103 साल की एथलीट मन कौर का पंजाब पुलिस को फिट करने का नुस्खा

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पंजाब पुलिस
मन कौर...जबरदस्त

103 साल की माँ और 80 साल के बेटे की इस दुर्लभ जोड़ी ने खेल के क्षेत्र में इस उम्र में जो मुकाम हासिल किया है वह तो काबिले तारीफ़ है ही, इन्होंने अब जो सोचा है वह सच में एक और बेहतरीन सोच का नमूना है. विभिन्न देशों में सीनियर एथलेटिक्स मुकाबलों में विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले ये मां बेटे अब हज़ारों लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं. ये दोनों न सिर्फ अपनी सेहत को बनाये रखे हुए हैं बल्कि अभी भी अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में रिकार्ड बनाने और तोड़ने के लिए अपनी शारीरिक क्षमता का विकास करने की तरकीबें आजमाते रहते हैं. मेडल के साथ साथ अब इनकी नजरें उन पुलिसकर्मियों के शरीर पर हैं जो मोटापे का शिकार हैं. ये मां बेटे मिलकर, पंजाब पुलिस में तोंद वाले पुलिसकर्मियों को स्मार्ट बनाना चाहते हैं और इसके लिए इनके पास राम बाण नुस्खा भी है.

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केफर ग्रेन वाले मर्तबान के साथ गुरदेव सिंह

पंजाब की ऐतिहासिक और विशाल पंजाबी यूनिवर्सिटी (पटियाला) के परिसर में छोटे से फ्लैट में रह रहे ये हैं मन कौर और उनके बेटे गुरदेव सिंह. मन कौर ने तो उम्र के उस पड़ाव में ट्रैक पर दौड़ने की शुरुआत की जिस उम्र के आसपास तक भी करोड़ों लोग पहुँच नहीं पाते. साधारण जीवन और धार्मिक प्रवृत्ति की मन कौर को दौड़ने के लिए 93वें साल की उम्र में तैयार भी किसी और ने नहीं, उस बेटे गुरदेव ने किया जिसने उनकी अंगुली पकड़कर चलना सीखा था.

एथलेटिक्स में शुरू से रुझान रखने वाले गुरदेव ने चण्डीगढ़ में रिटायरमेंट की उम्र में दौड़ मुकाबलों में हिस्सा लेना शुरू किया था. अपने घर के पास के पार्क में जब वह दौड़ने की प्रैक्टिस के लिए जाते तो मां को मॉर्निंग वाक के हिसाब से साथ ले जाते थे. एक दिन बातों बातों में उन्होंने माँ मन कौर से भी दौड़ने के लिए कहा और मन कौर भी हंसी हंसी में दौड़ने निकल गई. वो भी 50 -100 नहीं पूरे 400 मीटर.

माँ की इस क्षमता को देखकर गुरदेव भी हैरान थे. 16 साल पहले की इस घटना से ही मन कौर का जीवन बदल गया. स्कूल की इमारत भी जिसने न देखी वो मन कौर सीनियर खेल मुकाबलों का सितारा बन गई. विदेशों में मुकाबलों में हिस्सा ही नहीं, मेडल लेने और रिकॉर्ड तोड़ने के साथ साथ कायम भी करने लगी. न सिर्फ दौड़ बल्कि शॉट पुट और जेवलिन थ्रो भी वह खेलने लगीं.

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मन कौर और उनके जीते मेडल.

