Home सेना भारतीय नौसेना के पोत उदयगिरि और कवरत्ती वियतनाम से रवाना हुए

भारतीय नौसेना के पोत उदयगिरि और कवरत्ती वियतनाम से रवाना हुए

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वियतनाम से रवानगी के समय भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद ने वियतनाम की नौसेना के जवानों से मुलाकात की
वियतनाम से रवानगी के समय भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद ने वियतनाम की नौसेना के जवानों से मुलाकात की
भारतीय नौसेना के पोत उदयगिरि और कवरत्ती, पूर्वी बेड़े  के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद  की  कमान के तहत, दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में आगे की तैनाती के लिए अपनी नौसैनिक यात्रा पूरी करने के बाद 24 जून 2026 को वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी से रवाना हुए.

रियर एडमिरल आनन्द  ने हो ची मिन्ह सिटी पीपुल्स कमेटी और वियतनामी पीपुल्स नेवी के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और समुद्री सहयोग, पेशेवर सहभागिता व क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा पर विचारों का आदान-प्रदान किया. इस यात्रा के दौरान वे  राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की प्रतिमा पर माल्यार्पण समारोह में  भी शामिल हुए. उनके साथ आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस कवरत्ती के कमांडिंग अधिकारी भी थे .

रक्षा मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़ इस बंदरगाह प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना और वियतनाम पीपुल्स नेवी के कर्मियों ने कई तरह के पेशेवर वार्ताओं और द्विपक्षीय अभ्यासों में हिस्सा  लिया. इसमें दोनों नौ सेनाओं को परिचालन अनुभवों को साझा करने और समुद्री सुरक्षा व सुरक्षित समुद्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया. 12 वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आईएनएस कवरत्ती पर एक संयुक्त योग सत्र भी आयोजित किया गया था.

इस यात्रा के दौरान आईएनएस उदयगिरि पर वियतनाम में भारत के राजदूत के साथ-साथ वियतनाम पीपुल्स नेवी के प्रतिनिधियों, राजनयिक समुदाय के सदस्यों और अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ मेजबानी की गई.

विज्ञप्ति में कहा गया , ” भारत और वियतनाम आपसी विश्वास, समान हितों और दोनों देशों के लोगों के बीच घनिष्ठ संबंधों पर आधारित एक ‘उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ साझा करते हैं. यह बंदरगाह यात्रा भारत सरकार की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ तथा महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) के विजन को दोहराती है और क्षेत्र के मित्र देशों के साथ रचनात्मक समुद्री सहयोग और सहभागिता एवं सहयोग के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है.”