रिटायर हो रहे सेना प्रमुख बाजवा और उनके परिवार की अरबों की जायदाद की ये है कहानी

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जनरल कमर जावेद बाजवा
जनरल कमर जावेद बाजवा

पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष के ओहदे से रिटायर्मेंट से एक दिन पहले वहां की सेना ने जनरल कमर जावेद बाजवा के परिवार की बेशुमार जायदाद को लेकर उठे सवालों की मीडिया रिपोर्ट्स पर हफ्ते भर से अख्तियार की चुप्पी आखिर तोड़ी. सेना ने जनरल बाजवा के सेना प्रमुख बनने के बाद उनके परिवार व रिश्तेदारों के पास अचानक आई जमीन जायदाद के बारे में वेबसाइट फेक्ट फोकस की रिपोर्ट भ्रामक , गलत और झूठा बताया है . वहीं जनरल बाजवा और उनके परिवार की आमदनी और टैक्स रिकॉर्ड लीक करने में शामिल दो अधिकारियों को मुअत्तल कर डाला है . इस वेबसाइट ने ये जायदाद 12 .7 अरब रुपये की बताई थी.

जनरल बाजवा को 2016 में तीन साल तक के लिए पाकिस्तान का सेनाध्यक्ष बनाया गया था. 2019 उनका ये कार्यकाल 3 साल का और बढ़ाकर उनको इसी ओहदे पर सेव विस्तार दे दिया गया . जनरल बाजवा की रिटायर्मेंट की तारीख 29 नवंबर 2022 है और उनके स्थान पर जनरल आसिम मुनीर को पाकिस्तान का आर्मी चीफ बनाने का फैसला प्रधानमन्त्री शहबाज़ शरीफ ने 24 नवंबर को लिया था. तब तक फैक्ट फोकस की रिपोर्ट पब्लिश हो चुकी थी. सरकार ने इस मामले में जांच कराने का भी ऐलान कर दिया था.

सेना का बयान :

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग इंटर सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर – ispr ) ने 27 नवंबर 2022 को जारी किये बयान में जनरल बाजवा और उनके परिवार के बारे , मीडिया और सोशल मीडिया पर , दी गई जानकारियों को ‘ बदनीयत मुहिम ‘ करार दिया है. बयान में कहा गया है कि जनरल बाजवा और उनके परिवार वालों की सम्पत्तियों के बारे में भ्रामक और बढ़ा चढ़ाकर महज़ अंदाज़े के आधार पर खबरें फैलाई गई. बयान में कहा गया है कि जनरल बाजवा के 6 साल के कार्यकाल के दौरान उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर जायदाद बनाने के दावे ‘पूर्णत गलत ‘ और ‘ कोरा झूठ ‘ है. बयान में कहा गया है कि कुछ गुटों ने भ्रम फैलाने के मकसद से बेहद शातिराना और बेईमान तरीके से जनरल बाजवा की पुत्रवधु के पिता की जायदाद को उनकी ( जनरल बाजवा और उनके परिवार की ) जायदाद से जोड़ दिया है . बयान में ये भी कहा गया है कि आर्मी चीफ और उनका परिवार नियमित रूप से टैक्स रिटर्न भरता है और वे कर विभाग के प्रति जवाबदेह हैं . इसमें ये भी जोड़ा गया कि जनरल बाजवा और उनके परिवार ने फेडरल बोर्ड ऑफ़ रेवन्यू ( एफबीआर – fbr ) में घोषित की है.

फैक्ट फोकस की रिपोर्ट :

वेबसाइट फैक्ट फोकस ( fact focus) की रिपोर्ट में सरकारी राजस्व रिकॉर्ड और टैक्स विभाग के रिकार्ड्स के आधार पर मिली सूचनाओं के आधार पर दावा किया गया है जब कमर अहमद बाजवा लेफ्टिनेंट जनरल बने तब तक उनकी पत्नी आयशा अहमद टैक्स तक फाइल नहीं करती थीं . जनरल बाजवा के लाहौर निवासी करीबी दोस्त साबिर मिठु हमीद एक अच्छे व्यवसायी ज़रूर थे लेकिन अरबपति नहीं थे . जैसे ही ये दो परिवार एक होने के लिए आगे बढ़े वैसे ही अचानक सब कुछ बदल गया . सिर्फ 6 साल में दोनों परिवार अरब पति हो गए , अंतर्राष्ट्रीय कारोबार करने लगे , विदेश में भी कई सम्पत्तियां खरीद लीं , विदेश में पूंजी ट्रांसफर करने लगे , कई कमर्शियल प्लाज़ा के मालिक बन बैठे , कमर्शियल प्लाट , इस्लामाबाद और कराची में विशाल फार्म हाउस , लाहौर में बड़ी सम्पत्तियों में निवेश के अलावा अन्य भी काफी कुछ.

