जम्मू एयरफोर्स स्टेशन में आतंकवादियों का ड्रोन से हमला, दो धमाके किये

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जम्मू एयरफोर्स स्टेशन
जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर बम निरोधक दस्ता.

भारतीय वायु सेना के जम्मू स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर विस्फोटकों से हमला किया गया. इस हमले जो बम गिराए गये थे, उनमें से एक के कारण इमारत के कुछ हिस्से को नुकसान भी पहुंचा है. हालांकि दोनों बम लो इंटेंसिटी (low intensity) के बताये गए हैं लेकिन जिस तरह से अति सुरक्षित समझे जाने वाले क्षेत्र में घुसपैठ करके उसे निशाना बनाया गया वह एक नई चुनौती है. बताया जा रहा है कि ये आतंकवादी हमला था और इसमें बम गिराने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया.

भारत में इस तरह से अपने आप में ये पहली ऐसी घटना है जिसमें आतंकवादियों ने सेना के विरुद्ध ड्रोन का इस्तेमाल किया. वैसे इस हमले में किसी तरह के बड़े जानी नुकसान की खबर नहीं है लेकिन 2 वायुसैनिकों के मामूली रूप से घायल होने की सूचना ज़रूर है. हमले की जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए -NIA) के जांचकर्ताओं का दल पहुंच चुका है.

जम्मू एयरफोर्स स्टेशन
जम्मू एयरफोर्स स्टेशन की बम धमाके से उडी छत.

भारतीय वायु सेना के जम्मू स्थित इस ठिकाने पर दो धमाकों की आवाज शनिवार की रात 2 बजे के आसपास सुनी गई. पांच मिनट के अंतराल पर ये आवाजें सुनी गई थीं. सूचना ये भी है इस हमले के लिए चार बम वहां फेंके गये थे जिनमें से 2 ही फटे. एक बम से इमारत की छत में बड़ा सुराख हुआ और दूसरा खुले इलाके में फटा. ये इमारत हेलीकॉप्टर हैंगर के आस-पास है. ये विस्फोटक (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस -IED ) ऊँचाई से गिराए गये थे. अंदाजा है कि हमलावरों ने इसके लिए रिमोट संचालित ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया. जम्मू कश्मीर में पहले से ही सुरक्षा एजेंसियां और उनके संस्थान आतंकवादियों के निशाने पर रहे हैं लेकिन किसी वायु सैनिक अड्डे पर ड्रोन से इस तरह के हमले की ये अपने आप में हैरान कर देने वाली और बेहद चिंता पैदा कर देने वाली घटना है.

अति सुरक्षित सैन्य क्षेत्र में आतंकवादियों का ऐसा हमला करने में कामयाब होना सुरक्षा में बड़ी चूक तो है ही, ड्रोन को खोजने और इसे लेकर सतर्क करने की तकनीक का न होना भी एक चुनौती है. हालांकि अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि इस हमले में इस्तेमाल ड्रोन पाकिस्तान के बने हुए थे. एक अंदाजा ये भी है कि हमलावरों के निशाने पर यहाँ स्थित विमान ईंधन टैंक रहा होगा लेकिन नेटवर्क की कनेक्टिविटी में कमी के कारण यहाँ कुछ जगह जीपीएस काम नहीं करता इसलिए बड़ा नुकसान होने से बच गया.