एक हनुमान मन्दिर जो भारतीय वायु सेना के लिए बेहद ख़ास है

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हनुमान मन्दिर
श्री संजीवनी हनुमान मन्दिर

उत्तर भारत के सबसे खूबसूरत छावनी क्षेत्रों में से एक राजधानी दिल्ली के समीपवर्ती हिल स्टेशन कसौली के मनकी प्वाइंट (Manki Point ) के हनुमान मन्दिर के साथ जुड़ती जा रही दिलचस्प घटनायें और सुविधाओं में हो रहा इज़ाफा, यहाँ आने वाले सैलानियों और श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ा रहा है. कसौली की सबसे ऊँची चोटी पर स्थित ये वानर देव हनुमान का मन्दिर होने के अलावा यहाँ बंदरों की तादाद बहुत ज़्यादा होने की वजह से लोग इसे मनकी प्वाइंट (MANKI POINT) की जगह मंकी प्वाइंट (MONKEY POINT) कहने लग पड़े हैं. मनकी प्वाइंट इसलिए कहा जाता था कि यहाँ आने वाले की मन की मुराद पूरी होती थी. जैसा कि सैन्य और पर्वतीय अभियानों में चोटी या कुछ खास जगहों को चिन्हित करने के लिए उस स्थान के नाम के साथ प्वाइंट (बिंदु-Point) लगा दिया जाता है वैसा ही यहाँ हुआ था.

मन्दिर की स्थापना के बारे में मान्यता ये है कि जब हनुमान मूर्छित लक्ष्मण के इलाज के लिए संजीवनी बूटी युक्त पहाड़ उठाकर ला रहे थे तो उनका पांव इस चोटी से टकरा गया था. इसी घटना से जोड़कर स्थानीय लोगों ने यहाँ मन्दिर का निर्माण कर दिया. वायु सेना ने इसे नाम दिया है श्री संजीवनी हनुमान मन्दिर. इस मन्दिर से जुड़ी आधुनिक युग की कुछ ऐसी घटनाएं हैं जिन्होंने भारतीय वायु सेना के अधिकारियों के जेहन में मन्दिर के प्रति अगाध आस्था पैदा की है.

हनुमान मन्दिर
स्वागत है…श्री संजीवनी हनुमान मन्दिर.

भारतीय वायु सेना के स्टेशन के क्षेत्र में होने और संवेदनशीलता के लिहाज़ से मन्दिर की देखभाल वायु सेना ने ही अपने हाथ में ले रखी है. माना ये जाता है कि वायु सेना के इस स्टेशन पर आने वाले अधिकारियों के लिए यहाँ का दौरा तब तक कामयाब नहीं हो पाता जब तक वह अपने दौरे में मन्दिर दर्शन का प्लान न जोड़ें. ऐसी तमाम बातें यहाँ सुनने को मिलती हैं. मन्दिर प्रबंध से जुड़े एक अधिकारी बड़ा ही दिलचस्प वाकया बताते हैं कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्टेशन दौरे का प्लान बनाया. वह जब भी यहाँ आने लगते तभी कुछ न कुछ ऐसा हो जाता कि उनको यहाँ आना टालना पड़ता था. एक बार तो मौसम खराब हो गया और उन्हें दौरा रद्द करना पड़ा. यही नहीं एक बार तो उनका हेलिकॉप्टर यहाँ पहुँच भी गया लेकिन उस इकलौते हेलीपेड पर लैंड ही ना हो सका जो मन्दिर के बगल में बना है. कुछ न कुछ ऐसा ही इत्तेफाक एक दो नहीं पूरे चार दफा हुआ. तब किसी ने सलाह दी तो अधिकारी के दौरे के कार्यक्रम में मन्दिर दर्शन करने का शेड्यूल जोड़ा गया. इसके बाद पांचवीं बार में वह सुरक्षित व समय पर लैंड कर गये.

श्रद्धालुओं की बढ़ती तादाद :