फैक्ट फोकस का कहना है कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से पहले उसने पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग इंटर सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक ( dg – ispr ) पाकिस्तान सेना के मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार से तीन लगातार सम्पर्क साधने की कोशिश की लेकिन वे उनके संवाददाता के फोन काल्स पर जवाब देना नज़रन्दाज़ करते रहे . साबिर हमीद ( मिठु ) ने भी फैक्ट फोकस की फोन कॉल्स को या सवालों को नज़रन्दाज़ किया. वेबसाइट ने ये दावा भी किया कि अगर जनरल बाजवा और साबिर हमीद उसके सवालों का बिन्दुवार जवाब देंगे तो उनके पूर्ण पक्ष को भी प्रकाशित किया जाएगा .

जनरल बाजवा की स्टेटमेंट से शुरुआत :

शुरुआत 30 नवंबर 2013 में जनरल बाजवा की तरफ से दायर की गई रिटर्न और वेल्थ स्टेटमेंट से होती है. पाकिस्तान के चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ बनने के बाद उन्होंने 4 साल के अंतराल के बाद 2017 यानि एक ही साल में वेल्थ स्टेटमेंट में तीन मौके पर बार बदलाव किया . ये तारीखें 17 सितंबर , 2 नवंबर और 8 नवंबर 2017 थीं. हर दफा उन्हों 2013 की इस स्टेटमेंट में बदलाव करते हुए वे पहले खरीदे गए प्लाट को इसमें जोड़ना भूल गए थे. यहां वेबसाइट ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कैसे हुआ कि जनरल बाजवा लगातार 4 साल तक ऐसे खरीदे गए प्लॉट्स को तब तक भूलते रहे जब तक सेना प्रमुख नहीं बने.

जीरो से अरबपति बनी यूं पत्नी :

जनरल बाजवा की पत्नी आयशा अमज़द 10 अगस्त 2016 को करदाता के तौर पर तब पंजीकृत हुई जब उनके पति का नाम नवंबर 2016 में सेना प्रमुख के ओहदे पर नियुक्ति के लिए एक पात्र उम्मीदवार के रूप में विचारधीन होना था . 2016 की वार्षिक रिटर्न उनका अब तक का एफ बी आर के समक्ष दिया पहला ब्यौरा था जो मूल रूप से 28 अक्टूबर 2016 को जमा हुआ था. यानि जनरल बाजवा के सेना प्रमुख बनने से 3 सप्ताह पहले. 2016 की घोषणा में आयशा अमजद ने ‘ अन्य संपत्तियों ‘ के खाने में 8 संख्या बताई लेकिन संपत्तियों का ब्यौरा नहीं दिया . बहरहाल , ये वेल्थ स्टेटमेंट ( wealth statement ) 17 अप्रैल 20 2018 को बदली गई जब जनरल बाजवा आर्मी चीफ बन चुके थे . आयशा अमज़द ने इससे पहले के वित्त बर्ष 2015 में अपनी सम्पत्तियों की वैल्यू शून्य घोषित की थी.

वेब साइट ने आयशा अमजद की संपत्ति रिटर्न का साल दर साल का ब्यौरा भी टैक्स विभाग की तरफ से जारी सर्टिफिकेट के पीडीएफ फाइल के तौर पर अटैच किया है . आयशा के नाम पर विभिन्न शहरों में खरीदी गई 11 जायदाद का विवरण है . इनके अलावा 160 मिलियन रूपये की नकदी , बांड्स , जेवर , बैंक खातों में जमा धन और विदेशी करेंसी है . वेब साइट के मुताबिक़ उन आयशा अमजद की 6 साल में कुल मिलाकर 2 . 2 अरब की संपत्ति ( घोषित व ज्ञात ) संपत्ति बन गई जिनकी 2016 में एक भी जायदाद नहीं थी. जबकि इस संपत्ति में रिहायशी , कमर्शियल प्लॉट्स शामिल नहीं हैं और न ही वो मकान शामिल है जो सेना ने उनके पति को दिया है .