास आएँ और आसानी से उपलब्ध विशेष मदद लें, चाहे अपराध कितने भी समय पहले क्यों न हुआ हो.”