भारत में पहली बार ड्रोन ने खून का सैम्पल पहुंचाया, सरकार नये नियम भी बना रही है

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भारत में पहली बार ड्रोन के जरिए खून का सैम्पल पहुंचाया गया. फोटो साभार : एएनआई

भारत के उत्तराखंड राज्य में मानव रहित हवाई वाहन यानि ड्रोन का ऐसा प्रयोग किया गया जो पर्वतीय और दुरुह इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी में क्रांतिकारी कदम कहा जा सकता है. अपने आप में अनूठे इस प्रयोग के तहत पहाड़ी इलाके में मरीज के खून का नमूना जांच के लिए भेजने में महज़ 18 मिनट लगे जबकि फासला 30 किलोमीटर का था. यहाँ सड़क के रास्ते इतना फासला तय करने में एक से डेढ़ घंटा लग सकता था. ये ब्लड सैंपल नंदगाँव स्थित ज़िला अस्पताल से टिहरी के एक अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में भेजा गया था. कुल मिलाकर देखा जाये तो इस ड्रोन ने नमूना पहुँचाने के लिए 100 किलोमीटर प्रति घंटे की उड़ान भरी.

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पैक किया जा रहा खून का सैम्पल. फोटो साभार : एएनआई
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खून का सैम्पल ले चला ड्रोन. फोटो साभार : एएनआई

समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से मीडिया में आई जानकारी और तस्वीरों के मुताबिक ये ड्रोन आईआईटी के छात्र रहे निखिल उपाध्ये की कम्पनी सी डी स्पेस रोबोटिक्स लिमिटेड ने बनाया है जो एक बार में चार्ज की गई बैट्री के बूते पर 50 किलोमीटर तक की परवाज़ भर सकता है. इस दौरान ये 500 किलोग्राम तक ही वजन उठाकर ले जा सकता है.

ये प्रयोग, टिहरी के बुरारी ज़िला अस्पताल के एक डॉक्टर के मुताबिक, ये टिहरी गढ़वाल में चल रहे टेली मेडिसिन प्रोजेक्ट का एक हिस्सा है और ये काफी हद तक सफल भी रहा. रक्त का नमूना कहीं खराब न हो जाए इसलिए कूल किट (ठंडी थैली) में डालकर भिजवाया गया था ये प्रयोग उन इलाकों के लोगों के लिए तो वरदान हैं इनके पास स्वास्थ्य की सुविधाएं नाममात्र की हैं या जो दूरदराज़ में हैं और आने जाने के रास्ते ठीक नही हैं. ड्रोन की विश्वसनीयता को परखने के लिए जल्द ही यहाँ ड्रोन के ऐसे और ट्रायल किये जाएंगे.

ड्रोन के नियम कायदों पर फिर माथापच्ची :

वैसे ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर कुछ नियम कायदे बनाये गए हैं लेकिन इन नियमों में बदलाव और नये नियम कायदे बनाने की कवायद शुरू हो गई है ताकि इनका वीवीआईपी सुरक्षा के साथ-साथ वाणिज्य के लिए इस्तेमाल किया जा सके. इसके लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय न की तरफ से पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो से कहा गया है. नागरिक विमानन महानिदेशालय ने पिछले साल दिसम्बर में ड्रोन के इस्तेमाल सम्बन्धी नीति घोषित की थी जिसके मुताबिक 250 ग्राम से ज्यादा के वज़न वाले ड्रोन को पंजीकृत कराना अनिवार्य किया गया. वहीं 200 मीटर से ऊपर या ‘नो फ्लाई ज़ोन’ में ड्रोन उड़ाने की इजाज़त लेना भी ज़रूरी है.

डीजीसीए ने ड्रोन को 5 श्रेणियों में विभाजित किया है जिसमें अधिकतम 150 किलो तक के वजन वाला है. ऐसे ड्रोन पर रेडियो प्रणाली और सर्विलांस तकनीक से लैस होना ज़रूरी है ताकि उसे नियंत्रित करने के साथ साथ उसकी मौजूदगी के स्थान और रफ्तार पर नज़र रखी जा सके.