105 साल की मन कौर ने ज़िन्दगी की दौड़ पूरी पूरी कर ली

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मन कौर
मन कौर (फाइल फोटो)

लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनी दुनिया की सबसे बुजुर्ग एथलीट पंजाब की मन कौर की पार्थिव देह कल राजधानी चंडीगढ़ के शवदाह गृह से पंचतत्व में लीन हो गई. मन कौर सुरक्षा बलों के कार्मिकों और खास तौर से पंजाब पुलिस के उन कर्मियों की सेहत के बेहतरी की योजना पर काम करने की इच्छुक थीं जो मोटापे का शिकार होते हैं. देश विदेश में असंख्य खेल मुकाबलों में हिस्सेदारी ही नहीं कइयों में मेडल तक जीत कर 105 वर्षीय मन कौर ने साबित किया कि उम्र महज़ एक संख्या होती है और अगर इंसान मानसिक रूप से तैयार हो तो उसके लिए सम्भावनाओं और सफलताओं का असीमित संसार है और ऊंचाई भी असीमित आकाश है.

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मन कौर (फाइल फोटो)

साल भर पहले ही दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविद समेत तमाम लोग उनकी फुर्ती देखकर हैरान रह गये थे जब वह यहाँ आयोजित समारोह में नारी शक्ति सम्मान लेने के लिए मंच पर पहुंची थीं. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनसे प्रभावित हुए और उनका आशीर्वाद लिया. ये कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हुआ था. लेकिन ऐसी शख्सियत की अंतिम विदाई में पंजाब सरकार या चण्डीगढ़ प्रशासन के प्रतिनिधियों का ना पहुंचना वहां मौजूद काफी लोगों को खला. यूँ आर्थिक तौर पर पंजाब सरकार ने उनकी बीमारी के दौरान मदद ज़रूर की. मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पटियाला के डीसी के ज़रिये उन्हें पांच लाख रूपये का चेक भिजवाया था. शिरोमणि अकाली दल के विधायक एन के शर्मा ने भी एक लाख रुपये की सहायता राशि दी थी. मास्टर्स एथलेटिक्स एसोसिएशन ने भी उनको आर्थिक मदद की थी.

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मां मन कौर के पार्थिव शरीर के पास बैठे गुरदेव सिंह

बीबी मन कौर को ‘गाल ब्लैडर’ लीवर का कैंसर हो गया था. डॉक्टरों का कहना था कि उम्र के इस पड़ाव में उनकी सर्जरी मुमकिन नहीं. मन कौर कुछ दिन से चंडीगढ़ के पास डेराबस्सी के शुद्धि आयुर्वेद पंचकर्म अस्पताल में इलाज करवा रही थीं. शनिवार को उनकी हालत में सुधार भी दिखाई दिया लेकिन अचानक ही उन्होंने प्राण त्याग दिए जिसने सबको हैरान कर दिया.

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मन कौर के साथ रक्षक न्यूज के संपादक संजय वोहरा (बाएं) और पुत्र गुरदेव सिंह (फाइल फोटो)

दो साल पहले जब रक्षक न्यूज़ की टीम ने मन कौर और उनके धावक पुत्र गुरदेव सिंह से पटियाला स्थित पंजाबी यूनिवर्सिटी परिसर के फ्लैट में मुलाकात की थी तो उन्होंने मोटापे के शिकार पुलिसकर्मियों की सेहत बेहतर किये जाने पर चर्चा की थी. मन कौर ने बातचीत के दौरान कहा था कि उनकी इच्छा है कि वह मोटी तोंद वाले पुलिसकर्मियों को पतला करने की किसी योजना पर काम शुरू करें. बहुत कम बातचीत और बहुत कम खाने पीने वाली मन कौर सादगी वाली शख्सियत थीं.

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मन कौर के साथ इंदराज सिंह (दाएं) और पुत्र गुरदेव सिंह (फाइल फोटो)

मन कौर का जन्म पंजाब के ऐतिहासिक शहर पटियाला में 1 मार्च 1916 में हुआ था. उन्होंने 93 साल की उम्र में अपने बेटे गुरदेव सिंह के कहने पर दौड़ लगाना शुरू किया था. अमेरिका, स्पेन, न्यूजीलैंड, ऑकलैंड और केनडा समेत कई देशों में मास्टर्स मुकाबलों में हमउम्र वर्ग में उन्होंने गोल्ड मेडल जीते. साल 2011 में ही मन कौर को एथलीट ऑफ द ईयर चुना गया. मन कौर ने कुल मिलाकर 35 राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय मेडल जीते थे.

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