सीआरपीएफ के शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार को दूसरा सर्वोच्च पुरस्कार कीर्ति चक्र

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शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार
शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार (इनसेट में) की विधवा श्रीमती नेहा त्रिपाठी ने राष्ट्रपति से शांति काल में बहादुरी का दूसरा सर्वोच्च पुरस्कार कीर्ति चक्र प्राप्त किया. (Photo/ANI)

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने सोमवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF-सीआरपीएफ) अधिकारियों और जवान को अद्वितीय अनमोल बहादुरी के लिये सम्मानित किया. श्री कोविंद ने नई दिल्ली में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार को कीर्ति चक्र और सहायक कमांडेंट विकास जाखड़ व सब इंस्पेक्टर मोहम्मद रियाज आलम अंसारी को शौर्य चक्र से सम्मानित किया. समारोह में शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार की विधवा श्रीमती नेहा त्रिपाठी ने राष्ट्रपति से शांति काल में बहादुरी का दूसरा सर्वोच्च पुरस्कार कीर्ति चक्र प्राप्त किया.

  • आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से अपने पति का कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) ग्रहण करने के बाद नेहा ने कहा, “मुझे गर्व है कि उनकी बहादुरी को आज सम्मान मिला. इस अवार्ड की घोषणा के बाद से ही मैं इसे प्राप्त करने को लेकर रोमांचित थी. उन्हें (अपने पति के लिये) सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि मैं अपनी बेटी को एक अच्छी इंसान बनाऊं.”

पिछले साल 15 अगस्त को जब देश आजादी का जश्न मना रहा था ठीक उसी समय तिरंगा फहराने के बाद जम्मू-कश्मीर के नौहट्टा में सीआरपीएफ शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार आतंकियों से लोहा ले रहे थे. इस एनकाउंटर में जांबाज प्रमोद कुमार शहीद हो गये थे. प्रमोद उन जांबाज अफसरों में थे जो आतंकियों के खिलाफ या अन्य मौकों पर सर्च आपरेशन में हमेशा आगे रहते थे. कमांडेंट प्रमोद कुमार सीआरपीएफ की 49वीं बटालियन के इंचार्ज थे.

प्रमोद कुमार झारखंड के जामताड़ा जिले के रहने वाले थे. वह अपने घर में इकलौते कमाने वाले थे. उनके परिवार में पत्नी नेहा त्रिपाठी, पिता और 7 साल की बेटी है.

विकास जाखड़
सहायक कमांडेंट विकास जाखड़ (Photo/ANI)

दूसरी तरफ सहायक कमांडेंट विकास जाखड़ और सब इंस्पेक्टर मोहम्मद रियाज आलम अंसारी ने भी प्रमोद कुमार की तरह देशभक्ति का उदाहरण पेश करते हुए अपनी जान की परवाह किये बगैर झारखंड के लातेहार में माओवादियों से मोर्चा लिया. यह माओवादियों का गढ है. यह 2016 के नवम्बर महीने की 22 और 23 तारीख थी. विकास जाखड़ और मोहम्मद रियाज 209 कोबरा बटालियन और राज्य पुलिस की स्पेशल टीम के सदस्य थे. यहाँ नक्सलियों को खत्म करना था. इन दोनों अधिकारियों ने अतुलनीय शौर्य का प्रदर्शन करते हुए नदी पार कर नक्सलियों से निबटने के लिये मोर्चा सम्भाला वह भी गोलियों की बौछार के बीच. अफसरों की रणनीति, साहस का ही नतीजा था कि छह नक्सली मार गिराए गये. इनके पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया गया.

मोहम्मद रियाज आलम अंसारी
सब इंस्पेक्टर मोहम्मद रियाज आलम अंसारी