मृदुल स्वभाव के कुशल पुलिस अधिकारी विनोद शर्मा की असमय मृत्यु से जिले के पुलिसकर्मी शोकाकुल हैं . पुलिस सम्मान के साथ एसआई विनोद शर्मा का अंतिम संस्कार किया गया . उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने एसआई विनोद शर्मा की मृत्यु पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं .

2016 में उत्तराखंड पुलिस ( uttarakhand police) में सब इंस्पेक्टर बनने से पहले विनोद शर्मा भारतीय सेना ( indian army) में 15 साल की सेवा भी कर चुके थे. वे 10 गढ़वाल राइफल्स में थे . वे 2017 से टिहरी जिले के अलग-अलग थाने-चौकियों में तैनात रहे. उन्होंने ढालवाला और कैलाश गेट चौकी प्रभारी के रूप में भी काम किया . करीब छह माह से वह शिवपुरी चौकी में तैनात थे. जब उनका शव पोस्टमार्टम के लिए ऋषिकेश स्थित एम्स लाया गया तो पिता मुलकराज शर्मा फफक पड़े.
विनोद शर्मा का पार्थिव शरीर जब उनके गांव घमंडपुर रानीपोखरी लाया गया तो परिवार में कोहराम सा मच गया. पत्नी, दोनों बेटियों, माता-पिता शव को देखकर बिलख पड़े. बड़ी बेटी 15 साल की और छोटी 13 साल की है . विनोद शर्मा के पार्थिव शरीर को पूर्णानंद घाट पर उनके छोटे भाई आशीष शर्मा ने मुखाग्नि दी. आशीष भी उत्तराखंड पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में मुनि की रेती थाना क्षेत्र में ही कैलाश गेट पुलिस चौकी के प्रभारी हैं .
विनोद शर्मा जिंदादिल व नेक इंसान थे. अपनी विनम्रता, कर्तव्यनिष्ठा और मृदुभाषी स्वभाव के कारण वह पुलिस कर्मियों और आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय भी थे.
कैसे हुआ हादसा :
हादसे के बारे काफी देर से पता चल सका. स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे. टीम ने खाई में उतरकर रेस्क्यू अभियान चलाया और वाहन तक पहुंची और विनोद शर्मा को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.












