ऑपरेशन सिन्दूर में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के नाम का खुलासा , देरी पर विवाद

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नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक के दीवार जहां शहीद सैनिकों के नाम सम्मानपूर्वक अंकित किए गए हैं .
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक के दीवार जहां शहीद सैनिकों के नाम सम्मानपूर्वक अंकित किए गए हैं .
भारत में  विपक्षी नेताओं ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर संसद में झूठ बोलने और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया.  यह आरोप तब लगाया गया जब सरकार ने शुक्रवार को उन छह सैनिकों के नाम जारी उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर’ ( operation sindoor)के दौरान प्राण गंवाए थे.

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’  के दौरान जान गंवाने वाले छह सैनिकों के नाम जारी किए. इन नामों को राष्ट्रीय समर स्मारक ( national war memorial ) की दीवार  पर अंकित किया गया और ‘रोल ऑफ़ ऑनर’ में शामिल किया गया. इनमें  भारतीय सेना के पांच जवान – सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र), लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मूड मुरली नायक और हवलदार सुनील कुमार सिंह – और भारतीय वायु सेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं.

22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के  पहलगाम में किए गए आतंकी हमले में 26 लोगों की हत्या के बाद भारतीय सेना  ने 7 मई की तड़के ऑपरेशन सिन्दूर छेड़ा था. इसके बाद पाकिस्तान के साथ चार दिन लड़ाई चली. लड़ाई  में मारे गए सैनिकों की पहचान के बारे में केंद्र सरकार का यह पहला आधिकारिक खुलासा था.  वैसे राजनाथ सिंह ने एक साल पहले संसद में दावा किया था कि ऑपरेशन के दौरान “किसी भी सैनिक को कोई क्षति  नहीं पहुंची “.

संसद में राजनाथ सिंह के भाषण का अपने एक्स (X ) हैंडल पर वीडियो पोस्ट करते हुए, आम आदमी पार्टी ‘आप’ (AAP) ने आरोप लगाया कि बीजेपी, जो “शहीदों के ताबूतों पर भी घोटाला करती है”, ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हुए नुकसान के बारे में जनता को गुमराह किया.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि इस अंतर के केवल दो ही कारण हो सकते हैं. उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर आरोप लगाया कि या तो उन्हें संसद में बोलते समय उन छह सैनिकों की मौत के बारे में जानकारी नहीं थी (जिससे उनके मंत्रालय के कामकाज को लेकर उनकी जानकारी और समझ पर सवाल उठते हैं), या फिर उन्हें सच्चाई पता थी और उन्होंने जानबूझकर इसे छिपाने की कोशिश की.

खेड़ा ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, “चाहे जो भी सच हो, कुछ बातें नहीं बदलतीं – हमारे छह बहादुर सैनिकों ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया लेकिन उनके बलिदान को छिपाया गया. उन्हें वह सम्मान और पहचान नहीं मिली जिसके वे हकदार थे और उनके परिवारों को उस पारदर्शिता से वंचित रखा गया जिसकी उम्मीद करने का उन्हें पूरा अधिकार था.”

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य  सागरिका घोष ने इस घटनाक्रम को “बेहद गंभीर” बताया और सवाल किया कि अगर छह सैनिक मारे गए थे, तो रक्षा मंत्री ने संसद में यह कैसे कह दिया कि किसी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुँचा.

घोष ने X पर लिखा, “संसद सच जानने की हकदार है. हमारे शहीदों के परिवार सच जानने के हकदार हैं. भारत सच जानने का हकदार है.”