मामले की दर्ज प्राथमिकी ( एफआईआर ) में भारतीय सेना की 17 राष्ट्रीय राइफल्स के कमान अधिकारी कर्नल एन अरुण गांधी ( col n arun gandhi) के अलावा मेजर विकास शर्मा, सूबेदार शंकर गुर्खे, राज कुमार, सिपाही राहुल कुमार, अनूप सिंह, ओंकार इंगले और 30-40 अज्ञात सैनिकों सेना को नामजद किया गया है . इस एफ आई आर ( FIR) में बताया गया है कि यह हमले की यह घटना बुधवार दोपहर की है और जांच के दौरान सेना के उन अज्ञात जवानों की पहचान की जाएगी.
आरोपियों पर गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने, दंगा करने, घर में घुसने/आपराधिक रूप से घुसपैठ करने, जानबूझकर गंभीर चोट पहुँचाने, सरकारी ड्यूटी के दौरान लोक सेवकों पर हमला करने, हत्या की कोशिश, आपराधिक धमकी, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और भारतीय न्याय संहिता के तहत अन्य संबंधित अपराधों के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाव अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों के आरोप लगाए गए हैं.
इस बीच, सेना के जन सम्पर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बरतवाल, ने एक बयान जारी कर कहा, “मामले की जांच उचित संस्थागत तंत्र के माध्यम से की जा रही है. भारतीय सेना कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगी. संयुक्त जांच के नतीजों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी. इस चरण में, जब जांच चल रही है, आगे कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी.”
‘साजिश और आपराधिक हमला’
बताया जाता है कि टकराव तब शुरू हुआ जब किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर का काफिला ज़िले के एक संकरे रास्ते से गुज़र रहा था. सामने से आ रही सेना की एक गाड़ी को किनारे हटने के लिए कहा गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच बहस हो गई. इसके बाद, पुलिस सेना की गाड़ी को स्थानीय पुलिस स्टेशन ले गई और कथित तौर पर सेना के जवानों ने स्टेशन परिसर पर हमला कर दिया.
सेना ने कहा कि मामले की जांच उचित संस्थागत तंत्र के माध्यम से की जा रही है और भरोसा दिलाया कि संयुक्त जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी.
वहीं अधिकारियों का कहना है कि यह घटना तब हुई जब पुलिस की एक टीम ने कथित तौर पर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए सेना के एक अधिकारी की निजी गाड़ी को रोका और ज़ब्त कर लिया. अथोली पुलिस स्टेशन में दर्ज एफ आई आर के मुताबिक, यह घटना बुधवार को हुई जब स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO), इंस्पेक्टर अमृत कटोच , डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में पड्डर ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर के ऑफिस में एक मीटिंग के लिए गए हुए थे.
अपनी शिकायत में कटोच ने बताया कि उन्हें एक कॉल आया जिसमें उन्हें “आपराधिक साजिश” और पुलिस स्टेशन के अंदर 17 राष्ट्रीय राइफल्स (RR) के कमांडिंग ऑफिसर एन. अरुण गांधी के सीधे निर्देशों पर हुए हिंसक हमले के बारे में जानकारी दी गई.
मेजर विकास शर्मा और नायब सूबेदार शंकर गुर्खे की अगुवाई में 17 RR, कैंप किजयी के करीब 30 से 40 जवान पुलिस स्टेशन के मुख्य गेट और चारदीवारी फांदकर अन्दर घुसे . उनके पास लाठियां, लोहे की छड़ें और अन्य हथियार थे. एस एच ओ कटोच थाने पहुंचे . उनका आरोप है कि मेजर शर्मा ने उनके साथ मारपीट की. एफआईआर के मुताबिक़ सेना के जवानों ने कथित तौर पर कोटाच की वर्दी फाड़ दी और यही नहीं मौके पर पहुंचे सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) विजय कुमार भगत के साथ भी मारपीट की.
अमृत कटोच ने कहा कि स्पेशल पुलिस ऑफिसर सुरेश कुमार की गर्दन पर सर्विस राइफल के बट से वार किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं. उनका कहना है कि इस “बिना उकसावे के किए गए हमले” में ड्यूटी पर मौजूद कई अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. एफ आई आर में यह भी कहा गया है कि सेना के जवानों ने थाने के अंदर किश्तवाड़ के असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (ARTO) और उनके निजी सुरक्षा अधिकारियों के साथ मारपीट की.












