रश्मि शुक्ला महाराष्ट्र की पहली महिला डीजीपी नियुक्त :विवाद और विरोध भी

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आईपीएस रश्मि शुक्ला

भारतीय पुलिस सेवा के महाराष्ट्र कैडर में सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से एक रश्मि शुक्ला को महाराष्ट्र का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है. 1988 बैच की आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला महाराष्ट्र राज्य की  पुलिस की कमान संभालने वाली पहली महिला अफसर होंगी. रश्मि शुक्ला अभी तक केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर रहते सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी – ssb ) की प्रमुख थीं.

रश्मि शुक्ला महाराष्ट्र पुलिस के डीजीपी की कुर्सी संभालेंगी जो रजनीश सेठ के रिटायर होने के बाद से खाली है. रजनीश सेठ को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष  बनाया गया है. तब से उनके ओहदे का काम मुम्बई के पुलिस कमिश्नर विवेक  फणसलकर ( vivek phansalkar) संभाल रहे हैं.
आईपीएस रश्मि  शुक्ला ( ips rashmi shukla )  ने पुणे में पुलिस आयुक्त के रूप में भी काम किया है, जहां उन्हें ‘बडी कॉप’  ( buddy cop ) जैसी पहल शुरू करने के लिए जाना जाता था. इस पहल को  पूरे महाराष्ट्र  राज्य में अपनाया गया था.

रश्मि शुक्ला से जुड़े विवाद :   
आईपीएस रश्मि शुक्ला को महाराष्ट्र का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किये जाने को लेकर विरोध हो रहा है जिसका एक कारण उनके जुड़े रहे विवाद भी हैं . जहां उनकी तैनाती को सियासी चश्मे से देखा जा रहा है वहीं विरोध भी इसी संदर्भ में माना जा रहा है.
दरअसल  2019 में राज्य में महा विकास अघाड़ी (एमवीए – mva ) सरकार के सत्ता में आने के बाद, रश्मि शुक्ला को  कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी  की  सरकार ( bjp government ) के करीबी के रूप में देखा गया. इसके साथ ही  20 20 में उन्हें राज्य खुफिया आयुक्त (एसआईडी sid ) के पद से हटाकर सिविल डिफेंस में स्थानांतरित कर दिया गया .  फरवरी 2021 में रश्मि शुक्ला केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चली गई. पहले उनको केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल ( central reserve police force ) में अतिरिक्त महानिदेशक के तौर पर तैनात किया गया. इसके बाद रश्मी शुक्ला महानिदेशक बनी और उनके सशस्त्र सीमा बल ( ssb ) का प्रमुख बनाया गया .महाराष्ट्र राज्य में एमवीए सरकार के कार्यकाल के दौरान ऐसी  तीन एफआईआर दर्ज की गईं थीं जिसमें आरोप लगाया गया कि एमवीए नेताओं की कॉल को अवैध रूप से इंटरसेप्ट किया गया और  उसका डेटा राज्य खुफिया विभाग (एसआईडी) ने  विपक्षी नेता देवेंद्र फडणवीस को लीक कर दिया गया. एस आई डी  का  नेतृत्व आईपीएस रश्मि  शुक्ला कर रहीं थीं.   इन तीन मामलों में से दो में रश्मि शुक्ला को आरोपी बनाया गया था.

पिछले महीने, बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ पुणे और मुंबई में दर्ज तीन एफआईआर में से दो को रद्द कर दिया था. महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फड़णवीस सरकार के सत्ता में आने के बाद तीसरा मामला सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया.  बाद में अदालत द्वारा सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अनुमति देने के बाद यह मामला बंद कर दिया गया. इससे रश्मि शुक्ला के  राज्य में लौटने का रास्ता साफ हो गया.डीजीपी के रूप में रश्मि शुक्ला का  कार्यकाल  ?

रश्मि शुक्ला जून 2024 में सेवानिवृत्त होंगी , इसलिए उनका कार्यकाल छह महीने का होगा.  हालाँकि, महाराष्ट्र सरकार उन्हें एक्सटेंशन दे सकती है जैसा कि सरकार ने पहले भी  अन्य पुलिस महानिदेशकों के मामले में किया है .

जबकि सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह केस में फैसले के मुताबिक़  डीजीपी के लिए दो साल के कार्यकाल होना चाहिए .  एक अधिकारी ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम में तभी  दो साल के कार्यकाल का प्रावधान  है यदि अधिकारी सेवानिवृत्त नहीं हो रहा है.

सियासी विरोध : 
शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी एनसीपी इसी आधार पर रश्मि शुक्ला की तैनाती का विरोध कर रही है . एनसीपी प्रवक्ता विद्या चवान ने संघ लोक सेवा आयोग ( यूपीएससी – upsc ) के नियमों का हवाला देते हुए अपने बयान में कहा कि नियम है  डीजीपी के पद पर उसी अधिकारी के नाम पर विचार किया जा सकता है जिसका कार्यकाल कम से कम 6 महीने का बचा हो. उनका कहना है कि क़ानून के नजरिये से भी बुरा है और साथ ही चुनाव आयोग की तरफ से बनाए गे  नियमों  का भी उल्लंघन है क्योंकि यह तैनाती इसी साल देश भर में होने वाले  लोकसभा चुनाव ( loksabha elections 2024)  को देखते हुए की गई है .