हनुमान मन्दिर
श्री संजीवनी हनुमान मन्दिर

यूँ तो मन्दिर की गतिविधियों और कार्यक्रमों का ज़िम्मा वायु सेना ने ले रखा है लेकिन इसके संचालन के लिए आम लोगों को ही नौकरी पर ही रखा गया है. फिलहाल इसके लिए 12 लोग हैं जिनको मन्दिर में प्राप्त होने वाले दान से ही वेतन दिया जाता है. समुद्र तट से 6500 फुट की ऊंचाई पर बने इस मन्दिर में यूँ तो रोज़ाना यहाँ तकरीबन 1500 लोग आते हैं लेकिन सप्ताहांत (वीकेंड Weekend ) यानि शनिवार और इतवार को ये तादाद दोगुनी हो जाती है. ये तादाद तो उनकी है जो एयर स्टेशन के बाहर से आने वाले नागरिक हैं. बड़ी संख्या में सैनिकों के परिवार वाले भी आते हैं जो इसी क्षेत्र में रहते हैं. बड़े ओहदों पर बैठे लोगों और नेताओं का भी श्री संजीवनी हनुमान मन्दिर दर्शन के लिए आना लगा रहता है. एयर स्टेशन तक पहुँचने के बाद चोटी पर करीब 500 फुट की चढ़ाई सीढ़ियों के ज़रिये पूरी करके श्री संजीवनी हनुमान मन्दिर पहुंचा जाता है.

ब्रिटिश शासन काल में बनाये गये, खूबसूरत देवदार के खूब ऊँचे ऊँचे वृक्षों से भरपूर घाटी वाली कसौली छावनी के इस एयर स्टेशन के मन्दिर में, साल में दो बार बड़ा भंडारा होता है. एक तो हरेक साल मई महीने के दूसरे शनिवार को स्थानीय निवासियों के ग्राम देवता की पूजा के मौके पर कराया जाता है . दूसरा हरेक साल 1 दिसम्बर को यानि जिस तारीख को एयर फ़ोर्स ने इसे टेक ओवर किया था. ये कार्यक्रम भारतीय वायु सेना कराती है. ऐसे अवसरों पर अक्सर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है. इसके अलावा यहाँ नियमित रूप से साप्ताहिक आयोजन भी होते हैं.

मन्दिर के सफ़र में सुविधाएँ :

श्रद्धालुओं की तादाद को देखते हुये और बंदरों से सुरक्षा के मद्देनजर मन्दिर के रास्ते में ऐसी जगह बनाई गई हैं जहां श्रद्धालु रुक कर चंद पलों के लिए आराम कर सकें या जलपान कर सकें. दो जगह पर जलपान गृह बने हुए हैं जहां विभिन्न तरह के शाकाहारी खाने और पैकेट बंद स्नैक्स भी मिलते हैं. कुछ कुछ जगह रास्ते को अस्थाई शेड से ढका गया है ताकि बारिश या तेज़ धूप से बचने के लिए ठिकाना मिल सके. हाल के अरसे में रास्ते को आराम दायक, सहज और सुंदर बनाने के कुछ उपाय यहाँ किये गये हैं. ऐसी ही कुछ और छोटे मोटे और काम यहाँ होने प्रस्तावित हैं. जैसे शिखर पर मन्दिर के पास जलपान गृह के बाहर सुरक्षित शेड बनाना और रास्ते में आधुनिक शौचालयों का निर्माण.

मन्दिर दर्शन कब और कैसे :

एकदम मस्त मौसम और कुदरती खूबसूरती से लबरेज़ कसौली के श्री संजीवनी हनुमान मन्दिर तक पहुँचने के लिए कुछ अलग परिस्थितियाँ हैं. छावनी एवं प्रतिबंधित क्षेत्र होने की वजह से यहाँ कुछ सख्ती का सामना करना पड़ता है. सुबह 9 से शाम 5 बजे के बीच ही मन्दिर खुलता है लेकिन वहां तक जाने के लिए बाकायदा पास बनवाना पड़ता है. इसके लिए कोई न कोई सरकारी फोटो पहचान पत्र होना ज़रूरी है. आधार, वोटर आई कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस जैसा कुछ. ये पास रास्ते में ही बनता है जिसके बाद ही एयर स्टेशन क्षेत्र में एंट्री मुमकिन है. यहाँ पर भी तलाशी होती है. हालांकि यहाँ लिखा हुआ नहीं है लेकिन विदेशियों के लिए जाना मना है. एक अधिकारी ने बताया कि श्री संजीवनी हनुमान मन्दिर जाने के लिए विदेशियों को विशेष अनुमति लेनी होती है जिसकी अग्रिम सूचना उन्हें यहाँ मुख्यालय से मिलती है.

इन चीजों की मनाही :

मोबाइल फोन, कैमरा, लैपटॉप, पेन ड्राइव जैसा सामान नहीं ले जाया जा सकता. ये सामान या तो अपने वाहन में छोड़ना पड़ता है जो स्टेशन के बाहर सड़क किनारे खड़े करने होते हैं. वैसे वहां सामान रखने के लिए लाकर भी हैं. इसके लिए मामूली तौर पर कुछ फीस देनी पडती है. सामान के बदले में टोकन मिलता है जो लौटने पर देने पर सामान वापस मिल जाता है.

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