तपन कुमार डेका ( tapan kumar deka ) हिमाचल प्रदेश कैडर के 1988 बैच के आईपीएस हैं और उनको जून 2022 इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर के पद पर काम कर रहे हैं. केंद्र सरकार ने उनका कार्यकाल पहले दो बार बढ़ाया है – पहली बार जून 2024 में और फिर जून 2025 में – और हर बार कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया. मीडिया में खबरें छप रहीं थी कि उन्हें फिर से एक साल का सेवा विस्तार दिया जा सकता है . लेकिन सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति के फैसले ने इन खबरों को गलत साबित किया.
कैबिनेट की नियुक्ति समिति (appointment committee of cabinet) की तरफ से मंज़ूर नियुक्ति आदेश के अनुसार, दीक्षित – जो अभी इंटेलिजेंस ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे हैं – को यह शीर्ष पद संभालने के लिए सेवा विस्तार भी दिया गया है. 59 वर्षीय महेश दीक्षित मौजूदा डायरेक्टर तपन कुमार डेका की जगह लेंगे और पद संभालने की तारीख से दो साल तक इस पद पर रहेंगे. महेश दीक्षित आंध्र प्रदेश कैडर के आईपीएस थे लेकिन राज्य का बंटवारा होने के बाद उनको तेलंगाना कैडर आवंटित हुआ .
आईपीएस महेश दीक्षित के पास ख़ुफ़िया सूचनाएं जुटाने, आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन करने और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन का दशकों का अनुभव है. सुरक्षा हलकों में उन्हें हाल के वर्षों में सरकार द्वारा चलाए गए कई संवेदनशील इंटेलिजेंस ऑपरेशन के मुख्य सूत्रधारों में से एक माना जाता है.
उनके करियर के सबसे अहम पड़ावों में से एक अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने से पहले की तैयारी में उनकी भूमिका थी. घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि दीक्षित ने इस ऐतिहासिक कदम के सुरक्षा प्रभावों का आकलन करने और बदलाव के दौर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई. उन दिनों वे श्रीनगर में तैनात थे.
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किए जाने के बाद, दीक्षित को इस क्षेत्र में अहम इंटेलिजेंस जिम्मेदारी सौंपी गईं. अधिकारियों का मानना है कि उन्होंने राजनीतिक रूप से संवेदनशील दौर में जनता का भरोसा बहाल करने में मदद की और साथ ही आतंकवाद और अलगाववादी तत्वों से पैदा होने वाली सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में भी योगदान दिया.













