87वें वायु सेना दिवस का समारोह, विंग कमांडर अभिनन्दन ने मिग उड़ाया

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भारतीय वायु सेना की 87 वीं वर्षगाँठ पर वीर चक्र से सम्मानित विंग कमान्डर अभिनन्दन वर्तमान ने मिग 21 उड़ाया.

लड़ाकू विमानों की गर्जना के बीच, भारतीय वायु सेना के कमेंटेटर से जैसे ही पता चला कि इन लड़ाकू विमानों की फार्मेशन में करतब दिखा रहे मिग 21 को, वीर चक्र से सम्मानित, वही विंग कमान्डर अभिनन्दन वर्तमान उड़ा रहे हैं जो फरवरी में पाकिस्तान के लड़ाकू विमान को ध्वस्त करके लौटे थे तो हिंडन एयर बेस का मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा. दर्शकों, सैनिकों और फौजी अधिकारियों से लेकर भारतीय वायु सेना के नवनियुक्त प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया की बजाई तालियाँ इस योद्धा के प्रति सम्मान का द्योतक थीं जो अपने मिग से ही, उससे बेहतर माने जाने वाले पाकिस्तानी एफ 16 लड़ाकू विमान को उसी के देश में ज़मींदोज़ करके लौटे था और इसके लिए उसने अपनी जान की भी परवाह नहीं की थी.

भारत की राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा पर हिंडन एयर बेस पर ये मौका था भारतीय वायु सेना की 87 वीं वर्षगाँठ का जिसमें भारतीय वायु सेना ने अपना ज़बरदस्त आसमानी पराक्रम दिखाया. विमानों की फ़ॉर्मेशन और कलाबाजियों ने सबका मन मोह लिया. इस अवसर पर भारतीय वे सेना के एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया के साथ साथ थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन सिंह रावत और नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह भी मौजूद थे. यहाँ आने से पहले तीनों सेनाओं के प्रमुख इण्डिया गेट के पास बने युद्ध स्मारक पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि स्वरूप सलामी देकर आये थे.

एयर चीफ मार्शल भदौरिया ने जनरल सैल्यूट के बाद जवानों को सम्बोधित किया और कहा कि हाल के वर्षों में बदले भूगोलीय राजनीतिक माहौल और अनिश्चितताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कई चुनौतियां खड़ी कर डाली हैं. उन्होंने वायु सैनिकों से कहा कि इसके लिए उनका हमेशा चौकस रहना बेहद अहमियत रखता है. वायु सेना दिवस के मौके पर भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए अपने संदेश में कहा,” आज, वायु सेना दिवस पर, एक गौरवान्वित राष्ट्र हमारे वायु योद्धाओं और उनके परिवारजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है. भारतीय वायु सेना अत्यंत समर्पण और उत्कृष्टता के साथ निरंतर भारत की सेवा कर रही है.”

8 अक्टूबर 1932 को रॉयल एयर फ़ोर्स के मात्र 6 प्रशिक्षित अधिकारियों और 19 हवाई सैनिकों और चार वेस्टलैंड वापिती विमानों के साथ थल सेना के सहयोग के लिए बनी वायु सेना की वर्तमान ताकत को देखकर किसी का भी हैरान होना लाज़मी है. हिंडन एयरबेस पर आसमान आज दशकों पुराने घातक रूसी तकनीक से बने मिग जेट फाइटरों से लेकर सुखोई एमकेआई 30 (SU MKI 30), मिराज़, अमेरिका से खरीदे गये चिनुक और अपाचे अटैक हेलीकाप्टर और भारत में बने हल्के लड़ाकू एयर क्राफ्ट (LCA) तेजस जब आसमान पर उड़ान भर रहे थे तो लग रहा था कि ये भारत की वायु शक्ति और इसकी वायु सेना की निरंतर बढ़ती शक्ति की कहानी बयाँ कर रहे हों.

इतना ही नहीं आज यहाँ विंटेज विमान 40 साल पुराना डकोटा भी परवाज़ भरते देखा गया. डकोटा डी सी -3 विमान भारतीय वायु सेना के बड़े में 1940 में शामिल किया गया था और इसने 1988 तक सेवा दी. अपने ज़माने के बेहतरीन इस परिवहन विमान की उड़ान आकर्षण का केंद्र बनी.

भारतीय वायु सेना की वर्षगाँठ के इस समारोह में पूरे एयर शो के दौरान विमानों की अलग अलग फोर्मेशन विभिन्नता और रोमांच से भरी थीं. एएन-32 विमान से झंडे के साथ कूदे आकाश गंगा दल ने हमेश की तरह समां बाँधा और दर्शकों की तालियों में तारीफ़ बटोरी.

वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान को कामयाब हवाई हमले के लिए साइटेशन देकर सम्मानित किया. सिगनल यूनिट को भी साइटेशन देकर सम्मानित किया गया. सिग्नल यूनिट की तत्परता के कारण 27 फरवरी को पाकिस्तान का जम्मू पर हमला करने का प्लान बेकार हो गया था.

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