इंसानियत का फर्ज पूरा कर CRPF की 168 बटालियन के जवान बने हीरो

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CRPF की 168 बटालियन
बीजापुर में एक गरीब पिता अपनी बीमार बेटी को चादर में ढोने को विवश. Source/CRPF

दूसरों की पीड़ा समझने और उसे कम करने में कभी कभी थोड़ी सी संवेदनशीलता भी बहुत काम कर जाती है. इतना ही नहीं कभी तो ये इंसानी रवैया मौत को भी हरा देता है. कुछ कुछ ऐसा ही हुआ नक्सलियों के गढ़ बने भारत के राज्य छत्तीसगढ़ के बीजापुर में और इस घटना में हीरो बने उसी केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ- CRPF) के जवान जो यहाँ अपनी जान हथेली पर रखकर नक्सलियों से निपट रहे हैं.

CRPF की 168 बटालियन
चादर में सिमटी बच्ची. Source/CRPF

जो भी इन तस्वीरों और हालात के बारे में जान रहा होगा वो पक्के तौर पर विचलित हुआ होगा. शायद आपको भी ये इन तस्वीरों में बीजापुर के उस गरीब पिता की मजबूरी और दर्द दिखाई देगा, परेशान करेगा जो पिता अपनी बीमार बेटी को किसी सामान की तरह ढोने को विवश है. सोचिये अगर ये तस्वीरें ही जब दर्दनाक हों तो इन हालात का चश्मदीद बनना कितना तकलीफ भरा होगा.

CRPF की 168 बटालियन
मगर रास्ते में सीआरपीएफ के जवानों ने देखा तो उनकी मदद की. Source/CRPF

बीमार बेटी चल पाने में भी असमर्थ थी, लगभग अर्धमूर्छित सी अवस्था में. न तो आसपास डाक्टरी सुविधा और न ही वाहन या और ऐसा साधन कि बेटी को अस्पताल ले जाया जा सके. बेटी को बचाने के लिए अस्पताल पहुँचाना जरूरी था सो परिवार ने डंडे में चादर के दोनों छोर बांधकर बेटी को उसमें डाला और सामान की तरह लादकर चल दिए.

CRPF की 168 बटालियन
…और अपने वाहन में लिटाकर उसे अस्पताल पहुंचाया. Source/CRPF

इस मजबूर और गरीब परिवार की कोई मदद करने वाला नहीं था और रहा भी होगा तो किसी ने मदद को हाथ नहीं बढ़ाया लेकिन वहीं रास्ते से गुजर रहे सीआरपीएफ के जवानों से रहा न गया. ये सीआरपीएफ की 168 वीं बटालियन के जवान वहां अपने वाहन से गुज़र रहे थे. सारा माजरा और बीमार लड़की की हालत देख उन्होंने बिना वक्त गंवाए मदद को अपने हाथ बढ़ाए. उन्होंने बच्ची को और उसके परिवार को वाहन में सवार करके तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचा दिया. ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी छा गयीं और साथ ही छा गया उन सीआरपीएफ जवानों की संवेदनशीलता और इंसानियत का फ़र्ज़ जो उन्हें दुआएं और वर्दी को सम्मान दिला रहा है.

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