अमेरिका में जन्म आधारित नागरिकता का हक बदलने की ट्रम्प की कोशिश नाकाम

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अमेरिका की सर्वोच्च अदालत
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अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जन्म के आधार पर नागरिकता (birthright citizenship) खत्म करने की कोशिश को खारिज कर दिया. जजों ने उस पुराने सिद्धांत को फिर से दोहराया कि अमेरिका की ज़मीन पर पैदा होने वाले लगभग सभी बच्चे अमेरिकी नागरिक होते हैं.

ट्रंप के शासकीय आदेश ( executive order ) का मकसद यह था कि बिना कागज़ात वाले अप्रवासियों और अस्थायी विदेशी निवासियों के बच्चे सिर्फ इसलिए अमेरिकी न बन सकें क्योंकि वे यहां पैदा हुए हैं .  बहुमत की तरफ से सुप्रीम कोर्ट का फैसला लिखते हुए चीफ जस्टिस जॉन जी. रॉबर्ट्स जूनियर ने कहा कि ट्रंप का शासकीय आदेश अमेरिकी  संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है.

चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने लिखा, “नागरिकता, तब भी और अब भी, अधिकार पाने का हक थी — हमारे राजनीतिक समुदाय में आज़ादी से हिस्सा लेने का हक. 14वें संशोधन को बनाने वालों ने यह वादा ‘इस देश में आज़ाद पैदा हुए हर व्यक्ति’ तक पहुंचाया  था.”

उन्होंने आगे कहा: “हम आज भी उस वादे को निभा रहे हैं. ”

6-3 के इस फैसले ने ट्रंप की उस कोशिश पर रोक लगा दी जो वे एक दशक से ज़्यादा समय से इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए कर रहे थे.  उन्होंने 2011 में इस सवाल को ज़ोर-शोर से उठाया था कि कौन अमेरिकी होने का दावा कर सकता है, जब उन्होंने यह नस्लवादी झूठ फैलाया था कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा असल में केन्या में पैदा हुए थे और व्हाइट हाउस के लिए अयोग्य थे.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की राष्ट्रपति ट्रम्प ने आलोचना की है. उन्होंने फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया  अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखी पोस्ट में व्यक्त करते हुए इसे ‘ खराब फैसला ‘ करार दिया है . ऐसे में माना जा रहा है कि अपने शासकीय आदेश को अमल में लाने की कोशिश के तौर पर ट्रम्प अमेरिकी संसद में प्रस्ताव लाएंगे .