चंडीगढ़ पुलिस ने सॉफ्टवेयर से तबादले करने में अब दिखाई सख्ती

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चंडीगढ़ पुलिस

सॉफ्टवेयर के जरिए चंडीगढ़ पुलिस में तबादले किये जाने की रुकी प्रक्रिया देर से ही सही लेकिन अब शुरू की जा रही है. पुलिस ने तकरीबन डेढ़ साल पहले आईजी तेजिंदर लूथरा के समय में जो साफ्टवेयर विकसित करके जितने तबादले किये उनमें से तकरीबन 50 फीसदी से ज्यादा मामलों में तबादले अभी तक प्रभावी नहीं हुए थे जिन पर अमल करने की कवायद अब शुरू की जा रही है.

चंडीगढ़ संघशासित क्षेत्र पुलिस के पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) मनोज मीना ने बृहस्पतिवार को आदेश जारी किये हैं जिनमें कहा गया है कि ऑटोमेटिक पुलिस पर्सनल प्लेसमेंट सॉफ्टवेयर के जरिये जिन पुलिसकर्मियों के तबादले हुए हैं उन्हें तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए. यही नहीं इन तबादलों के प्रभावी नहीं किये जाने पर उस मामले में पुलिसकर्मी की तनख्वाह तक जारी करने से रोक दी जायेगी. ये सख्ती चंडीगढ़ के प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल बी पी सिंह बदनोर के दफ्तर से आये नाराज़गी भरे संकेतों के बाद दिखाई जा रही है.

असल में ऑटोमेटिक पुलिस पर्सनल प्लेसमेंट नाम के इस सॉफ्टवेयर का लांच पुलिस ने 22 नवंबर 2018 को प्रशासक श्री बदनोर के हाथों से करवाया था.

इस सॉफ्टवेयर के मुताबिक़ हरेक पुलिसकर्मी का ज्यादा से ज्यादा दो साल में तबादले का नियम लागू किये जाने का प्रावधान है. सॉफ्टवेयर के उद्घाटन के वक्त 2595 पुलिसकर्मियों का तबादला किया गया लेकिन असल में सिर्फ 1491 पुलिसकर्मी ही स्थानांतरित किये गये और उनमें से भी 62 के स्थानांतरण तो रद करने के आदेश भी हो गये. यही नहीं, उनमें से 454 पुलिसकर्मियों को तो उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने ही रिलीव नहीं किया. 34 पुलिसकर्मी तो ट्रांसफर के इंतज़ार में रिटायर हो चुके थे और 4 का तो देहांत भी हो गया था.

ऐसे हालात में पुलिस इस्टेब्लिशमेंट बोर्ड के हाई टेक और पारदर्शिता वाले काम की प्रक्रिया के दावे की आलोचना होने लगी थी और यहाँ तक कहा जाने लगा था कि इस मामले में प्रशासक श्री बदनोर को गुमराह किया गया. राजभवन से नाराज़गी भरे संदेशों के बाद अचानक इस बारे में नये आदेश जारी किये गये.

(दैनिक भास्कर, चंडीगढ़ संस्करण से ली गई जानकारी के लिए आभार)

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