दीवार पर टंगे मेडल और ताक पर रखी ट्राफियों से सजे छोटे से कमरे में सिंगल बेड पर तकिये के सहारे आधी लेटी अल्पभाषी मन कौर से जब बचपन में पढ़ाई की बात पूछी गई तो उनके जिस्म अचानक फुर्ती और आँखों में चमक आ गई. उठकर बताने लगीं कि किस तरह बिना स्याही और कलम के भी उन्होंने अक्षर ज्ञान हासिल किया. पिता हाथ पकड़कर ज़मीन पर उनकी अंगुली पकड़कर गुरमुखी के अक्षर की आकृति बनाते थे, ‘बस इसी तरह सिख लेया पढ़ना. हुण सारे पाठ कर लेंदी हां’ . सीखने का जज़्बा और कमाल के जीवट वाली मन कौर बातचीत में अजनबियों से तो धीरे धीरे ही खुलती हैं.

एक सदी पहले पैदा हुई मन कौर को उन वर्दीधारी पुलिसकर्मियों को देखकर तकलीफ होती है जो मोटापे का शिकार होते हैं. वो चाहती हैं कि सब फिटनेस को लेकर जागरूक हों, ‘ मोटे मोटे ठिड चंगे थोड़े लगदे हन’. गुरदेव सिंह अपनी माँ मन कौर के विचार पर ज़ोर देते हुए बताते हैं कि ऐसी ही बात उनकी माँ ने उत्तर भारत के आयकर विभाग के अधिकारियों के सम्मेलन में कही थी और अधिकारियों की एक वर्कशॉप भी की थी जिसमें उन्हें वज़न कम करने के तरीके भी बताये थे.

सबसे उम्रदराज़ एथलीट सरदारनी मन कौर के पुत्र सरदार गुरदेव सिंह कहते हैं, ‘ शराब, मीठा और तला हुआ खाना छोड़ दिया जाए तो यहाँ के पुलिसकर्मियों का मोटापा वैसे ही कम हो जाए’. गुरदेव सिंह केफर ग्रेन (kefir grain) के इस्तेमाल पर जोर देते हैं जिसे न सिर्फ वो खुद और उनकी माँ इस्तेमाल करते हैं बल्कि अपने मिलने जुलने वालों को भी उपलब्ध कराते हैं. केफर ग्रेन एक तरह का बैक्टीरिया है.

गुरदेव सिंह का दावा है कि चंद ही दिनों में ‘वर्जिश, खाने के थोड़े से परहेज़ और केफर ग्रेन के इस्तेमाल’ वाले फ़ॉर्मूले से मोटापे के शिकार पुलिसकर्मियों को वो तोंद से छुटकारा दिलाकर फिट कर सकते हैं. वे इसकी शुरुआत पटियाला से ही करना चाहते हैं. केफर ग्रेन का इस्तेमाल दही की तरह किया जाता है जोकि बेहद गुणकारी और पौष्टिकता से भरपूर होता है.

मन कौर ने ये सब किया :

दुनिया की सबसे ज्यादा प्रभावशाली टॉप 10 सिख महिलाओं की फेहरिस्त में जगह रखने वाली मन कौर ने ऑकलैंड में दो साल पहले यानि अप्रैल 2017 में आयोजित वर्ल्ड मास्टर्स गेम्स में 100+ साल उम्र वाली श्रेणी में 100 मीटर रेस और जेवलिन थ्रो का रिकॉर्ड तोड़ा था. 2011 में उन्होंने पहली बार किसी अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक मुकाबले में हिस्सा लिया जो सेक्रेमेंटो में हुए थे. इसमें मन कौर ने दो गोल्ड मेडल जीते और उन्हें एथलीट ऑफ़ द ईयर घोषित किया गया था.

दौड़ने के लिए ही पैदा हुई महिला के तौर अपनी नई की पहचान बनाने में कामयाब हुई मन कौर अब तक अमेरिका, स्पेन, न्यूज़ीलैंड, केनडा, ताइवान और पोलैंड में अपने जीवट का लोहा मनवा चुकी हैं. मन कौर को 2017 लौरेयस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवार्ड्स (laureus World Awards) के लिए मनोनीत किया गया था. 103 साल की मन कौर अब पिंकथोन की ब्रैंड अम्बेसडर (Pinkathon Brand Ambassador) हैं.