सीआरपीएफ जवान की सूझबूझ – इलाज करके अधिकारी की जान बचाई

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चुनाव अधिकारी अहसान उल हक को सीपीआर देते सीआरपीएफ के जवान सुरेंदर कुमार उनका साथी फोन पर एम्बुलेंस की व्यवस्था करने में जुटा है.

कश्मीर में चुनाव की ड्यूटी पर तैनात एक अधिकारी को दिल का दौरा पड़ने पर उनकी जान बचाने में जूझता केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ-CRPF) का एक जवान तब तक वैसे ही इलाज करता रहा जैसे जैसे फोन पर डॉक्टर उसे निर्देश देता रहा. सुरेंदर कुमार नाम का ये जवान सीआरपीएफ की 28वीं बटालियन का सिपाही है जो श्रीनगर में लोकसभा चुनाव में सुरक्षा ड्यूटी पर था.

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यही हैं सीआरपीएफ के सिपाही सुरेंदर कुमार.

ये घटना बृहस्पतिवार की बुचपुरा के राजकीय कन्या विद्यालय की है जब नौ बजे के आसपास लोकसभा के लिये मतदान चल रहा था. तभी वहां चुनाव अधिकारी अहसान उल हक की तबीयत बिगड़ी. उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया लेकिन कुछ फर्क न पड़ा.

सब तरफ से मेडिकल सहायता मांगने की कोशिश नाकाम रहने पर, वहां सुरक्षा बन्दोबस्त में तैनात जवानों में से एक सीआरपीएफ के सिपाही सुरेंदर कुमार ने इलाज की कमान भी खुद सम्भाल ली. सुरेंदर को रेड क्रॉस से मिली प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग याद आ गई.

सीआरपीएफ के सिपाही सुरेंदर कुमार ने बेहोश चुनाव अधिकारी अहसान उल हक़ को के सीने को कम्प्रेस करना और अपने मुंह से उनके मुंह में सांस देने की प्रक्रिया (cardiopulmonary resuscitation – CPR) शुरू कर दी. सुरेंदर ने एक के बाद एक 30 बार ऐसा किया और तब तक चुनाव अधिकारी को सीपीआर देता रहा जब तक कि वहां एम्बुलेंस नहीं पहुँच गई.

इस दौरान वहां से डॉक्टरों, अस्पतालों और हेल्पलाइन को भी सम्पर्क करने की कोशिशें की गईं लेकिन कहीं से भी मदद नहीं मिल पा रही थी. इसी दौरान सिपाही सुरेंदर कुमार ने डॉक्टर सुनीम खान को फोन किया जो उनकी बटालियन में सीनियर भी हैं और जिनकी गिनती सबसे ज्यादा मददगार डॉक्टरों में की जाती है.

चुनाव अधिकारी को सीपीआर देने के दौरान सीआरपीएफ जवान सुरेंदर डॉक्टर सुनीम खान से निर्देश लेकर वैसा ही करता रहा क्यूँकि हालात से समझ आ गया था कि अधिकारी को दिल का दौरा पड़ा है. ये सिलसिला तकरीबन 50 मिनट चला. दूसरी तरफ डॉक्टर सुनीम खान ने शेर-ए-कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइन्सेज़ (SKIMS) को सूचना देने के साथ श्रीनगर के उपायुक्त ( डिप्टी कमिश्नर) शाहिद चौधरी को भी एम्बुलेंस के लिए फोन कर दिया.

चुनाव अधिकारी अहसान उल हक़ को एम्बुलेंस के जरिये शेर-ए-कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइन्सेज़ पहुँचाया गया जहां उनकी जान बच गई. इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि ये सीआरपीएफ के जवान सुरेंदर कुमार और डॉक्टर सुनीम खान की सूझबूझ से ही मुमकिन हो सका.

सिपाही सुरेंदर कुमार :

36 वर्षीय सिपाही सुरेंदर कुमार हरियाणा के पानीपत का रहना वाला है और वो लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र के मिशन पर भी जा चुका है. आतंकवाद से ग्रस्त भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर में ये सुरेंदर की दूसरी तैनाती है.

डा. सुनीम खान :

वहीं 37 वर्षीय जोशीले डाक्टर सुनीम खान खुद भी 2008 से शेर-ए-कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइन्सेज़ में काम कर रहे थे. 2010 में सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष और झड़पों में जब बड़ी तादाद में घायल युवकों को अस्पताल लाया गया था तो कइयों की जान उन्होंने बचाई थी. ये चौथा ऐसा केस है जब फोन पर निर्देश देकर डॉक्टर खान ने किसी का इलाज करवाया और जान बचाई.

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